स्टांप और ई-स्टांप में फर्जीवाड़ा रोकने को बनेगी नीति, यूपी सरकार ने शुरू की तैयारी, बनी समिति

Feb 07, 2026 07:06 pm ISTDinesh Rathour मेरठ, मुख्य संवाददाता
share

यूपी में अब स्टांप पेपर और ई-स्टांप के फर्जीवाड़े पर शिकंजा कसा जाएगा। इसे रोकने के लिए यूपी सरकार नीति बनाएगी। इस संबंध में निबंधन विभाग के आठ अफसरों की विशेष समिति गठित की गई है।

स्टांप और ई-स्टांप में फर्जीवाड़ा रोकने को बनेगी नीति, यूपी सरकार ने शुरू की तैयारी, बनी समिति

स्टांप पेपर और ई-स्टांप के फर्जीवाड़े पर शासन स्तर से शिकंजा कसेगा। इसे लेकर प्रदेश सरकार नई नीति बनाएगी। निबंधन विभाग के आठ अफसरों की विशेष समिति गठित की गई है, जो विचार-विमर्श और दूसरे राज्यों की नीतियों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करेगी। प्रदेश में करोड़ों के स्टांप और ई-स्टांप घोटाले के बाद अब सरकार ने इस फर्जीवाड़े को जड़ से खत्म करने की तैयारी कर ली है।

प्रदेश स्तर पर नई और सुरक्षित नीति बनाने के लिए शासन द्वारा आठ सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया है। इस समिति का नेतृत्व अपर आयुक्त स्टांप मनीन्द्र कुमार सक्सेना को सौंपा गया है। इस समिति में मेरठ के एआईजी स्टांप नवीन कुमार शर्मा, बुलंदशहर के एआईजी स्टांप संत कुमार रावत सहित शासन स्तर के कुल आठ अधिकारियों को शामिल किया गया है।

समिति संयोजक लखनऊ के एआईजी स्टांप रमेश चंद्र को बनाया गया है। समिति को स्टांप बिक्री की प्रक्रिया में खामियों को पहचानने और ई-स्टांपिंग प्रणाली को अभेद्य बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। यह समिति पूरे प्रदेश के लिए एक समान और सुरक्षित स्टांप नीति का मसौदा तैयार करेगी। समिति इस बात पर जोर देगी कि भविष्य में स्टांप पेपर की क्लोनिंग या फर्जी ई-स्टांप जेनरेट करना नामुमकिन हो।

मेरठ में हो चुका है करोड़ों का फर्जी स्टांप घोटाला

हाल के दिनों में मेरठ समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में करोड़ों रुपये का स्टांप घोटाला उजागर हुआ था। जालसाजों ने तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर फर्जी ई-स्टांप के जरिए सरकार को राजस्व का भारी चूना लगाया। इसी को देखते हुए शासन ने मौजूदा सिस्टम को पूरी तरह बदलने का फैसला किया है। मेरठ में फर्जी स्टांप के 1500 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं।

Dinesh Rathour

लेखक के बारे में

Dinesh Rathour

दिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका (डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।

पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी है।

और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News, Lucknow News, Meerut News, Ghaziabad News, Agra News और Kanpur News के साथ-साथ UP Board Result, UP Board 10th Result, UP Board 12th Result और UP News अपडेट हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।