
पिता ने 7 महीने के मासूम को उछाला, गिरकर मौत, शव उल्टा लटकाकर घूमता रहा शराबी
यूपी में लखीमपुर के मितौली में नशे में धुत कुर्सी पर बैठे युवक ने अपने सात माह के बच्चे को हवा में उछालकर पटक दिया। सिर में चोट लगने से बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, नशे में धुत युवक बच्चे के शव को पैर से लटकाकर गली में घूमता रहा।
यूपी में लखीमपुर के मितौली में नशे में धुत कुर्सी पर बैठे युवक ने अपने सात माह के बच्चे को हवा में उछालकर पटक दिया। सिर में चोट लगने से बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, नशे में धुत युवक बच्चे के शव को पैर से लटकाकर गली में घूमता रहा। इसका वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है। मितौली थाना क्षेत्र के रेवाना गांव निवासी सतीश कुर्सी पर बैठा अपने सात माह के बच्चे सौरभ से खिलवाड़ कर रहा था।

बताते हैं कि नशे में धुत सतीश अचानक सात माह के मासूम बच्चे की पीठ पर हाथ से जोर-जोर से ठोकने लगा। इसी दौरान उसने बच्चे को हाथ में लेकर ऊपर की ओर उछाल दिया। इसके बाद बच्चा सतीश के साथ जमीन पर आ गिरा। नीचे गिरने से बच्चे के सिर में चोट आई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद सतीश मृत बच्चे के शव को पैर से लटकाकर गली में घूमता रहा। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वहीं, मितौली इंस्पेक्टर शिवाजी दुबे ने बताया कि युवक की लापरवाही से बच्चे की मौत हुई है। आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
बच्चे के शव को उल्टा लटकाकर गली में घूमता रहा शराबी पिता
मितौली में बच्चे की मौत के बाद उसके शव को लटकाकर ले जाने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें 46 सेकेंड का एक वीडियो बहुत ही वीभत्स है। इसमें सतीश सात माह के बेटे के पैर पकड़कर उसे लटकता हुआ ले जा रहा है। यह हृदयविदारक वीडियो हर किसी का दिल दहलाने वाला है। इस मामले में मासूम बच्चे के ताऊ लालजी प्रसाद ने मितौली थाने में अपने छोटे भाई सतीश कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने आरोपी सतीश को गिरफ्तार कर लिया है। उधर, मासूम बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
दिमागी रूप से बीमार है बच्चे की मां: रेहाना गांव के रहने वाले सतीश का विवाह नौ साल पहले हैदराबाद थाना क्षेत्र के मूड़ा गांव की महिला से हुआ था। सतीश लंबे समय से शराब का आदी हैं। बताते हैं कि सतीश की पत्नी शादी के पहले से ही मानसिक बीमार है। वह ठीक से बोल भी नहीं पाती है। बेटे की मौत से बेखबर वह अपने घर पर अकेली बेसुध सी बैठी है। घर-परिवार व आसपास के घरों की महिलाएं उसके पास बैठी नजर आई। बच्चे की मौत को लेकर महिलाएं आपस में चर्चा में मशगूल थी लेकिन मां चुपचाप बेसुध सी नजर आई।
घटना से स्तब्ध हैं ग्रामीण
घटना को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। घटना के बाद से स्थानीय लोग हैरत में हैं। सतीश ने बेटे को मौत के घाट क्यों उतारा, यह सवाल लोगों को परेशान कर रहा है। जो वायरल वीडियो देख रहा है, वह भी घटना से हैरत में हैं। गांव के लोग कुछ भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं लेकिन वायरल वीडियो का हवाला देकर लोग सतीश को कोस रहे हैं। वायरल वीडियो में लग रहा है कि आरोपी ने जानबूझ कर बेटे को मौत के घाट उतार दिया। घटना के बाद लोग स्तब्ध हैं और गुस्से में भी। लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर कोई पिता अपने बेटे को ऐसे कैसे मार सकता है।
ऐसा पत्थर दिल कैसे हो सकता है पिता
वायरल वीडियो में सतीश जिस तरह से मासूम बेटे के शव का पैर पकड़कर ले जाते दिख रहा है, वह हर किसी को झकझोर रहा है। लोगों के मुंह से बरबस यही निकल रहा है कि आखिर एक पिता इतना पत्थर दिल कैसे हो सकता है। भले ही आरोपी पिता नशे में धुत बताया जा रहा है लेकिन उसने अपनी सुध तो नहीं खोई थी। अमूमन चोट लगने पर हर मां-बाप सबसे पहले अपने बच्चे को लेकर अस्पताल की ओर दौड़ते हैं या आसपास के लोगों से मदद मांगते हैं लेकिन वायरल वीडियो से स्पष्ट है कि सतीश ने ऐसा कुछ भी नहीं किया। उसने बेटे को बचाने को कोई प्रयास तक नहीं किया जबकि जमीन पर गिरने से मासूम की बचीखुची सांसें तो पिता के उल्टा लटकाकर चलने से ही निकल गई होंगी।
ननिहाल में रहता है बड़ा बेटा
सतीश के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा करीब 8 साल का है और वह काफी दिनों से अपने ननिहाल हैदराबाद थाना क्षेत्र के मूड़ा गांव में रहता है। वहीं, छोटा बेटा सात माह का बताया जा रहा है, जो मां-बाप के साथ रहता था। पिता की लापरवाही से गुरुवार शाम को छोटे बेटे की मौत हो गई। मानसिक रूप से बीमार बच्चे की मां भी बेहाल नजर आई।
समय से मिलता इलाज तो बच सकती थी जान
गांव के लोगों का मानना है कि यदि मासूम बच्चे को समय पर इलाज मिल जाता तो शायद उसकी जान बच जाती। जब कुर्सी पर बैठा सतीश बेटे की जोर-जोर से पीठ ठोंक रहा था और उसे हवा में उछालकर पटक रहा था, तब यदि किसी ने मासूम को गोदी में उठा लिया होता तो भी उसकी जान बच सकती थी। शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था।



