अध्य एआई समिट में चर्चा, एआई युग में मौलिकता के लिए भी ‘जिम’ जरूरी

Apr 09, 2026 01:14 pm ISTSrishti Kunj वरिष्ठ संवाददाता, वाराणसी
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आईआईटी बीएचयू में बुधवार को ‘अध्य एआई समिट’ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उभरते आयामों और युवाओं को राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका के प्रति जागरूक करने पर चर्चा हुई।

अध्य एआई समिट में चर्चा, एआई युग में मौलिकता के लिए भी ‘जिम’ जरूरी

आईआईटी बीएचयू में बुधवार को ‘अध्य एआई समिट’ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उभरते आयामों और युवाओं को राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका के प्रति जागरूक करने पर चर्चा हुई। थिंक इंडिया, मेटा और आईआईटी बीएचयू के सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग की तरफ से इस आयोजन में देशभर के प्रतिष्ठित संस्थानों से 350 से ज्यादा विशेषज्ञ और युवा शामिल हुए।

उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि आईआईटी कानपुर के निदेशक पद्मश्री प्रो. मनींद्र अग्रवाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विकास क्रमिक रहा है। आज भारत में बन रहे ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ इस तकनीक को नई दिशा दे रहे हैं। जैसे शारीरिक फिटनेस के लिए जिम की आवश्यकता होती है, वैसे ही एआई के युग में अपनी मानसिक क्षमता और सोचने की शक्ति को बचाए रखने के लिए हमें ‘कॉग्निटिव जिम’ की आवश्यकता होगी।

आभासी माध्यम से जुड़े विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि आज भारत तकनीक के क्षेत्र में एक वैश्विक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग लगातार ऐसे स्टार्टअप्स और शोध कार्यों को प्रोत्साहित कर रहा है जो ग्रामीण भारत की समस्याओं का समाधान एआई के माध्यम से निकाल सकें। विद्यार्थियों को इस तकनीक का उपयोग ‘डिजिटल डिवाइड’ को कम करने और एक समावेशी विकसित भारत बनाने के लिए करना चाहिए।

बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने विद्यार्थियों को सचेत करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति और विशेषकर विद्यार्थियों को पहले यह विश्लेषण करना चाहिए कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग हमारे समाज पर क्या दीर्घकालिक प्रभाव डालने वाला है? क्या यह हमारे लिए सकारात्मक रहेगा या नकारात्मक? आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि हमें एआई को केवल एक टूल के रूप में नहीं, बल्कि एक विजन के रूप में अपनाते हुए विकसित भारत की ओर अग्रसर होना चाहिए।

आईआईटी बीएचयू के इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के अध्यक्ष प्रो. आरके सिंह और थिंक इंडिया के अखिल भारतीय प्रमुख सुमित पाण्डेय ने भी अपने विचार साझा किए। तकनीकी सत्रों में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया के पूर्व डायरेक्टर जनरल ओमकार राय, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतीहारी के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव, काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. एके त्यागी ने विचार रखे।

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सृष्टि कुंज एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में एक दशक से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। उन्होंने पंजाब केसरी ग्रुप के नवोदय टाइम्स और इंडिया न्यूज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ काम किया है, जहां उन्होंने नेशनल और दिल्ली डेस्क के लिए कंटेंट क्रिएशन और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग में अपनी स्किल्स को निखारा है। सृष्टि कुंज लाइव हिन्दुस्तान में लगभग 6 वर्षों से यूपी की टीम संग काम कर रही हैं। 2020 से वह हिन्दुस्तान डिजिटल के लिए उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बीटों से जुड़ीं खबरें लिखती हैं। सृष्टि ने अपनी स्कूलिंग के बाद एनिमेशन की पढ़ाई की और फिर बतौर एनिमेटर एक विदेशी गेम के लिए कैरेक्टर डिजाइनिंग की। इसके बाद सृष्टि ने मॉस कम्यूनिकेशन और जर्नलिजम में स्नातक की डिग्री हासिल की। एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय सृष्टि ने जर्नलिज्म एंड मास कॉम में डिग्री लेकर पंजाब केसरी ग्रुप के दिल्ली संस्करण नवोदय टाइम्स की डिजिटल टीम के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। 3 साल नवोदय टाइम्स से जुड़े रहने के बाद सृष्टि ने इंडिया न्यूज की डिजिटल टीम (इनखबर) की नेशनल डेस्क के साथ भी काम किया। 2020 से सृष्टि लाइव हिन्दुस्तान की डिजिटल टीम के साथ अब ट्रेंड्स के अनुसार पाठकों तक यूपी की हर खबर को पहुंचा रही हैं।

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