शिक्षामित्रों-अनुदेशकों को योगी सरकार की बड़ी सौगात, क्या बोले शिक्षक संगठन
योगी सरकार ने विधानसभा में शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि की घोषणा की है। सीएम योगी की सौगात से 9 सालों का इंतजार खत्म हुआ है। शिक्षक संगठनों ने इसे आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवारों के लिए 'संजीवनी' बताया है।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के शिक्षा विभाग की रीढ़ माने जाने वाले लाखों शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि करने का बड़ा निर्णय लिया है। विधानसभा में मुख्यमंत्री द्वारा किए गए इस ऐलान का प्रदेश भर में चहुंओर स्वागत किया जा रहा है। शिक्षक संगठनों और शिक्षाविदों ने इसे न केवल आर्थिक सहायता, बल्कि शिक्षामित्रों के गिरते मनोबल के लिए 'संजीवनी' करार दिया है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को विधानसभा में ऐलान किया कि शिक्षा मित्रों का मानदेय 10 हजार रुपये से बढ़ा कर 18 हजार रुपये और अनुदेशकों का मानदेय 9 हजार से बढ़ाकर 17 हजार रुपये होगा। शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों को यह बढ़ा हुआ मानदेय अप्रैल से दिया जाएगा। प्रदेश में करीब 1.43 लाख शिक्षा मित्र और 27 हजार अनुदेशक हैं।
नौ वर्षों का लंबा इंतजार हुआ खत्म
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के पदाधिकारियों ने इस फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री और पूरी सरकार का धन्यवाद किया है। संघ के अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला और महामंत्री सुशील कुमार यादव ने कहा कि पिछले नौ वर्षों से शिक्षामित्र मानदेय बढ़ने की बाट जोह रहे थे। लंबे समय से अल्प मानदेय के कारण शिक्षामित्र आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे, जिससे उनके बच्चों की शिक्षा और माता-पिता के इलाज जैसी बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही थीं। संगठन मंत्री कौशल कुमार सिंह ने बताया कि कई साथी इस आर्थिक दबाव के चलते अवसाद में थे, ऐसे में सरकार का यह कदम उनके जीवन को नई दिशा देगा।
शिक्षक संगठनों ने बताया 'संजीवनी'
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे ने सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बढ़ती महंगाई के दौर में यह वृद्धि अत्यंत आवश्यक थी। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्र और अनुदेशक परिषदीय विद्यालयों में पूरी निष्ठा से अध्यापन कार्य कर रहे हैं। मानदेय बढ़ने से उनके जीवन स्तर में सुधार होगा। हालांकि, उन्होंने सरकार के समक्ष एक और सुझाव रखते हुए कहा कि शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को भी नियमित सरकारी कर्मचारियों की तरह हर छह महीने पर महंगाई भत्ता (DA) देने की व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए।
नियमितीकरण की उठी मांग
सौगात मिलने के साथ ही शिक्षक संगठनों ने एक और महत्वपूर्ण मुद्दा सरकार के सामने रखा है। संगठनों की मांग है कि जो शिक्षामित्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास कर चुके हैं, उनके नियमितीकरण और सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन की प्रक्रिया पर भी गंभीरता से विचार किया जाए। उनका तर्क है कि योग्यता और अनुभव के आधार पर यदि इन्हें स्थायी किया जाता है, तो यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के लिए और भी बेहतर होगा।
योगी सरकार का यह फैसला मिशन 2027 की तैयारियों और जमीनी स्तर पर शिक्षा कर्मियों के संतोष को साधने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सदन में हुई इस घोषणा से न केवल शिक्षामित्रों के घरों में खुशियां आई हैं, बल्कि सरकारी स्कूलों की कार्यसंस्कृति में भी सकारात्मक ऊर्जा देखने को मिलेगी।
लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।
पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।


