जमीन-मकान की रजिस्ट्री को लेकर यूपी सरकार ने बनाई नई व्यवस्था, स्टांप खरीदने का भी झंझट खत्म
योगी सरकार ने संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ई-पंजीकरण मॉड्यूल लागू किया है। इसके तहत अब लोगों को रजिस्ट्री ऑफिस के चक्कर नहीं लगाने होंगे। घर बैठे ही सारे काम हो जाएंगे।

UP Government Order: यूपी में अब जमीन-मकान की रजिस्ट्री को लेकर नई व्यवस्था शुरू की गई है। रजिस्ट्री के लिए अब किसी को आफिसों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। योगी सरकार ने संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ई-पंजीकरण मॉड्यूल लागू किया है। नई व्यवस्था के तहत विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद तथा अन्य अधिकृत संस्थाओं की योजनाओं में आवंटित संपत्तियों की रजिस्ट्री अब ऑनलाइन माध्यम से कराई जा सकेगी। इससे आवंटियों को रजिस्ट्री दफ्तर के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। स्टांप खरीदने और रजिस्ट्री शुल्क देने का भी झंझट पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। अब सबकुछ ऑनलाइन होगा।
महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने सभी सहायक महानिरीक्षकों को निर्देश जारी करते हुए ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया है। नई व्यवस्था में संबंधित संस्था अपने स्तर पर एक प्राधिकृत अधिकारी नामित करेगी, जो दस्तावेजों के अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी करेगा। स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रीकरण शुल्क का भुगतान पूरी तरह ऑनलाइन होगा। पक्षकारों का सत्यापन आधार बेस्ड ई-केवाईसी के माध्यम से होगा। इसके तहत फोटो, डिजिटल हस्ताक्षर और बायोमीट्रिक सत्यापन अनिवार्य रहेगा। सत्यापन पूर्ण होने के बाद दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उप निबंधक को भेजे जाएंगे और उनका सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड विभागीय पोर्टल पर संरक्षित रहेगा। सभी जिलों के रजिस्ट्री अधिकारियों को स्थानीय विकास प्राधिकरणों आदि संस्थाओं के साथ बैठकें कर, ई-पंजीकरण की प्रक्रिया तथा उसके लाभों की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। नई व्यवस्था से समय और धन की भी बचत होगी।
डिजिटल स्टांपिंग लागू, घर बैठे कराएं किराएनामे का ऑनलाइन पंजीकरण
किरायानामों के पंजीकरण की प्रक्रिया अब और आसान हो गई है। निबंधन विभाग ने डिजिटल स्टांपिंग और ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा शुरू कर दी है, जिससे मकान मालिक और किरायेदार घर बैठे ही किराया अनुबंध तैयार एवं पंजीकृत करा सकेंगे। इस व्यवस्था के तहत 12 माह या ज्यादा अवधि और 10 लाख रुपये से कम किराया राशि वाले अनुबंधों को न्यूनतम 500 रुपये स्टांप शुल्क जमा कर विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज कराया जा सकेगा। 11 माह तक के किराएनामे का पंजीकरण आवश्यक नहीं है। सिर्फ स्टांप ड्यूटी जो 2 से 4 प्रतिशत तक होती है, देना जरूरी है।
विभागीय पोर्टल पर दर्ज होगी दोनों पक्षों का विवरण
एआईजी स्टांप बृजेश एस चौधरी ने बताया कि विभागीय पोर्टल पर दोनों पक्षों का विवरण दर्ज कर ई-केवाईसी सत्यापन किया जाएगा। अनुबंध की अवधि, मासिक किराया और अन्य जानकारियां भरने पर पोर्टल स्वतः स्टांप शुल्क की गणना करेगा तथा भुगतान भी ऑनलाइन होगा। इसके बाद डिजिटल स्टांपिंग युक्त वैध दस्तावेज उपलब्ध हो जाएगा, जिसका विधिक उपयोग किया जा सकेगा। अलग से स्टांप लेने की जरूरत नहीं है।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।
पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


