नागरी प्रचारिणी सभा की सभी समितियां भंग, दोबारा होंगे चुनाव
नागरी प्रचारिणी सभा में 13 साल से दो समितियों के बीच चल रही खींचतान पर एसडीएम कोर्ट ने अंतत: विराम लगा दिया। एसडीएम सदर प्रमोद कुमार पांडेय ने...

वाराणसी। वरिष्ठ संवाददाता
नागरी प्रचारिणी सभा में 13 साल से दो समितियों के बीच चल रही खींचतान पर एसडीएम कोर्ट ने अंतत: विराम लगा दिया। एसडीएम सदर प्रमोद कुमार पांडेय ने सुनवाई के बाद संस्था की सभी समितियों को भंग कर दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया है। ये चुनाव फर्म्स सोसाइटी एवं चिट्स के सहायक निबंधक की निगरानी में होंगे। 2004 से 2007 तक संस्था की साधारण सभा के सदस्यों की सूची चुनाव का आधार बनेगी।
सन-1893 में स्थापित नागरी प्रचारिणी सभा का बेहद समृद्ध इतिहास रहा है। मगर वर्ष-2008 से यहां प्रबंध समिति को लेकर दो पक्षों में विवाद चल रहा था। प्रबंध समिति के संचालन के लिए दोनों पक्षों ने अपनी अपनी तरफ से एक एक प्रधानमंत्री नियुक्त कर रखा था। प्रकरण में याचिका दायर करने वाले रंगकर्मी व्योमेश शुक्ल ने बताया कि दोनों समितियों की खींचतान के चलते संस्था के पंजीकरण का नवीनीकरण वर्ष-2015 के बाद हुआ ही नहीं। इस दौरान संस्था दस्तावेजों में अस्तित्व में ही नहीं थी। इस बीच इस वर्ष दो जनवरी को एक प्रबंध समिति से प्रधानमंत्री रहे डॉ. पद्माकर पांडेय का देहांत हो गया। उनके बाद कुसुमाकर पांडेय को प्रधानमंत्री चुन लिया गया जो कि प्रबंध समिति के अधिकार क्षेत्र में ही नहीं आता।
पिछले वर्ष 23 नवंबर को व्योमेश ने एसडीएम सदर की कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान शोभनाथ यादव व स्व. डॉ. पद्माकर पांडेय के पक्षों से आपत्तियां प्रस्तुत की गईं। एसडीएम सदर ने दोनों आपत्तियों को बलहीन बताते हुए निरस्त करने के साथ सभी समितियों को भंग कर दिया। याचिका पर आदेश दिया कि सहायक निबंधक चिटफंड की निगरानी में संस्था की प्रबंध समिति का चुनाव कराया जाए।
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