
यूरिया की बोरी का वजन एक बार फिर हुआ कम, किसानों को राहत या आफत?
यूरिया के पैकेट का वजन एक बार फिर से कम कर दिया गया है। किसानों को अब 45 किलो की जगह 40 किलो की यूरिया का कट्टा (बैग) मिलेगा। अपने इस कदम को सरकार भले किसानों और खेती को राहत की बात कह रही है लेकिन इसे आफत माना जा रहा है। यूरिया को लेकर अक्सर मारामारी की खबर आती रहती है।
यूरिया के पैकेट का वजन एक बार फिर से कम कर दिया गया है। किसानों को अब 45 किलो की जगह 40 किलो की यूरिया का कट्टा (बैग) मिलेगा। खेतों में यूरिया के अनियंत्रित प्रयोग पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने यह कदम उठाया है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने इसको लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। अपने इस कदम को सरकार भले किसानों और खेती को राहत की बात कह रही है लेकिन इसे आफत माना जा रहा है। यूरिया को लेकर अक्सर मारामारी की खबर आती रहती है।
अधिसूचना (गजट नोटिफिकेशन) के अनुसार 40 किलो के नए यूरिया के पैकेट में 37% नाइट्रोजन एवं 17 फ़ीसदी सल्फर मिश्रित होगा जो फसलों को कहीं अधिक लाभ पहुंचाएगा। 40 किलो के पैकेट का मूल्य 254 रुपये निर्धारित किया गया है जबकि 45 किलो के पैकेट का दाम पूर्ववत 266 रुपये 50 पैसे है। सफ्लर मिश्रित होने के कारण नया यूरिया पैकेट अधिक प्रभावशाली है।
वर्ष 2018 के मार्च तक यूरिया के एक पैकेट का वजन 50 किलोग्राम हुआ करता था। उस समय यूरिया के कट्टे का वजन 50 किलोग्राम से घटाकर 45 किलोग्राम कर दिया गया और अब इसके एक बैग का वजन 40 किलोग्राम कर दिया गया है। प्रदेश में इसकी खपत प्रतिवर्ष करीब 65 लाख मीट्रिक टन है लेकिन विशेषज्ञों की माने तो यह अधिकतम उपयोग की स्थिति है। इससे खेतों को नुकसान हो रहा है।
यूरिया का दुष्प्रयोग रोकने के लिए यह कदम
जानकारों की माने तो खेतों में अनियंत्रित रूप से हो रहे यूरिया के प्रयोग को नियंत्रित करने के साथ-साथ यूरिया के दुष्प्रयोगों को रोकने के उद्देश्य से भी यह कदम उठाया गया है। तमाम तरह के कदम उठाने व अभियान चलाने के बाद भी किसान अभी भी अपनी खेतों में जरूरत से कई गुना अधिक यूरिया का प्रयोग कर रहे हैं। इसके अलावा प्लाई इंडस्स्ट्रीज समेत छपाई उद्योग, नकली दूध व अन्य रसायन आदि से जुड़े उद्योग में भी यूरिया का प्रयोग हो रहा है जिसे रोकने के लिए सरकार ने पैकेट का वजन कम किया है तथा उसमें सल्फर मिलाया है।
सल्फर मिश्रित होने का भी मिलेगा लाभ
कुल 17 प्रतिशत सल्फर मिश्रित होने से खेतों को लाभ मिलेगा। मिट्टी से सल्फर की कमी दूर हो सकेगी। साथ ही फसलें भी हरी-भरी होने के साथ खूब लहलहाएंगी।
गड़बड़ी रोकने के लिए बेचा जा रहा है नीम कोटेड यूरिया
यूरिया के गलत प्रयोग को रोकने के लिए करीब एक दशक पूर्व इसे नीम कोटेड बना दिया गया ताकि यह खेतों में धीरे-धीरे घुले व भूजल प्रदूषित न हो। यूरिया वातावरण में भी घुलता है। ऐसे में नीम कोटेड बन जाने के बाद वायु प्रदूषण का असर घटा। इसके अलावा नीम कोटेड के इस्तेमाल से भूमि में मौजूद अन्य पोषक तत्वों की उपयोग क्षमता भी बढ़ने लगी। साथ ही करीब 10 से 15 प्रतिशत तक खपत भी कम हो गई। वहीं खेतों में रोग व कीड़ों का की रोकथाम भी हो सकी।

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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