UP Rain, 8 September: पूर्वी यूपी में झमाझम बारिश का यलो अलर्ट, मौसम का आया नया अपडेट
पश्चिमी यूपी में रविवार-सोमवार को बर्स्ट रेन का खतरनाक नजारा देखने को मिला। 8 सितंबर को भी पूर्वी यूपी में बारिश होगी। पश्चिमी यूपी में आसार कम हैं। मानसून की ट्रफ लाइन कानपुर से होकर गुजर रही है। इसके बाद भी इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ रहा है। फिलहाल मौसम फसलों के अनुकूल बना हुआ है।

UP Rain Alert: पूर्वी उत्तर प्रदेश में मंगलवार को भी बारिश होगी। यहां बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है लेकिन पश्चिमी यूपी में आसार कम हैं। इसके बाद पूरे प्रदेश में ब्रेक लग सकता है। मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार के बाद आने वाले सात दिनों में यूपी समेत देश के ज्यादातर राज्यों से मानसूनी बादल नदारद रहेंगे। सोमवार को धूप खिली लेकिन शाम को हल्की बारिश और तेज हवा ने फिर मौसम सुहाना कर दिया। उत्तर प्रदेश में बारिश का मिजाज पल-पल बदल रहा है। कानपुर और आसपास के जिलों में स्थानीय स्तर पर कम दबाव का क्षेत्र बन गया है। मानसून की ट्रफ लाइन कानपुर से होकर गुजर रही है। इसके बाद भी इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ रहा है। सोमवार को बादलों ने घेरा और शाम के समय कहीं धीमी बारिश हुई तो कहीं सिर्फ बौछारें पड़ीं। प्रदेश के पश्चिमी और उत्तरी में बारिश हुई।
वेस्ट यूपी में दिखा बर्स्ट रेन का नजारा
बर्स्ट रेन का खतरनाक नजारा पश्चिमी यूपी में रविवार-सोमवार को देखने को मिला। यहां बरेली में 381 मिमी (38.1 सेमी) और शाहजहांपुर में 227 मिमी (22.7 सेमी) बारिश हुई। प्रदेश के अन्य जिलों में मामूली बारिश हुई। कानपुर में मात्र एक मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम विशेषज्ञ इसे बर्स्ट रेन मान रहे हैं। किसी एक स्थान पर अधिक वर्षा को बर्स्ट रेन माना जाता है। शहर में बदली और बारिश के चलते अधिकतम तापमान नरम रहा। दिन का पारा 31.4 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। न्यूनतम पारा भी 24.7 डिग्री सेल्सियस रहा। तेज धूप ने नमी का प्रतिशत गिराया। अधिकतम नमी 87 और न्यूनतम 74 फीसदी रही। दक्षिण पश्चिमी तेज हवाएं ही बादलों के बनने में बाधा बनीं। भारतीय मौसम विभाग ने मंगलवार के बाद एक सप्ताह तक बारिश के ब्रेक की संभावना जताई है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (सीएसए) के मौसम कृषि तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा का कहना है कि फिलहाल छिटपुट बारिश बनी रहेगी। दिन में उमस भी बढ़ेगी।
मौसम फिलहाल फसलों के अनुकूल मौसम
जानकारों के अनुसार फिलहाल मौसम फसलों के अनुकूल बना हुआ है। गंगा कटरी के इलाकों और बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों को छोड़ दिया जाए तो इस वर्ष बड़े नुकसान की संभावना कम है। विशेषकर कानपुर और आसपास स्थितियां अनुकूल हैं। धान के लिए बारिश अमृत बनी है तो मक्का के लिए अधिक नमी ने दूध से दानों को भर दिया है। प्रमुख रूप से खरीफ में होने वाले धान की फसल तो खेतों में खूब लहरा रही है। जिन किसानों ने खेतों में वर्षा के दौरान प्रबंधन ठीक रखा है, उन्हें बेहतर फसल मिलने की संभावना है। धान को शुरुआती झटका तो लगा था लेकिन बाद में स्थितियां उसके अनुकूल हो गईं। बारिश से सिंचाई का खर्च बचा और पौधों में कल्ले बहुत अच्छे आए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार जहां सामान्य या अधिक बारिश हुई है वहां होने वाली फसलें बेहतर स्थिति में हैं। कानपुर नगर में बारिश 40 फीसदी अधिक लेकिन कानपुर देहात में 57 फीसदी कम हुई है। इसके बावजूद बेहतर प्रबंधन का लाभ किसानों को मिल रहा है। धान के बाद मक्का की फसल भी अच्छी रही है। खेतों में मक्का की फसल खूब लहरा रही है। इसके दानों के लिए दूध की प्रक्रिया नमी में अधिक होती है। नमी लगातार बने रहने से भुट्टों में दाने अधिक व दूध से भरे हुए हैं। मक्के की फसल के लिए अच्छी जल निकासी बहुत जरूरी होती है। कहीं-कहीं जहां जल प्रबंधन ठीक नहीं रहा वहां ''फॉल आर्मीवॉर्म'' कीट का प्रकोप बढ़ा है।
बारिश के कारण यदि थोड़ा नुकसान हुआ है तो वह दलहनी फसलों को। पर यह भी अधिक नहीं है। बारिश सभी जिलों में अधिक नहीं रही है। इन फसलों की जड़ों को हवा की आवश्यकता होती है और पानी जमा रहने से इनकी जड़ें सड़ने लगती हैं। ''कॉलर रॉट'' कीड़ा भी लग जाता है। गन्ने की फसल को भी इस झमाझम बारिश से काफी लाभ हुआ है। गन्ने की लंबाई और मोटाई बढ़ी है।
क्या बोले विशेषज्ञ
कृषि मौसम विशेषज्ञ डॉ.एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि बारिश से फसलें सामान्य हैं। रबी सीजन के लिए भी बारिश फायदेमंद रही है। मिट्टी में नमी से गेहूं, सरसों, चना और आलू जैसी रबी फसलों की बुवाई और उनके शुरुआती अंकुरण के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी। धान और मक्का की फसल काफी अच्छी है। दलहन को थोड़ा नुकसान संभव है। वहीं, कानपुर के सीएस कृषि विश्वविद्यालय के मौसम कृषि तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा ने बताया कि बरसात पर्याप्त कही जा सकती है। असामान्य वर्षा के कारण क्षेत्रवार फसलों पर असर पड़ता है। अभी तक तो धान और मक्का के साथ गन्ना ठीक स्थिति में है। कुछ क्षेत्रों में दलहनी फसलें भी ठीक हैं। दलहनी फसलों को अधिक बारिश की आवश्यकता नहीं होती है। कानपुर की स्थिति सामान्य है।


