नीट में चीट: वाराणसी में पकड़ाया था बड़ा नेटवर्क, चार साल से ठंडे बस्ते में पूरा मामला
नीट-2026 के रद्द होने के बाद वाराणसी में 2021 में पकड़े गए बड़े सॉल्वर गैंग का मामला फिर चर्चा में है। 4 साल पहले क्राइम ब्रांच ने सरगना नीलेश सिंह उर्फ पीके समेत 42 लोगों को गिरफ्तार कर देशव्यापी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था। हालांकि, 2022 के बाद से यह केस ठंडे बस्ते में है।

पेपर लीक होने के बाद नीट-2026 रद हो गया है। अभ्यर्थियों को अगली तारीख का इंतजार है। ऐसा नहीं कि प्रतियोगी परीक्षा में पहली बार सेंधमारी की गई। इससे पहले भी कई बार ‘धंधेबाज’ इसकी पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा चुके हैं। सितंबर, 2021 में वाराणसी में नीट-यूजी के केंद्र पर साल्वर की गिरफ्तारी के बाद बड़े देशस्तर पर बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ था। प्रकरण में 42 गिरफ्तारियां हुईं लेकिन वर्ष 2022 के बाद से पूरा मामला ठंडे बस्ते में है। अफसरों की मॉनीटरिंग न के बराबर है। नतीजा, सरगना समेत सारे आरोपी जमानत पर जेल के बाहर हैं। अंदेशा है कि वे फिर से ‘धंधे’ से जुड़ गए हैं।
सारनाथ में 12 सितंबर, 2021 को सरायमोहाना स्थित स्कूल नीट-यूजी का केंद्र था। परीक्षा के दौरान क्राइम ब्रांच और सारनाथ पुलिस ने त्रिपुरा की हिना विश्वास की जगह परीक्षा दे रही पटना की जूली कुमारी को गिरफ्तार किया था। उस वक्त सॉल्वर गैंग की साजिश का भंडाफोड़ हुआ था। परीक्षा केंद्र से ही जूली की मां बबिता देवी भी पकड़ी गई थी। तत्कालीन पुलिस आयुक्त ए. सतीश गणेश ने नीट के सिंडीकेट पर बड़ी कार्रवाई की।
मामले में नवंबर, 2021 में एक लाख के इनामी सरगना नीलेश सिंह उर्फ पीके को गिरफ्तार किया गया। वह मूलत: छपरा का रहने वाला था। पटना की पाटलिपुत्र कॉलोनी में आलीशान आवास में रहता था। कई लग्जरी वाहनों का मालिक था। वह खुद को डॉक्टर बताता था। उसका नेटवर्क यूपी, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में फैला था।
सन् 2021 में गिरफ्तार 42 आरोपी बेल पर बाहर
वाराणसी में पांच साल पहले ‘नीट में चीट’ का खुलासा होने के बाद ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां हुई थीं। मामले में 42 लोग हत्थे चढ़े थे। उनमें सरगना ओसामा शाहिद, कन्हैया लाल सिंह, क्रांति कौशल, ओमप्रकाश सिंह, राजू कुमार, डॉ. अफरोज, मुंतजिर, डॉ. प्रिया, डॉ. गणेश, मृत्युंजय देवनाथ, दिव्यज्योति नाग उर्फ देबू, आशुतोष राज, मुंतजिर, प्रवीण, प्रमोद, हामिद रजा, पीयूष, चंदन, संजीव और प्रदीप्त भट्टाचार्य प्रमुख थे। आरोपियों पर गैंगस्टर ऐक्ट भी लगाया था। आज की तारीख में सरगना समेत सारे आरोपी जमानत पर जेल से बाहर हैं। इस दौरान 13 आरोपियों के खिलाफ वारंट भी जारी हुआ लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।
केस चौबेपुर गया, फिर क्राइम ब्रांच ट्रांसफर
गिरफ्तारी के समय यह मुकदमा सारनाथ थाने में दर्ज हुआ था। साल 2022 के बाद केस ठंडे बस्ते में चला गया। केस चौबेपुर थाने ट्रांसफर हुआ। इसके बाद क्राइम ब्रांच की विवेचना सेल को ट्रांसफर हुआ। यहां विवेचक के रिटायर होने के बाद से केस की प्रगति लगभग शून्य है।
टीम को मिला था गृहमंत्री का पुरस्कार
नीट में सेंधमारी करने वाले देशव्यापी गिरोह का खुलासा करने वाली टीम का भंडाफोड़ करने वाली टीम को 2022 में स्वतंत्रता दिवस पर केंद्रीय गृह मंत्री का एक्सीलेंस अवार्ड मिला था। विवेचक उप निरीक्षक सूरज कुमार तिवारी थे। इसमें सर्विलांस सेल प्रभारी रहे निरीक्षक अंजनी कुमार पांडेय की अहम भूमिका थी।
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लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।
पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।


