इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीएचयू में 28 वर्षों से टेलीफोन लाइनमैन के रूप में कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग से जुड़ी याचिका पर केंद्र सरकार, यूजीसी और बीएचयू से जवाब मांगा है।
Varanasi News - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीएचयू में 28 वर्षों से टेलीफोन लाइनमैन के रूप में कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग पर केंद्र सरकार, यूजीसी और बीएचयू से जवाब मांगा है। याचिका 1998 से सेवा कर रहे कर्मचारियों द्वारा दायर की गई है। कोर्ट ने सभी पक्षों को जुलाई 2026 तक दलीलें प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीएचयू में 28 वर्षों से टेलीफोन लाइनमैन के रूप में कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग से जुड़ी याचिका पर केंद्र सरकार, यूजीसी और बीएचयू से जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायामूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने राम सिंह उर्फ शमशेर सिंह व अन्य की याचिका पर अधिवक्ता सौरभ तिवारी को सुनकर दिया है।
याचिका का विवरण
एडवोकेट सौरभ तिवारी ने कोर्ट को बताया कि याची 1998 से विश्वविद्यालय में सेवा दे रहे हैं। इस लंबे कार्यकाल के दौरान उनका रिकॉर्ड निष्कलंक रहा। विश्वविद्यालय ने स्वयं उनकी कार्यकुशलता को अति उत्तम प्रमाणित भी किया है। वर्ष 2004 में बीएचयू की टेलीकम्युनिकेशन सर्विसेज कमेटी ने इन्हें नियमित करने का प्रस्ताव पास किया था, जिसे तत्कालीन कुलपति ने 16 अक्तूबर 2004 को स्वीकृति दे दी। अगस्त 2005 में इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई लेकिन उसे लागू नहीं किया गया।
कर्मचारियों की स्थिति
उन्हें कहा गया कि केंद्रीय विवि होने से बीएचयू को आदर्श नियोक्ता होना चाहिए था लेकिन वह पिछले 28 वर्षों से कर्मचारियों को आर्टिफिशियल ब्रेक देकर संविदा पर काम करा रहा है, जो सीधे तौर पर शोषण है। रजिस्ट्रार ने नियमितीकरण की मांग 18 सितंबर 2025 के आदेश में खारिज कर दी है। कहा कि जब पद स्वीकृत हैं और कार्य की प्रकृति स्थायी है तो कर्मचारियों को अर्से तक दैनिक वेतनभोगी बनाए रखना असंवैधानिक है।
कोर्ट का आदेश
कोर्ट ने कहा कि जुलाई 2026 के दूसरे सप्ताह तक सभी पक्ष अपनी दलीलें और जवाब पूरा कर लें। अगली तिथि तक जवाब दाखिल नहीं होता तो उपलब्ध साक्ष्यों व अभिलेखों के आधार पर ही अंतिम फैसला कर दिया जाएगा।
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