यूपी पंचायत चुनाव: ग्राम प्रधानों के बाद अब जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों को उम्मीद

प्रमुख संवाददाता, लखनऊ
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ग्राम प्रधानों को 6 महीने या पंचायत चुनाव होने के बाद नई ग्राम पंचायत की पहली बैठक की तारीख तक जो भी पहले हो प्रशासक की जिम्मेदारी दी गई है। अब जिला पंचायत अध्यक्षों- ब्लॉक प्रमुखों का भी कार्यकाल बढने की उम्मीद है। जिला पंचायत अध्यक्षों का 11 जुलाई, ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को खत्म होगा।

यूपी पंचायत चुनाव: ग्राम प्रधानों के बाद अब जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों को उम्मीद

UP Panchayat Election : उत्तर प्रदेश में पहली बार ग्राम प्रधानों को प्रशासक पद की जिम्मेदारी दी गई है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देरी के कारण ग्राम पंचायतों की बागडोर ग्राम प्रधानों के हाथ में ही रखे जाने का निर्णय लिया गया है। मंगलवार को ग्राम प्रधानों का पांच वर्ष का कार्यकाल खत्म हो रहा है। ऐसे में 27 मई से यह निर्वतमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में काम करेंगे। इसी के साथ अब जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों का भी कार्यकाल बढ़ाए जाना तय माना जा रहा है। जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई और ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को खत्म होगा। अभी तक जिपं अध्यक्ष का कार्यकाल खत्म होने पर जिलाधिकारी और ब्लॉक प्रमुख का कार्यकाल खत्म होने पर एसडीएम को प्रशासक बनाया जाता था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि इनका भी कार्यकाल बढ़ाया जाएगा।

इस दिन तक प्रशासक रहेंगे ग्राम प्रधान

ग्राम प्रधानों को छह महीने या पंचायत चुनाव होने के बाद नई ग्राम पंचायत की पहली बैठक की तारीख तक जो भी पहले हो प्रशासक पद की जिम्मेदारी दी गई है। प्रशासक के तौर पर ग्राम प्रधान सिर्फ रूटीन कार्यों को ही निपटाएंगे और कोई नीति विषयक निर्णय नहीं लेंगे। सोमवार को प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार की ओर से ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने का शासनादेश जारी कर दिया गया। वर्ष 2021 में कुल 58195 ग्राम पंचायत प्रधान निर्वाचित हुए थे और उनकी पहली बैठक 27 मई 2021 को हुई थी। ऐसे में ग्राम प्रधानों का पांच वर्ष का कार्यकाल मंगलवार को समाप्त हो रहा है। अभी तक चुनाव न होने की स्थिति में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने पर संबंधित विकास खंड के सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को उस विकास खंड की ग्राम पंचायतों का प्रशासक बना दिया जाता था। ग्राम प्रधानों की मांग पर पहली बार प्रशासक बनाए जाने का निर्णय लिया गया है। ऐसे में ग्राम प्रधानों के पास ग्राम पंचायत की बागडोर पहले की ही तरह रहेगी।

नीति निर्णय नहीं, सिर्फ रूटीन काम कर सकेंगे ग्राम प्रधान

ग्राम पंचायत प्रधानों को प्रशासक पद की जिम्मेदारी पहली बार दी गई है। यह प्रशासक कोई नीति विषयक निर्णय नहीं ले सकेंगे। प्रशासक के तौर पर अत्यावश्यक एवं विशेष परिस्थितियों में नीति विषय निर्णय संबंधी प्रस्ताव जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। जिलाधिकारी की स्वीकृति के बाद ही नीति विषय निर्णय हो सकेगा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देरी के कारण ग्राम पंचायतों में विकास कार्य बाधित न हों इसके लिए प्रशासक की व्यवस्था पंचायती राज विभाग की ओर से किए जाने का प्राविधान है। ग्राम प्रधानों की ओर से उन्हें ही ग्राम पंचायत का प्रशासक बनाने की मांग उठाई जा रही थी। उत्तराखंड, राजस्थान व मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव में देरी के कारण ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाने के निर्णय लिए गए हैं। ऐसे में यूपी में भी यही व्यवस्था लागू करने की मांग की जा रही थी। फिलहाल अब ग्राम प्रधान प्रशासक की भूमिका में ग्राम पंचायतों का संचालन करेंगे।

बीते 20 मई को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में विभिन्न पदों की सीटों पर अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण तय करने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर दिया गया था। उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश राम औतार सिंह की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय आयोग का गठन हो गया है। वहीं राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से 10 जून को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। फिलहाल, अब त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद ही होने की उम्मीद है। राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अखिलेश सिंह ने पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कौशल किशोर पांडेय ने राज्य सरकार के इस निर्णय पर खुशी जताई है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया है। संगठन मुख्यमंत्री का आभार जताने को ब्लॉक से लेकर राज्य स्तर तक आयोजित करेगा आभार समारोह।

विधानसभा चुनाव के बाद ही पंचायत चुनाव

अगला विधानसभा चुनाव फरवरी व मार्च 2027 में होगा। जनवरी में अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है। ऐसे में अब उम्मीद जताई जा रही है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद ही हो। निवर्तमान ग्राम प्रधानों को अब प्रशासक बनाकर उन्हें खुश कर दिया गया है।

आयोग का दफ्तर जनपद सचिवालय भवन में बना

ओबीसी आयोग का कार्यालय राजधानी के जनपद में स्थित सचिवालय में बनाया गया है। अध्यक्ष राम औतार सिंह व सदस्य अब जल्द ओबीसी आरक्षण तय करने का कार्य शुरू करेंगे। आयोग का कार्यकाल छह महीने का है।

Ajay Singh

लेखक के बारे में

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अजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।

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