Hindi NewsUP NewsUP SIR nearly half the names were removed from the voter list at this booth. CEO Navdeep Rinwa reached ground zero
यूपी SIR में इस बूथ पर कट गए करीब आधे नाम, CEO नवदीप रिणवा खुद ग्राउंड जीरो पहुंचे

यूपी SIR में इस बूथ पर कट गए करीब आधे नाम, CEO नवदीप रिणवा खुद ग्राउंड जीरो पहुंचे

संक्षेप:

बड़ी संख्या में नामों के विलोपन (Deletion) की जानकारी मिलते ही सीईओ नवदीप रिणवा जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने न केवल बूथ रजिस्टर की जांच की, बल्कि राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) और निर्वाचन आयोग के बीएलओ (BLO) से भी बातचीत की।

Jan 01, 2026 12:53 pm ISTYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा और आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने के लिए चलाए जा रहे 'विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान' (SIR) के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। राजधानी लखनऊ के फैजुल्लागंज इलाके में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे जाने की खबर ने निर्वाचन आयोग को भी चौकन्ना कर दिया है। यहां एक ही बूथ पर करीब आधे मतदाताओं के नाम कम हो गए हैं। इसकी समीक्षा करने खुद यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा मौके पर पहुंचे।

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एसआईआर में यूपी में सबसे ज्यादा नाम राजधानी लखनऊ में ही कटे हैं। इसे लेकर अधिकारी पहले से चिंतित हैं। इस बीच लखनऊ के फैजुल्लागंज क्षेत्र के भाग संख्या 308 में मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सामाजिक कार्यकर्ता ममता त्रिपाठी के अनुसार, इस बूथ पर पहले लगभग 1500 पंजीकृत मतदाता थे, लेकिन पुनरीक्षण अभियान के बाद अब इनकी संख्या घटकर मात्र 800 के करीब रह गई है। इतनी बड़ी संख्या में नामों के विलोपन (Deletion) की जानकारी मिलते ही सीईओ नवदीप रिणवा जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने न केवल बूथ रजिस्टर की जांच की, बल्कि राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) और निर्वाचन आयोग के बीएलओ (BLO) से भी बातचीत की।

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नाम कटने के पीछे का मुख्य कारण

जांच और बीएलओ से बातचीत के दौरान एक दिलचस्प लेकिन तकनीकी पहलू सामने आया है। अधिकारियों और एजेंटों ने संयुक्त रूप से बताया कि मतदाता सूची से नाम कटने के पीछे कोई प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि मतदाताओं के दोहरे नाम और पते का बदलाव प्रमुख कारण है।

दोहरे पते की समस्या

फैजुल्लागंज में बड़ी संख्या में ऐसे लोग रहते हैं जो मूल रूप से दूसरे जिलों के निवासी हैं। जब बीएलओ ने उनसे गणना प्रपत्र (Form) भरवाया तो कई लोगों ने डर के मारे उसे वापस नहीं किया। उन्हें डर था कि यदि उन्होंने लखनऊ में नाम पक्का करवाया,तो उनके पैतृक गांव या जिले की वोटर लिस्ट से उनका नाम कट जाएगा। सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में वोटर अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिले। इसके चलते नियमों के तहत उनके नाम सूची से हटा दिए गए।

लखनऊ बना प्रदेश का 'हॉटस्पॉट'

आंकड़ों पर गौर करें तो उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में लखनऊ मतदाता सूची के शुद्धिकरण के मामले में शीर्ष पर बना हुआ है। पूरे प्रदेश में लखनऊ वह जिला है जहां सबसे अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। हालांकि, प्रशासन इसे 'क्लीन रोल' (Clean Roll) की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मान रहा है, ताकि चुनावों में फर्जी वोटिंग की गुंजाइश खत्म हो सके।

सीईओ नवदीप रिणवा ने निर्देश दिए हैं कि भले ही नाम काटे गए हों, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी पात्र और वास्तविक मतदाता का नाम गलती से न छूटे। उन्होंने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से भी अपील की है कि वे मतदाताओं को जागरूक करें ताकि वे समय रहते अपना पंजीकरण और सत्यापन पूर्ण करा सकें।