बकरीद से पहले यूपी के इस शहर में 55 हजार तक बिक रहे बकरे, खरीदारों की भीड़
यूपी में सिद्धार्थनगर शहर के गोबरहवा व डुमरियागंज के हल्लौर में मंगलवार को लगी मंडी में हजारों की संख्या में बकरे बिकने के लिए आए। सबसे महंगा 55 हजार रुपये में बिका।

त्याग व बलिदान का त्योहार बकरीद 28 मई को मनाया जाएगा। तीन दिनों तक चलने वाले त्योहार में अल्लाह की राह में जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। जानवरों की कुर्बानी देने के लिए लोग बकरों की खरीदारी करनी शुरू कर दिए है। यूपी में सिद्धार्थनगर शहर के गोबरहवा व डुमरियागंज के हल्लौर में मंगलवार को लगी मंडी में हजारों की संख्या में बकरे बिकने के लिए आए। सबसे महंगा 55 हजार रुपये में बिका।
शहर के गोबरवहा में सुबह सूरज की पौ फटने से पहले ही बकरा मंडी लग गई थी। शाम तक खरीदारों की भीड़ लगी रही। हर कोई अपनी हैसियत के अनुसार बकरों की खरीद कर रहा था। नौ हजार से 50 हजार तक बकरों की बिक्री हुई। किसी ने एक तो किसी ने आधा दर्जन से अधिक बकरों की खरीद की। डुमरियागंज क्षेत्र के हल्लौर कस्बा स्थित कुला बाग में मंगलवार को बकरीद त्योहार को लेकर बकरे की खरीदारी के लिए बाजार गुलजार हो गया है।
बाराबंकी, गोण्डा, उतरौला, तुलसीपुर, बस्ती सहित आसपास के बकरा बेचने वाले व्यापारी व स्थानीय लोग अपने बकरे को लेकर पहुंचे थे। सुबह से लगी बाजार में आठ से 55 हजार रुपये तक के बकरे बिके। बाराबंकी से आए बकरा व्यवसायी मेराज अहमद, हकीकुल्लाह, शब्बीर अहमद, शबरेज व स्थानीय गुलजार अहमद, मोहम्मद रईश, सिराज, रेहान, शफीक आदि का कहना है कि पिछले सालों की तुलना में इस बार बकरे की बाजार ठीक प्रकार से गुलजार की है। बाजार में सुबह से खरीदार भारी संख्या में पहुंच रहे हैं। इस साल व्यापार बेहतर रहने की उम्मीद की जा रही है।
चांद दिखने के 10वें दिन मनाई जाती है बकरा ईद
डुमरियागंज कस्बा स्थित ग़रीब नवाज़ दारुल उलूम के मौलाना मकसूद अकरम व हल्लौर स्थित शिया जामा मस्जिद के मौलाना शाहकार हुसैन जैदी ने बताया कि ईद उल अजहा माह का चांद दिखने के बाद 10वें दिन मनाया जाता है। इस बार 28 मई को मनाया जाएगा। त्योहार में बकरा, भेड़ की कुर्बानी दी जाती है। ईद उल अजहा का त्योहार हजरत इब्राहिम अस. की कुर्बानी की याद के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अल्लाह के प्रति अपनी वफादारी दिखाने के लिए अपने बेटा हजरत इस्माइल को कुर्बानी करने पर राजी हुए थे। कुर्बानी के समय ( दुमबा) जानवर के आ जाने से छुरी उसकी गर्दन पर चल गई थी। तभी से जानवरों की कुर्बानी की जाती है।
ईद की तरह होती है विशेष नमाज
ईद-उल-अजहा के दिन भी ईद उल फितर की तरह विशेष नमाज सुबह में ईदगाहों व मस्जिदों में अदा की जाती है। नमाज के बाद कुर्बानी का सिलसिला शुरू होता है जो शाम तक जारी रहता है। दूसरे व तीसरे दिन विशेष नमाज तो नहीं होती है लेकिन जानवरों की कुर्बानी सुबह से शाम तक दी जाती है।
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Srishti Kunjसृष्टि कुंज एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में एक दशक से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। उन्होंने पंजाब केसरी ग्रुप के नवोदय टाइम्स और इंडिया न्यूज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ काम किया है, जहां उन्होंने नेशनल और दिल्ली डेस्क के लिए कंटेंट क्रिएशन और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग में अपनी स्किल्स को निखारा है। सृष्टि कुंज लाइव हिन्दुस्तान में लगभग 6 वर्षों से यूपी की टीम संग काम कर रही हैं। 2020 से वह हिन्दुस्तान डिजिटल के लिए उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बीटों से जुड़ीं खबरें लिखती हैं। सृष्टि ने अपनी स्कूलिंग के बाद एनिमेशन की पढ़ाई की और फिर बतौर एनिमेटर एक विदेशी गेम के लिए कैरेक्टर डिजाइनिंग की। इसके बाद सृष्टि ने मॉस कम्यूनिकेशन और जर्नलिजम में स्नातक की डिग्री हासिल की। एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय सृष्टि ने जर्नलिज्म एंड मास कॉम में डिग्री लेकर पंजाब केसरी ग्रुप के दिल्ली संस्करण नवोदय टाइम्स की डिजिटल टीम के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। 3 साल नवोदय टाइम्स से जुड़े रहने के बाद सृष्टि ने इंडिया न्यूज की डिजिटल टीम (इनखबर) की नेशनल डेस्क के साथ भी काम किया। 2020 से सृष्टि लाइव हिन्दुस्तान की डिजिटल टीम के साथ अब ट्रेंड्स के अनुसार पाठकों तक यूपी की हर खबर को पहुंचा रही हैं।
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