साथ जीने का वादा तोड़ रही हूं...तीन इच्छाएं लिख पत्नी ने दी जान, पति ने बताया मौत का सच
साथ जीने का वादा तोड़ रही हूं, माफ करना.. लिखकर कानपुर की वैष्णवी ने जान दे दी। सुसाइड नोट में पति से माफी मांगी और साथ में अपनी तीन अंतिम इच्छाएं भी लिख दीं। वैष्णवी ने परेशान होकर आत्महत्या का कदम चुना।

पतिहंता सोनम, मुस्कान और सिया जैसी लड़कियां अगर यह सुसाइड नोट पढ़ लें तो शायद शर्म से गड़ जाएं। यूपी के कानपुर की वैष्णवी ने यह लंबा सुसाइड नोट लिखकर जान दे दी। वह रीढ़ के गठिया से पीड़ित थी और असहनीय दर्द ने उसे तोड़ दिया था। जहर खाकर जान देने से पहले उसने सुसाइड नोट में पति के लिए लिखा-मुझे माफ कर देना। हमेशा साथ निभाने का वादा तोड़ रहे हैं हम। आज तक सारी कसमें निभाईं। पर अब मजबूरी में यह करना पड़ रहा है। उम्मीद है तुम समझोगे। मेरी तकलीफ तुमसे बेहतर कौन समझ सकेगा भला। फिर से सॉरी.. दुखी न होना। सुसाइड नोट में उसने तीन अंतिम इच्छाएं भी लिखीं।
रावतपुर के सुरेंद्र नगर निवासी रेलकर्मी शिवम शुक्ला भोपाल में तैनात हैं। उन्होंने बताया कि तीन साल पहले उनका विवाह कानपुर देहात के असालतगंज की वैष्णवी उर्फ निक्की(26 वर्षीय) से हुआ था। पत्नी को शादी से पहले ही रीढ़ में गठिया की बीमारी थी। जिसका इलाज चल रहा था। तेज दर्द में कोई लाभ नहीं हो रहा था। इससे वैष्णवी काफी तनाव में रहती थी।
अभी हाल में उसने दिल्ली पुलिस कांस्टेबल की लिखित परीक्षा पास की थी। आगे फिजिकल टेस्ट होना था। अपनी बीमारी के कारण वह फिजिकल परीक्षा पास न कर पाने की बात कहती थी। शिवम ने बताया कि बुधवार सुबह वह भोपाल से घर पहुंचे तो पत्नी के मुंह से झाग निकल रहा था। वहीं पास में सुसाइड नोट पड़ा था। जिसमें बीमारी से परेशान होकर आत्महत्या करने की बात लिखी हुई थी। वह पत्नी को लेकर निजी अस्पताल पहुंचे। जहां उपचार के दौरान वैष्णवी की मौत हो गई। जिसके बाद उन्होंने पुलिस को घटना की जानकारी दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच पड़ताल की।
तीन अंतिम इच्छाएं
वैष्णवी ने लिखा कि उसका जेवर छोटे भाई की शादी में दे दिया जाए। स्कूटी भी छोटे भाई को दे दी जाए। फोन खाली करके रेडी टु यूज है। यह शुभम या मम्मी ले ले। ससुराल की तारीफ में लिखा कि बढ़िया नसीब होता है, जिसे ऐसा ससुराल मिले। इतने सालों तक मेरा ध्यान रखने के लिए शुक्रिया। हम लोगों ने साथ में जितने पल गुजारे, बेहतरीन थे। भाई और पिता के लिए लिखा-आपको बहुत प्यार करते हैं।
डॉक्टर बोले- रीढ़ में ट्यूमर का है इलाज
वैष्णवी जिंदगी की जंग हार गई, लेकिन उसकी कहानी एक बड़ा सवाल छोड़ गई। जिस रीढ़ के ट्यूमर को वह और उसका परिवार मौत का पैगाम समझ बैठे। हैलट पीजीआई के न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ मनीष सिंह के अनुसार आधुनिक जांचों से बीमारी की सटीक पहचान की जा सकती है। इसके बादआधुनिक न्यूरो सर्जरी तकनीकों की मदद से ट्यूमर निकालकर मरीज को राहत दी जाती है।
लेटने में होता असहनीय दर्द
डॉ मनीष के अनुसार, रीढ़ में ट्यूमर के कारण मरीज को लेटने में काफी तकलीफ हाेती है। ट्यूमर की वजह से नस पर प्रेशर पड़ता है। यही मरीज को तेज पीड़ा देती है। रीढ़ का ट्यूमर सुनते ही मरीज और परिजन अक्सर घबरा जाते हैं। उन्हें लगता है कि मरीज कभी सामान्य जीवन नहीं जी पाएगा। यही डर कई बार इलाज में देरी का कारण बन जाता है। समय पर उपचार से मरीज पूरी तरह ठीक हो जाता है।
लेखक के बारे में
Srishti Kunjसृष्टि कुंज एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में एक दशक से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। उन्होंने पंजाब केसरी ग्रुप के नवोदय टाइम्स और इंडिया न्यूज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ काम किया है, जहां उन्होंने नेशनल और दिल्ली डेस्क के लिए कंटेंट क्रिएशन और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग में अपनी स्किल्स को निखारा है। सृष्टि कुंज लाइव हिन्दुस्तान में लगभग 6 वर्षों से यूपी की टीम संग काम कर रही हैं। 2020 से वह हिन्दुस्तान डिजिटल के लिए उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बीटों से जुड़ीं खबरें लिखती हैं। सृष्टि ने अपनी स्कूलिंग के बाद एनिमेशन की पढ़ाई की और फिर बतौर एनिमेटर एक विदेशी गेम के लिए कैरेक्टर डिजाइनिंग की। इसके बाद सृष्टि ने मॉस कम्यूनिकेशन और जर्नलिजम में स्नातक की डिग्री हासिल की। एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय सृष्टि ने जर्नलिज्म एंड मास कॉम में डिग्री लेकर पंजाब केसरी ग्रुप के दिल्ली संस्करण नवोदय टाइम्स की डिजिटल टीम के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। 3 साल नवोदय टाइम्स से जुड़े रहने के बाद सृष्टि ने इंडिया न्यूज की डिजिटल टीम (इनखबर) की नेशनल डेस्क के साथ भी काम किया। 2020 से सृष्टि लाइव हिन्दुस्तान की डिजिटल टीम के साथ अब ट्रेंड्स के अनुसार पाठकों तक यूपी की हर खबर को पहुंचा रही हैं।
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