
अधिवक्ता पर बांके से हमला करने वाले दोनों आरोपी भेजे जेल, एक अब भी फरार
संक्षेप: यूपी के बरेली में हत्या के मुकदमे में कचहरी में तारीख लेने आए अधिवक्ता पर सिविल बार एसोसिएशन के प्रांगण में जानलेवा हमला करने वाले दोनों आरोपियों को कोतवाली पुलिस ने जेल भेज दिया है। फरार तीसरे आरोपी की कोतवाली पुलिस तलाश कर रही है।
यूपी के बरेली में हत्या के मुकदमे में कचहरी में तारीख लेने आए अधिवक्ता पर सिविल बार एसोसिएशन के प्रांगण में जानलेवा हमला करने वाले दोनों आरोपियों को कोतवाली पुलिस ने जेल भेज दिया है। फरार तीसरे आरोपी की कोतवाली पुलिस तलाश कर रही है। घायल अधिवक्ता का बरेली के एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

मंगलवार सुबह 10 बजे कचाहरी परिसर से लगे हुए सिविल बार एसोसिएशन के प्रांगण में कोतवाली बीसलपुर क्षेत्र के ग्राम बरखेड़ी निवासी अधिवक्ता ओमपाल पर तीन युवकों ने जानलेवा हमला करते हुए बांके से ताबड़तोड़ प्रहार किए थे। ओमपाल के खिलाफ हत्या का मुकदमा बीसलपुर कोतवाली में तीन साल पूर्व लिखा गया था। उसी मुकदमे में तारीख लेने के लिए अधिवक्ता कचहरी में आया हुआ था। सिविल वार एसोसिएशन के प्रांगण में कुर्सी पर बैठे अधिवक्ता के ऊपर अचानक मुकदमे में वादी पक्ष के तीन लोग सुरेंद्र और बाबू पुत्र जसपाल निवासी ग्राम बरखेड़ी थाना बीसलपुर छाते में छिपे बांके को लेकर वहां पहुंचे और अचानक ओमपाल पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया था।
कचहरी गेट पर सुरक्षा में तैनात उपनिरीक्षक अरविंद त्यागी ने युवक को जैसे-तैसे करके बचाया था। पुलिसने दो आरोपियों को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया था जबकि तीसरा आरोपी मौके से फरार हो गया था। इस मामले में अधिवक्ता की तहरीर पर कोतवाली में जानलेवा हमले का मुकदमा तीनों आरोपियों के खिलाफ दर्ज कर लिया गया था। पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार आरोपी बृजनंदन और सुरेंद्र को जेल भेज दिया है। सीओ सिटी दीपक चतुर्वेदी ने बताया कि तीसरे आरोपी की तलाश की जा रही है, जल्द उसको भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा।
आरोपियों को जेल भेजने के दौरान सुरक्षा रही कड़ी
पुलिस ने जिस समय दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया। उस दौरान वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। प्रभारी निरीक्षक कोतवाली, सुनगढ़ी और गजरौला थानाध्यक्ष फोर्स के साथ कोर्ट परिसर में मौजूद रहे। इसके अलावा न्यायालय सुरक्षा में तैनात फोर्स भी लगा रहा। दरअसल पुलिस को आशंका थी कि गिरफ्तार आरोपियों के साथ कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं द्वारा मारपीट की जा सकती है। हालांकि कोर्ट में किसी तरह का कोई प्रकरण न होने पर पुलिस ने राहत की सांस ली।





