बिजली स्मार्ट प्रीपेड मीटर का पैसा लेने में फंसा यूपी पॉवर कार्पोरेशन, उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल
यूपी पॉवर कार्पोरेशन बिजली स्मार्ट प्रीपेड मीटर का पैसा लेने में फंस गया है। उपभोक्ता परिषद ने किस्तों में दाम वसूली पर सवाल उठाए हैं। प्रीपेड मीटर के दाम उसने तय नहीं किए हैं, तो आखिर किस दाम पर किस्तों में उपभोक्ताओं से किस्तों में पैसे लिए जाएंगे?

यूपी पॉवर कॉरपारेशनबिजली स्मार्ट प्रीपेड मीटर का पैसा लेने में फंस गया। नियामक आयोग द्वारा नए कनेक्शन पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर के दाम वसूले जाने के मामले में यूपी पॉवर कॉरपारेशन को नोटिस दिए जाने के बाद अब उपभोक्ता परिषद ने किस्तों में दाम वसूली पर सवाल उठाए हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कहा है कि जब आयोग ने साफ कर दिया है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के दाम उसने तय नहीं किए हैं, तो आखिर किस दाम पर किस्तों में उपभोक्ताओं से किस्तों में पैसे लिए जाएंगे?
नियामक आयोग ने उपभोक्ता परिषद की अवमानना याचिका को स्वीकार करते हुए पावर कॉरपोरेशन को नोटिस जारी किया है। पावर कॉरपोरेशन ने नए कनेक्शन स्मार्ट प्रीपेड मीटर के साथ ही देने के आदेश दिए हैं। इन मीटरों के दामों की स्वीकृति नियामक आयोग ने नहीं की है। सिंगल फेज उपभोक्ताओं से मीटर के दामों के तौर पर 6016 रुपये लिए जा रहे हैं। इस मामले में उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य विद्युत सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग में याचिका दायर की थी।
उन्होंने सवाल उठाए कि विद्युत अधिनियम-2003 के विरुद्ध स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य कैसे किया जा सकता है? जब आयोग ने दाम तय नहीं किए, तो पावर कॉरपोरेशन यह दाम कैसे तय कर वसूल सकता है। नियामक आयोग के नोटिस के बावजूद पावर कॉरपोरेशन ने शनिवार को किस्तों में मीटर के दामों की वसूली संबंधी आदेश जारी किए। अब रविवार को उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि जब आयोग ने मीटर के दाम ही तय नहीं किए हैं, तो आखिर किस दाम पर किस्तें ली जाएंगी?
उन्होंने कहा है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर मामले में पावर कार्पोरेशन मनमानी कर रहा है। अधिनियम की व्यवस्था के विपरीत उसने सभी घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य कर दिया। बिजली और कनेक्शन दरें तय करना आयोग के अधिकार क्षेत्र है। आयोग ने वर्ष 2019 में कास्ट डेटा बुक में दरें स्वीकृत की थीं, तब गैर स्मार्ट प्रीपेड मीटर की व्यवस्था थी। वह आईएस -1884 था। अब जो मीटर लग रहे हैं वे आईएस - 16444 हैं। इनकी दरें तय नहीं हैं। अब जब कॉस्ट डेटा बुक में इन मीटरों के दाम तय होंगे तब ही कार्पोरेशन इसके दाम उपभोक्ताओं से ले सकता है। यही नहीं, बिना विद्युत अधिनियम में संशोधन के स्मार्ट प्रीपेड मीटर भी सबके लिए अनिवार्य नहीं किए जा सकते।

लेखक के बारे में
Deep Pandeyदीप नरायन पांडेय लाइव हिन्दुस्तान में पिछले आठ सालों से यूपी टीम में हैं। दीप का डिजिटल, टीवी और प्रिंट जर्नलिज्म में 15 साल से अधिक का अनुभव है। यूपी के लखनऊ और वाराणसी समेत कई जिलों में पत्रकारिता कर चुके हैं। यूपी की राजनीति के साथ क्राइम की खबरों पर अच्छी पकड़ है। सामाजिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और हेल्थ पर भी लिखने का शौक है। मास कम्युनिकेशन में बीए और एमए हैं। सरल भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाते हैं। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने-लिखने में भी रुचि रखते हैं।
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