आंगनबाड़ी और आशा वर्करों का मानदेय बढ़ाएगी यूपी सरकार, विधान परिषद में सीएम योगी ने की घोषणा
मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों खासतौर से समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सपा का विकास जेपीएनआईसी, गोमती रिवर फ्रंट और पूर्वांचल एक्सप्रेस वे में देखा जा सकता। सपा ने जेपी और लोहिया के सपनों पर कुठाराघात किया है।
यूपी बजट सत्र के दौरान बोल रहे सीएम योगी ने बड़ी घोषणा कर दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधान परिषद में कहा कि हम आंगनवाड़ी और आशा वर्कर का मानदेय बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षामित्र अनुदेशक के लिए काम कर रही है। इन सब को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिया है। इससे पहले निराश्रित और वृद्धा पेंशन बढ़ाने की घोषणा सीएम विधानसभा में कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों खासतौर से समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सपा का विकास जेपीएनआईसी, गोमती रिवर फ्रंट और पूर्वांचल एक्सप्रेस वे में देखा जा सकता। सपा ने जेपी और लोहिया के सपनों पर कुठाराघात किया है। सीएम योगी ने एसआईआर के मुद्दे पर कहा, सपा संवैधानिक संस्थाओं का अपमान कर रही है और समाज में विद्वेष फैलाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सपा को कांग्रेस से सबक लेना चाहिए। जिस तरीके से विधान परिषद कांग्रेस विहीन हो गई है, यदि सपा ने रवैया न बदला तो विधान परिषद और विधानसभा में उसकी भी वही स्थिति हो जाएगी।
आठ साल में 23 लाख करोड़ हुई यूपी की जीडीपी
विधानसभा परिषद में विपक्ष के सवालों का जवाब दे रहे सीएम योगी ने कहा, हमने ग़ुलामी की मानसिकता से मुक्ति का मार्ग अपनाया है। पीएम मोदी ने आज़ादी के अमृत महोत्सव के तहत विकसित भारत का आह्वान किया। हमने सभी तीर्थों के विकास का कार्य किया। आज उत्सव प्रदेश की पहचान दीपोत्सव, देव दीपावली और रंगोत्सव से है। 2017 तक यूपी की जीडीपी 13 लाख करोड़ थी। 2017 के बाद जब भाजपा की सरकार बनी तो महज आठ साल में यूपी की जीडीपी 23 लाख करोड़ हो गई। सीडी रेश्यो 45 प्रतिशत से बढ़ाकर 62 प्रतिशत हुआ। उत्तर प्रदेश आज रेवन्यू सरप्लस स्टेट है।
2017 से पहले कृषि के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं थी
किसानों को लेकर सीएम योगी ने कहा, आज अन्नदाता हमारी पहचान है। अन्नदाता किसानों को उत्पादक से उपभोक्ता बना दिया था पिछली सरकारों ने। अब किसान फिरसे उत्पादक के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। 2017 के पहले कृषि के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं थी। 2017 के बाद लागत कम उत्पादन ज़्यादा हो रहा है। किसान अब उद्यमी और गाँव की महिला ड्रोन दीदी के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं। आज कृषि विकास डर 8 से बढ़कर 18 प्रतिशत किया है हमने। कुल कृषि भूभाग केवल 11 प्रतिशत है लेकिन यूपी 21% खाद्यान्न उत्पन्न कर रहा है। पीएम किसान निधि से 15000 करोड़ की राशि डीबीटी से ट्रांसफर हुई है।
FPO एग्री स्टार्टअप और फ़ूड प्रोसेसिंग के माध्यम से किसान की उत्पादकता बढ़ाने पर काम किया जा रहा है। वर्ल्ड बैंक के साथ यूपी AGREES प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। पहले गो हत्या गो तस्करी होती थी। आज 7727 गो आश्रय स्थल हैं, जिसमे 16 लाख से अधिक गोवंश हैं। आज दुग्ध उत्पादन में यूपी अग्रणी राज्य है। पिछले 8 साल में 306000 करोड़ से अधिक गन्ना मूल्य भुगतान किया है। 122 चीनी मिलों को चलाया जा रहा है। पिछली सरकारों के कुल भुगतान से 60000 करोड़ से अधिक है।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।
पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


