
रुपये मांगने पर झगड़ा, पिता ने इकलौते बेटे को गोली से उड़ाया फिर किया ये काम
संक्षेप: यूपी के कानपुर देहात में घरेलू विवाद के चलते कानपुर देहात में पिता ने शुक्रवार को लाइसेंसी बंदूक से गोली मारकर इकलौते बेटे की हत्या कर दी। घटना के बाद उसने बंदूक समेत थाने जाकर सरेंडर कर दिया।
यूपी के कानपुर देहात में घरेलू विवाद के चलते कानपुर देहात में पिता ने शुक्रवार को लाइसेंसी बंदूक से गोली मारकर इकलौते बेटे की हत्या कर दी। घटना के बाद उसने बंदूक समेत थाने जाकर सरेंडर कर दिया। पत्नी की तहरीर पर पुलिस ने कत्ल का मुकदमा दर्ज कर लिया है। आशादेवी ने बताया कि उनके पति दुर्गा प्रसाद दीक्षित का कई दिनों से बेटे 24 वर्षीय आयुष से विवाद चल रहा था। आए दिन उनके बीच किसी न किसी बात पर झगड़ा होने लगता था।

गुरुवार रात किसी बात पर दोनों में कहासुनी काफी बढ़ गई। रात में किसी तरह मामला शांत हो गया लेकिन भोर पहर करीब तीन फिर दोनों झगड़ने लगे। दुर्गा प्रसाद उसे मारने दौड़े तो बेटे ने अंदर से कमरा बंद कर लिया। काफी देर बाद आयुष कमरे से बाहर निकला तो दुर्गा ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से उस पर ताबड़तोड़ दो फायर कर दिए। एक गोली उसने सीने में और दूसरी पेट पर जा लगी। कुछ देर तक तड़पने के बाद आयुष की मौत हो गई। उधर, बेटे को गोली मारने के बाद दुर्गा प्रसाद ने थाने पर बंदूक समेत सरेंडर कर दिया।
हत्या की सूचना पर मौका-ए-वारदात पर सीओ डेरापुर राजीव सिरोही, इंस्पेक्टर संजेश सिंह, दस्तमपुर चौकी प्रभारी गिरीश चंद्र अपनी टीम के साथ पहुंचे। फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए। इंस्पेक्टर डेरापुर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आपसी विवाद की बात सामने आ रही है। बेटा पिता से मोबाइल के लिए पैसे मांग रहा था। इसे लेकर भी विवाद था। उन लोगों के खिलाफ पहले भी कई बार झगड़ा हो चुका है। आशादेवी की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस सभी बिंदुओं पर जांच कर रही है।
पत्नी सामने आ जाती तो उसे भी मार डालता
तुनक मिजाज और सनकी दुर्गा प्रसाद ने जिस वक्त भोर में बेटे की गोली मारकर हत्या की उस वक्त अगर पत्नी भी बाहर आ जाती तो शायद व उसकी भी हत्या कर देता। शाम को उसने पत्नी की भी पिटाई की थी इस पर बेटे ने विरोध किया था। रात तक दोनो में विवाद चलता रहा था। दुर्गा प्रसाद दीक्षित को गांव के लोग भी स्वभाव से सनकी और तुनक मिजाज मानते हैं। प्रत्यक्ष दर्शियों की मानें तो कुछ दिन पहले बेटे आयुष का एक महंगा फोन खो गया था। इसके बाद से वह पिता से फोन लेने के लिये पैसे मांग रहा था।
संपन्न किसान होने के कारण पैसे की कोई कमी न होने के बाद भी दुर्गा सारा पैसा अपने पास ही रखते थे। इसको लेकर भी घर में आये दिन विवाद होता था। शाम को विवाद हुआ तो पत्नी आशा देवी के बोलने पर दुर्गा ने उसकी पिटाई कर दी। बेटे ने उसका बचाव किया। हाथ में चोट आ जाने के कारण उसने मां की उंगली में मलहम पट्टी भी की। विवाद के चलते घर में खाना नहीं बना तो वह दुकान से समोसे लेकर आया और मां बेटे ने वहीं खाये थे।
भोर करीब 3 बजे फिर से विवाद शुरु हो गया। दुर्गा आयुष ने भैस को चारा आदि लगा दिया। पिता को आक्रामक देख वह शौचालय में घुस गया, जबकि पत्नी ने घर का गेट बंद कर लिया। इसके बाद पिता के गाली गलौज पर जैसे ही आयुष बाहर निकला उसने लाइसेंसी बंदूक से ताबड़तोड़ दो गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद वह वहां से थाने के लिये निकल गया। मां बेटे की मौत से बदहवास हो गई।
पहली पत्नी ने भी जहर खाकर दी थी जान
ग्रामीणों ने बताया कि दुर्गा प्रसाद ने दो शादी की थी। पहली शादी से एक पुत्री गुंजन थी। विवाह के बाद दुर्गा ने उससे कभी संबंध नहीं रखा। वहीं पहली पत्नी ने भी इनकी प्रताड़ना से तंग आकर जहर खाकर जान दे दी थी। इसके बाद दूसरी शादी आशा देवी से की। इनके भी एक ही पुत्र आयुष था। इसके बाद भी दुर्गा की पत्नी और पुत्र के साथ पटरी नहीं बैठ रही थी। पैसे का मालिक बने रहने के कारण वह किसी को तवज्जो नहीं देता था।
तो क्या पुलिस की बेपरवाही से चली गई आयुष की जान
गांव के लोगों की मानें तो हत्या के मामले में पुलिस की बड़ी चूक और लापरवाही है। पुलिस अगर ठोस कदम उठा लेती तो आयुष की जान बच जाती। रात में जब उसने पत्नी की पिटाई की तो बेटे ने 112 नंबर पर काल किया और पुलिस दोनो का समझा कर चली गई। ग्रामीणों का आरोप है कि सुबह विवाद होने पर फिर से पुलिस को सूचना दी गई थी। सुबह करीब तीन बजे दस्तमपुर पुलिस आई थी। वह अगर पिता पुत्र में से किसी को भी लेकर चली जाती तो शायद हत्याकांड जैसी बड़ी वारदात नहीं होती। इस बाबत एएसपी राजेश पाण्डेय ने बताया कि पुलिस पहुंचने का मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है। वह इस मामले की जांच कराने के बाद ही कुछ कह सकेंगें। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बढ़ रही घटनाओं के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घरेलू विवाद की आदत बड़े अपराधों को जन्म दे देती है।
गांव का मकान बेच, बाहर खेत में बनवाया था मकान
दुर्गा की सनक और स्वभाव के कारण उसकी गांव में भी लोगों से कम बनती थी। इस पर उसने गांव का मकान बेच कर सड़क किनारे अपने खेतों में मकान बना लिया था। पैसे को लेकर उसका अक्सर पत्नी और बेटे से विवाद होता रहता था। वह पैसा सिर्फ अपनी मर्जी पर ही देता था। वह पैसा सिर्फ अपनी मर्जी पर ही देता था। ऐसे हालातों ने परिवार में तनाव और दूरी दोनों को बढ़ा दिया था , उसकी इस सनक की वजह से परिवार हमेशा परेशान रहता था ।





