कोर्ट के सवालों पर दरोगा की बंद हो गई बोलती बंद, पुलिस कमिश्नर को कार्रवाई का आदेश
यूपी की राजधानी लखनऊ में कोर्ट के सवालों पर दरोगा की बोलती बंद हो गई। आरोपी को पेश करने वाले दरोगा धर्मेंद्र यादव के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है।

Up News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गैंगस्टर के आरोपी को गिरफ्तारी का कारण बताए बगैर न्यायिक अभिरक्षा मांगने पहुंची निगोहां थाने की पुलिस खुद मुश्किल में फंस गई। विशेष उमांत जिंदल की अदालत ने दरोगा से इतने सवाल पूछे की बोलती बंद हो गई। कोर्ट ने पुलिस की न्यायिक रिमांड अर्जी खारिज कर दी और आरोपी को निजी मुचकले पर रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने इसे लापरवाही मानते हुऐ विवेचक ब्रजेश कुमार त्रिपाठी तथा आरोपी को पेश करने वाले दरोगा धर्मेंद्र यादव के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है।
न्यायिक रिमांड अर्जी के अनुसार विवेचक बृजेश कुमार त्रिपाठी ने गिरोह बंद अधिनियम (गैंगस्टर एक्ट) के तहत आरोपी सतीश कुमार सोनी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के लिए उपनिरीक्षक धर्मेंद्र यादव को संबंधित प्रपत्रों के साथ कोर्ट भेजा था। अदालत में जब धर्मेंद्र यादव से पूछा कि न्यायिक अभिक्षा में भेजे जाने का आधार क्या है तो उनकी बोलती बंद हो गई। अदालत ने कहा कि उपनिरीक्षक धर्मेंद्र यादव प्रश्न पूछने पर चुप रहे। इतना बताया कि राजकीय कार्यों में व्यस्त रहने के कारण विवेचक नहीं आ सके।
अदालत ने पुलिस की न्यायिक रिमांड अर्जी को खारिज करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने कई निर्णय व निर्देश हैं कि गिरफ्तारी के वक्त ही आरोपी को विस्तृत रूप से कारण बताया जाएगा। इस मामले के रिमांड प्रपत्रों को देखने से स्पष्ट है कि अभियुक्त को गिरफ्तारी का समुचित एवं लिखित कारण नहीं बताया गया है, जिसकी वजह से उसकी गिरफ्तारी अवैध है। अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी मेमो में कारण वाले कालम में कारण की जगह लिखा है कि आरोपी गैंगस्टर एक्ट में वांछित था, इसलिए गिरफ्तार किया जा रहा है।
अदालत ने पुलिस आयुक्त लखनऊ को निर्देश दिया है कि वह विवेचक बृजेश कुमार त्रिपाठी एवं उपनिरीक्षक धर्मेंद्र यादव के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 15 दिन के अंदर न्यायालय को सूचित करें। न्यायालय ने विवेचक बृजेश कुमार त्रिपाठी को निर्देश दिया है कि वह अपना स्पष्टीकरण 5 दिन के अंदर पुलिस आयुक्त लखनऊ के माध्यम से प्रस्तुत करें कि क्यों न उनके इस कृत्य को न्यायालय की अवमानना मानते हुए उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दिया जाए।
लेखक के बारे में
Deep Pandeyदीप नरायन पांडेय लाइव हिन्दुस्तान में पिछले आठ सालों से यूपी की खबरें करते हैं। डिजिटल, टीवी और प्रिंट जर्नलिज्म में 15 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दीप नरायन पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं। दीप अब डिजिटल मीडिया के जाने माने नाम बन गए हैं। दीप हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को बेहतर समझते हैं। यूपी की राजनीति के साथ क्राइम की खबरों पर अच्छी पकड़ है। सामाजिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और हेल्थ पर भी लिखते हैं। दीप पाठकों की पसंद को समझने और उसी तरह से न्पूज प्रस्तुत करने में माहिर हैं। दीप सरल भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाते हैं। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने-लिखने में भी रुचि रखते हैं। मास कम्युनिकेशन में बीए और एमए दीप नरायन पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा के रहने वाले हैं। दीप ने पत्रकारिता की शुरुवात लखनऊ से की। टीवी चैनल से करियर का आगाज करने वाले दीप इसके बाद प्रिंट अमर उजाला लखनऊ में भी रहे। हिन्दुस्तान प्रिंट में वाराणसी, गोरखपुर, फिर लखनऊ में कार्य के दौरान विभिन्न जिलों के डेस्क इंचार्ज रहे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव 2012, 2017, 2022, लोकसभा चुनाव, पंचायत चुनावों के दौरान बेहतर कवरेज कर चुके हैं।
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