प्रशासक बनते ही 57694 ग्राम प्रधानों का मानदेय बंद, अफसर बोले-इस बारे में निर्देश नहीं
यूपी में पंचायत चुनाव में देरी की वजह से ग्राम प्रधानों को प्रशासक तो बना दिया गया लेकिन प्रशासक बनते ही उनका मानदेय बंद हो गया। ऐसे में ग्राम प्रधानों ने पंचायती राज विभाग को पत्र लिखकर सुविधाएं बहाल करने की मांग की है। वहीं, निदेशक का कहना है कि इस बारे में अभी तक दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।

उत्तर प्रदेश में प्रशासक बनते ही 57694 ग्राम प्रधानों को पांच हजार रुपये का मासिक मानदेय मिलना बंद हो गया है। आसमयिक मृत्यु होने पर कल्याण कोष से उनके परिजनों को 10 लाख की आर्थिक मदद भी नहीं मिलेगी। ऐसे में ग्राम प्रधानों ने पंचायती राज विभाग को पत्र लिखकर सुविधाएं बहाल करने की मांग की है। पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित सिंह का कहना है कि शासन की ओर से इस संबंध में उन्हें अलग से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा का कहना है कि तय समय पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव न होने के कारण ही निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाया गया है। 27 मई से निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के पद पर काम कर रहे हैं। ऐसे में अभी तक पंचायती राज विभाग की ओर से उन्हें मासिक मानदेय और कल्याण कोष से मदद को लेकर कोई निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित सिंह को इस संबंध में पत्र भेजकर मांग की जा चुकी है कि उन्हें मानदेय व कल्याण कोष से मदद दी जाए। चुनाव यदि समय पर नहीं हो पाया तो इसमें प्रधानों का कोई दोष नहीं है। अगर प्रशासक के रूप में वह काम कर रहे हैं, तो उनको मानदेय दिया जाए। यही नहीं प्रधानों का आसमयिक निधन होने पर उन्हें 10 लाख की आर्थिक मदद भी परिजनों को नहीं मिलेगी। ऐसे में जब तक त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव नहीं हो जाते तब तक यह सुविधाएं उन्हें पंचायती राज विभाग दे। अगर हमारी मांग नहीं मानी गई तो अगस्त के पहले सप्ताह में इस प्रकरण को लेकर ग्राम प्रधान अपनी आवाज उठाएंगे। हम अपनी मांगें पूरी होने तक चुप नहीं बैठेंगे।
प्रधानों को पहली बार मिली है प्रशासन की जिम्मेदारी
यूपी में पहली बार ग्राम प्रधानों को प्रशासक पद की जिम्मेदारी दी गई है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देरी के कारण ग्राम पंचायतों की बागडोर ग्राम प्रधानों के हाथ में ही रखे जाने का निर्णय लिया गया है। ग्राम प्रधानों का पांच वर्ष का कार्यकाल खत्म होने के बाद 27 मई से निर्वतमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में काम कर रहे हैं। छह महीने या पंचायत चुनाव होने के बाद नई ग्राम पंचायत की प्रथम बैठक की तारीख तक जो भी पहले हो प्रधानों को प्रशासक पद की जिम्मेदारी दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यह फैसला किया गया है।
वर्ष 2021 में कुल 58195 ग्राम पंचायत प्रधान निर्वाचित हुए थे और उनकी पहली बैठक 27 मई 2021 को हुई थी। ऐसे में ग्राम प्रधानों का पांच वर्ष का कार्यकाल मंगलवार को समाप्त हो रहा है। अभी तक चुनाव न होने की स्थिति में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने पर संबंधित विकास खंड के सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को उस विकास खंड की ग्राम पंचायतों का प्रशासक बना दिया जाता था। ग्राम प्रधानों की मांग पर पहली बार प्रशासक बनाने का निर्णय लिया गया है। ऐसे में ग्राम प्रधानों के पास ग्राम पंचायत की बागडोर पहले की ही तरह है। हालांकि, ये प्रशासक नीति विषयक निर्णय नहीं ले सकते। सिर्फ रूटीन के काम निपटा सकते हैं।


