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बस्ती के डीआईजी जांच के लिए अपनी आवाज का नमूना दें; सुप्रीम कोर्ट का आदेश

बस्ती के डीआईजी जांच के लिए अपनी आवाज का नमूना दें; सुप्रीम कोर्ट का आदेश

संक्षेप:

यूपी पुलिस के बस्ती के डीआईजी संजीव त्यागी को जांच के लिए अपनी आवाज का नमूना देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनकी आवाज की मिलान एक विवादित ऑडियो क्लिप से होनी है जिसमें विवादित टिप्पणी किए जाने का आरोप है। 

Dec 09, 2025 08:27 pm ISTDeep Pandey बस्ती, हिन्दुस्तान
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सुप्रीम कोर्ट ने बस्ती के डीआईजी संजीव त्यागी को जांच के लिए अपनी आवाज का नमूना देने का आदेश दिया है। उनकी आवाज की मिलान एक विवादित ऑडियो क्लिप से होनी है जिसमें विवादित टिप्पणी किए जाने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने ऑडियो क्लिप उजागर करने वाले के खिलाफ दर्ज केस भी रद्द कर दिया है। मामला वर्ष 2020 का है जब संजीव त्यागी बिजनौर में एसपी थे।

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देहरादून निवासी इस्लामुद्दीन अंसारी (73) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और के विनोद चंद्रन की पीठ ने इस याचिका की सुनवाई के बाद आदेश दिया है। पीठ ने अंसारी को तीन हफ़्तों के भीतर एफएसएल को सम्बंधित ऑडियो क्लिप उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने तेलंगाना एफएसएल निदेशक को अपनी प्रत्यक्ष निगरानी में जांच कराने और 31 जनवरी, 2026 तक सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी, 2026 को करेगी। इस्लामुद्दीन ने हाईकोर्ट में याचिका दी थी कि और अपने खिलाफ बिजनौर सदर कोतवाली में दर्ज मामला रद्द करने की मांग की थी। उनका कहना था कि उनके खिलाफ गलत ढंग से के दर्ज किया गया है। उन्होंने तत्कालीन एसपी द्वारा एक वर्ग विशेष के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी वाली ऑडियो क्लिप की सिर्फ जांच की मांग की थी।

उत्तर प्रदेश के वकील ने पीठ को बताया कि राज्य ने अंसारी के खिलाफ मामला वापस लेने से सम्बंधित याचिका दायर की है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई का यह मामला अधिकार और अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग है। 7 जुलाई, 2020 को मजिस्ट्रेट की अदालत में आरोप-पत्र दायर किया गया, जिसमें अंसारी का नाम शामिल था। दावा किया गया था कि कोतवाली में अंसारी के फोन नंबर के खिलाफ शिकायत हुई थी जिसमें पोस्ट भेजकर धार्मिक भावनाएं भड़काने की बात कही गई थी। अदालत ने मामले को संज्ञान लिया और 30 सितंबर, 2021 को समन जारी किया।

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इसके बाद अंसारी इलाहाबाद उच्च न्यायालय गए, जहां उन्होंने समन को चुनौती दी और मामले को रद्द करने की मांग की। इस साल 13 अगस्त को, उच्च न्यायालय ने अंसारी की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। बस्ती के डीआईजी संजीव त्यागी ने इस बारे में कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में है। प्रकरण कोर्ट में चल रहा है। हमें जो भी बात रखनी होगी उसे माननीय न्यायालय में रखेंगे।

Deep Pandey

लेखक के बारे में

Deep Pandey
दीप नरायन पांडेय, डिजिटल और प्रिंट जर्नलिज्म में 13 साल से अधिक का अनुभव। यूपी के लखनऊ और वाराणसी समेत कई जिलों में पत्रकारिता कर चुके हैं। लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में कार्यरत रहे। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में हैं। राजनीति के साथ क्राइम और अन्य बीटों पर काम करने का अनुभव। और पढ़ें
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