काशी में शिव बारात की धूम; पार्वती संग गृहस्थ तो कहीं अघोरी रूप में महादेव
महाशिवरात्रि पर वाराणसी में शिव बारातों की धूम रही। तिलभांडेश्वर, त्रिलोचन महादेव, महामृत्युंजय समेत कई स्थानों से भव्य बारातें निकाली गईं। ढोल-नगाड़ों, झांकियों और अघोरी स्वरूपों ने आकर्षण बढ़ाया। श्रद्धालु बाराती बन शामिल हुए और हर-हर महादेव के जयघोष से काशी गूंज उठी।

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर धर्मनगरी वाराणसी पूरी तरह शिवमय नजर आई। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा, जहां रविवार की भोर से ही बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। मंदिर कॉरिडोर, आसपास की गलियों, घाटों और प्रमुख सड़कों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती रही। हर-हर महादेव के जयघोष से पूरी काशी नगरी गूंज उठी और वातावरण भक्तिमय बना रहा।
काशी नगरी में शिव बारात की धूम
वहीं दूसरी ओर भगवान शिव की पारंपरिक बारातों ने शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। तिलभांडेश्वर मंदिर से भगवान शिव की पारंपरिक बारात धूमधाम और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ निकाली गई। बारात के दौरान भगवान शिव का विधिवत परिछावन किया गया और दूल्हे के रूप में सजे महादेव को माता पार्वती से विवाह के लिए प्रतीकात्मक रूप से विदा किया गया। देश-विदेश से आए श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन के साक्षी बने और स्वयं को बाराती के रूप में शामिल करते नजर आए।
कहीं अघोरी, कहीं गृहस्थ रूप में दिखे महादेव
काशी में दिनभर अलग-अलग स्थानों से शिव बारातें निकलती रहीं। तिलभांडेश्वर महादेव, लालकुटी व्यायामशाला नईबस्ती लक्सा, रोहनिया के भास्करा तालाब, चांदपुर इंडस्ट्रियल एस्टेट, त्रिलोचन महादेव, गायघाट और तिलमापुर सहित कई स्थानों से शिव बारातों का आयोजन किया गया। इन बारातों में कहीं भगवान शिव माता पार्वती के साथ गृहस्थ रूप में दिखाई दिए तो कहीं उनका अघोरी स्वरूप भक्तों को आकर्षित करता नजर आया।
शिवम् पूजा समिति की ओर से तिलमापुर स्थित रंगीलदास पोखरा से भी बारात निकाली गई। श्रीमृत्युंजय महादेव मंदिर से निकली बारात में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। वहीं पक्की बाजार स्थित प्राचीन शिव-पार्वती मंदिर से शाम को शिव बारात निकाले जाने की तैयारी रही। लक्सा के नईबस्ती स्थित लाल कुटी व्यायामशाला से महाशिवरात्रि शिवबारात समिति की ओर से 35वीं शिव बारात निकाली गई, जिसमें भगवान शिव की विशाल मूर्ति और गुफा में तपस्या करती मां पार्वती की झांकी आकर्षण का केंद्र रही।
शिव बारात में भूत-प्रेत, सपेरे-मदारी सब शामिल!
दारानगर स्थित महामृत्युंजय महादेव मंदिर में पूजन के बाद मैदागिन से मुख्य शिव बारात निकाली गई। इस बारात में ढोल-नगाड़ों की गूंज, भूत-प्रेत की झांकियां, सपेरे, मदारी, बंदर और लाग-विमान जैसी पारंपरिक प्रस्तुतियों ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया। सड़कों पर उमड़ी भीड़, रंग-बिरंगी झांकियां और भक्तों का उत्साह शहर को एक अलग ही आध्यात्मिक स्वरूप देता नजर आया।
प्रशासन की ओर से भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहा और श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराने के लिए विशेष व्यवस्था की गई। महाशिवरात्रि पर काशी में उमड़ी आस्था और श्रद्धा की यह झलक न सिर्फ धार्मिक परंपराओं को मजबूत करती है, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान को भी नई ऊर्जा प्रदान करती है।



