इस बार सुपर अल-नीनो? मौसम में 149 साल पहले हुए परिवर्तन से तुलना, यूपी में मानसून पर क्या असर

लखनऊ ज्ञान प्रकाश
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इस बार सुपर अल-नीनो की आशंका है। पिछला अल-नीनो 2024 में आया और भीषण गर्मी पड़ी थी। मई माह में 2024 में 2016 के बाद सबसे अधिक दिन का तापमान दर्ज किया गया था। वर्ष 2015 के बाद से अब तक 2024 में मई का तापमान सर्वाधिक है।

इस बार सुपर अल-नीनो? मौसम में 149 साल पहले हुए परिवर्तन से तुलना, यूपी में मानसून पर क्या असर

प्रशांत महासागर में पनप रहे ‘सुपर अल-नीनो’ ने मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। यू ट्यूब पर कई विशेषज्ञ इसे सबसे भीषण अल नीनो बताते हुए 149 साल पहले यानी वर्ष 1877 की तुलना कर रहे हैं। दूसरी और मौसम विभाग के अनुसार अल-नीनो सामान्य या मजबूत ही होता है। सुपर अल-नीनो जैसा कुछ नहीं लेकिन मौसमी परिस्थितियों पर नजर रखी जा रही है। सकारात्मक संकेत यह हैं कि हिन्द महासागर की परिस्थतियां अनुकूल हो सकती हैं। हमारे देश में मानसून की गतिविधियों पर हिन्द महासागर का प्रभाव ज्यादा रहता है।

मौसम विभाग माह के अंत में इस बारे में स्पष्ट दीर्घ पूर्वानुमान जारी करने वाला है। फिलहाल तो आईएमडी का पूर्वानुमान है कि दक्षिण भारत के केरल तट पर मानसून सामान्य से करीब एक सप्ताह पहले यानी 26 मई तक दस्तक दे सकता है, वहीं उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में इसके 27 जून के आसपास (अपने सामान्य समय पर) ही पहुंचने की उम्मीद है। फिलहाल समूचा उत्तर प्रदेश सूरज की भीषण तपिश से सुलग रहा है। बुंदेलखंड का बांदा जिला 48 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ देश का सबसे गर्म इलाका दर्ज किया गया है।

क्या है अल-नीनो

प्रशांत महासागर में उत्पन्न होने वाली एक मौसमी घटना है। इसमें दक्षिण अमेरिकी तट के पास पेरू के समीप समुद्र का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसके प्रभाव से समुद्री हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं।परिणामस्वरूप, भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे एशियाई देशों में सामान्य से कम बारिश (सूखा) होती है जबकि अमेरिका के पश्चिमी तटों पर भारी बाढ़ और तूफान आते हैं। यह वैश्विक तापमान में वृद्धि का मुख्य कारण है।

अल-नीनो का असर रहा तो और सताएगी तपिश-उमस

आईएमडी की लॉन्ग रेंज वेदर रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) पर प्रशांत महासागर में तेजी से मजबूत हो रहे अल-नीनो का साया है। वहीं, मौसम पर नजर रखने वालों के अनुसार यह 1997 और 2015 जैसा ही एक शक्तिशाली अल-नीनो हो सकता है, जो मानसूनी हवाओं को कमजोर करता है। यदि इसका असर रहा तो कुल मानसूनी बारिश दीर्घावधि औसत 92 प्रतिशत रहने की आशंका जताई गई है, यानी सामान्य से कम। खासकर अगस्त और सितंबर के महीनों में उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश के मुख्य मानसूनी बेल्ट में सूखे जैसे हालात या बेहद कम बारिश होने की आशंका है।

हिंद महासागर में तैयार हो रहा ‘सुरक्षा कवच’

आईएमडी लखनऊ वैज्ञानिकों के अनुसार, जून के बाद हिंद महासागर में सकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुव सक्रिय होने की प्रबल संभावना है। जब यह स्थिति बनती है तो अरब सागर और पश्चिमी हिंद महासागर का पानी तेजी से गर्म होता है। यह तपन समुद्र से भारी मात्रा में नमी खींचकर मानसूनी हवाओं को नई ताकत देती है। यह सकारात्मक आईओडी प्रशांत महासागर के अल-नीनो के प्रभाव को काफी हद तक दबा देगा। इसके कारण भले ही मानसून के उत्तरार्ध में कुल बारिश कम हो, लेकिन जून और जुलाई के शुरुआती महीनों में देश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी और संतुलित बरसात देखने को मिल सकती है।

1997 में भी ताकतवर अल-नीनो लेकिन भारत में नहीं था असर

आईएमडी लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार 1997 में भी ताकतवर अल-नीनो परिस्थितियां थीं। बावजूद इसके हिन्द महासागर की सकरात्मक परिस्थितियों की वजह से अल-नीनो का असर हमारे देश के मानसून पर कतई नहीं पड़ा था।

मई माह के दौरान अधिकतम तापमान (डिग्री सेल्सियस में)

वाराणसी 47.8

लखनऊ 45.8

प्रयागराज 48.8

गोरखपुर 44.0

बहराइच 45.4

मेरठ 44.6

Yogesh Yadav

लेखक के बारे में

Yogesh Yadav

योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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