
यूपी पंचायत चुनाव की तैयारियां 2 महीने से ठप, जानें कहां अटकी आगे की प्रक्रिया
यूपी पंचायत चुनाव की तैयारियां 2 महीने से ठप है। वार्डों के पुनर्गठन का कार्य पूरा हो गया था। फिर समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के लिए शासन को पंचायती राज निदेशालय की ओर से प्रस्ताव भेजा गया था। अब इस आयोग के गठन के इंतजार में कार्यवाही आगे नहीं हो पा रही है।
यूपी पंचायत चुनाव अगले साल अप्रैल- मई में प्रस्तावित है। चुनाव के लिए अब छह महीने से भी कम समय बचा है लेकिन चुनाव की तैयारियां पिछले करीब दो महीने से ठप पड़ी हुई हैं। सितंबर में वार्डों के पुनर्गठन का कार्य पूरा हो गया था। फिर समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के लिए शासन को पंचायती राज निदेशालय की ओर से प्रस्ताव भेजा गया था। अब इस आयोग के गठन के इंतजार में कार्यवाही आगे नहीं हो पा रही है। पूरी प्रक्रिया यही अटक गई है।
यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठित होने पर ही पंचायतों में प्रशासक बैठाए जाएंगे। बिना भेदभाव के आरक्षण की व्यवस्था को लागू किया जाए इसके लिए यह व्यवस्था होगी। बीते पंचायत चुनाव में 25 दिसंबर 2021 को प्रशासन की तैनाती हुई थी। फिर मार्च 2022 में चुनाव की अधिसूचना जारी हुई थी और 26 मई 2022 तक नई पंचायतें भी गठित हो गईं थी।
प्रदेश भर में इस वर्ष मई के अंतिम सप्ताह में वार्डों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हुई थी। सितंबर में वार्डों के पुनर्गठन का कार्य पूरा कर लिया गया था। 504 ग्राम पंचायतें इस बार घटी हैं और अब इनकी संख्या 57695 रह गई है। वहीं जिला पंचायतों के 30 वार्ड घटे हैं और क्षेत्र पंचायतों के 830 वार्ड कम हो गए हैं।
यही नहीं पंचायत चुनाव की मतदाता सूची तैयार कर रहा राज्य निर्वाचन आयोग भी अब 23 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी करेगा। यहां करीब दो करोड़ डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए जाने हैं। जिलों में यह कार्य भी धीमी गति से चल रहा है। फिलहाल, अब जिलों में प्रधानी से लेकर जिला पंचायत सदस्य तक का चुनाव लड़ने के दावेदार परेशान हैं कि आखिर कब आरक्षण तय करने को आयोग गठित होगा और कब तैयारियां जोर पकड़ेंगी। वहीं पंचायतीराज मंत्री लगातार दावा कर रहे हैं कि पंचायत चुनाव तय समय पर ही होंगे।





