बेटियों को विदा करते ही पिता की मौत, तबीयत बिगड़ने पर 16 दिन पहले आई थी बारात
मैनपुरी के बेवर में दो बेटियों की विदाई के महज 90 मिनट बाद पिता सुरेंद्र चक की मौत हो गई। गंभीर बीमारी के चलते पिता ने 24 अप्रैल की जगह 8 अप्रैल को ही बारात बुला ली थी।

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक पिता ने अपनी दो बेटियों की शादी की रस्में पूरी कीं, उन्हें ससुराल के लिए विदा किया और फिर अपनी जिम्मेदारी पूरी मानकर सदा के लिए आंखें मूंद लीं। बेटियों की विदाई के महज डेढ़ घंटे के भीतर पिता की मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
तबीयत बिगड़ी तो समय से पहले बुलाई बरात
मोहल्ला कुचलिया निवासी सुरेंद्र चक (पुत्र भगवान दास) के परिवार में पांच बेटियां थीं। तीन बेटियों की शादी वे पहले ही कर चुके थे। शेष दो बेटियों, लच्छो और शिवानी उर्फ जग्गो की शादी क्रमशः आगरा और तिर्वा से तय हुई थी। वैसे तो दोनों की बरात आगामी 24 अप्रैल को आनी प्रस्तावित थी, लेकिन अचानक सुरेंद्र चक की तबीयत काफी बिगड़ गई। अपनी गिरती सेहत को देखते हुए पिता की अंतिम इच्छा यही थी कि वे अपनी आंखों के सामने बेटियों के हाथ पीले होते देख लें। परिजनों ने दूल्हे पक्ष से बात की और सहमति के बाद बुधवार, 8 अप्रैल को ही बरातें बुला ली गईं।
मंडप में फेरे और फिर अंतिम विदाई
बुधवार की रात घर के आंगन में मंडप सजा था। पिता की नाजुक हालत के बीच मंत्रोच्चार के साथ फेरों की रस्में निभाई गईं। सुरेंद्र चक ने बिस्तर पर लेटे-लेटे ही अपनी लाड़लियों को आशीर्वाद दिया। रात करीब 7 बजे बड़ी बेटी लच्छो को आगरा के लिए विदा किया गया। इसके ठीक एक घंटे बाद, 8 बजे छोटी बेटी शिवानी की विदाई तिर्वा से आई बरात के साथ हुई।
ससुराल पहुंचते ही मिली मौत की खबर
जैसे ही दोनों बेटियां अपने नए संसार की ओर बढ़ीं, पीछे घर में सन्नाटा पसर गया। रात करीब 9:30 बजे, विदाई के कुछ ही देर बाद सुरेंद्र चक ने अंतिम सांस ली। विडंबना देखिए कि जब पिता ने दम तोड़ा, तब बड़ी बेटी लच्छो रास्ते में शिकोहाबाद तक पहुँची थी और छोटी बेटी तिर्वा पहुँच चुकी थी। रास्ते में बेटियों को पिता की मौत की भनक तक नहीं लगने दी गई। ससुराल पहुँचने पर जब उन्हें यह खबर मिली, तो दोनों बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। वे उसी रात वापस अपने मायके लौटीं।
गुरुवार की सुबह, गमगीन माहौल में सुरेंद्र चक का अंतिम संस्कार किया गया। मोहल्ले के लोग इस घटना को देखकर स्तब्ध हैं; हर किसी की जुबां पर यही बात थी कि पिता ने अपनी बेटियों के सुखद भविष्य का संकल्प पूरा किया और फिर विदा हो गए।
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लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।
पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।


