
25 अमूर्त चित्रों में मुखर हुई 50 वर्षों की कला यात्रा
Varanasi News - वाराणसी में प्रो. मदनलाल की 40वीं एकल प्रदर्शनी 'राग झिंझोटी : विचार, दर्शन और अभिव्यक्ति' शुरू हुई। 25 अमूर्त चित्रों में भारतीय शास्त्रीय संगीत के राग झिंझोटी की भावनाएं रंगों और रेखाओं में व्यक्त की गई हैं। प्रदर्शनी 25 जनवरी तक राम छाटपार शिल्प न्यास की ईशी गैलरी में चल रही है।
वाराणसी, मुख्य संवाददाता। चित्र और मूर्ति शिल्प के क्षेत्र में 50 वर्षों की कला यात्रा 25 अमूर्त चित्रों के माध्यम से 40वीं एकल प्रदर्शनी में मुखर हुई। यह यात्रा है काशी के अंतरराष्ट्रीय ख्याति के शिल्पी प्रो.मदनलाल की। 25 अमूर्त शैली के चित्र उन्होंने राग झिंझोटी के आवरण में सामान्य सी दफ्ती पर एनामेल पेंट से बनाए हैं। इन चित्रों की प्रदर्शनी पौष पूर्णिमा की तिथि पर शनिवार को महेश नगर स्थित राम छाटपार शिल्प न्यास की ईशी गैलरी में 25 जनवरी तक के लिए आरंभ हुई। ‘राग झिंझोटी : विचार, दर्शन और अभिव्यक्ति’ शृंखला के अंतर्गत निर्मित अमूर्त चित्रों में जीवन की विविध भावनाएं मूर्त प्रतीत हो रही हैं।
यह कहना गलत नहीं होग कि भारतीय शास्त्रीय संगीत के राग झिंझोटी की अनुभूति दृश्य भाषा में रूपांतरित हुई है। कलाकार की संवेदना से परिपूर्ण कल्पनाशीलता ने राग झिंझोटी को स्मृति, करुणा और आनंद से निर्मित एक आंतरिक अनुभव बना दिया। उसी अनुभव की अभिव्यक्ति रंगों और रेखाओं में प्रभावशाली ढंग से हुई। प्रदर्शित कृतियां किसी कथा का सीधा कथन नहीं कह रहीं, बल्कि अनुभूति का आलोकमय संसार रच रही हैं। किसी चित्र के किसी ब्लॉक में राग के अनुकूल कोमलता का अहसास ठहरा हुआ है तो किसी ब्लॉक में जीवन की अतिद्रुत लय, नर्तन करते हुए दीदावर की दीद से होते हुए दिल तक उतर रही हैं। पिकासो की मुक्तता, जैक्सन पोलॉक की ऊर्जा, मोंड्रियन की संरचना और वान गॉग की संवेदना से प्रेरित प्रो.मदनलाल की मौलिकता हर चित्र की ओट से झांक रही है। संगीत पूर्णिमा के सत्र में सेक्सोफोन पर गूंजे शास्त्रीय राग इसी क्रम में संगीत पूर्णिमा (पौष पूर्णिमा) के अवसर पर प्रदर्शनी परिसर में संगीत का विशेष सत्र हुआ। इस सत्र में दो मॉडल के सेक्सोफोन पर शास्त्रीय रागों का सौदर्य निखरा। प्रयागराज के कलाकार प्रियंक कृष्ण ने ऑल्टो सेक्सोफोन और अमेरिका के फिल स्कार्फ ने सोप्रानो सेक्सोफोन की सरस जुगलबंदी की। राग झिंझोटी का साथ इस सत्र में बरकरार रहा। पूर्णिमा को लक्ष्य करके अमेरिकी कलाकार ने राग चंद्रप्रभा से वादन शुरू किया। इसके बाद राग बागेश्वरी के दरवाजे से गुजरते हुए झिंझोटी के पड़ाव पर विश्राम लिया। तबला पर प्रयागराज के पं. अनूप बनर्जी ने प्रभावपूर्ण संगत की। इस सत्र का संचालन आदित्यदीप ने किया। इनकी रही उपस्थिति इस अवसर पर हिंदी के वरिष्ठ कवि प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल, चित्रकार प्रो. संतोष सिंह, धर्मेंद्र सिंह, राजश्री गुप्ता, डॉ. विंध्याचल यादव, संजय गुप्ता, पंकज यादव, शिवम यादव, अमित यादव, अमित कुमार आदि कला प्रेमी उपस्थित रहे।

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