
UP Floods: वाराणसी-प्रयागराज-आगरा को बाढ़ से राहत, गंगा और यमुना का जलस्तर हर घंटे हो रहा कम
यूपी के वाराणसी, प्रयागराज और आगरा में गुरुवार दोपहर से गंगा और यमुना के जलस्तर में प्रतिघंटे का घटाव शुरू हो गया। जलस्तर स्थिर होने पर तटवर्ती इलाकों के लोग भयभीत थे। घटाव शुरू होने पर उन्होंने राहत की सांस ली।
यूपी के वाराणसी में करीब 24 घंटे स्थिर रहने के बाद गुरुवार दोपहर से गंगा में आधा सेमी प्रतिघंटे का घटाव शुरू हो गया। जलस्तर स्थिर होने पर तटवर्ती इलाकों के लोग भयभीत थे। घटाव शुरू होने पर उन्होंने राहत की सांस ली। राजघाट गेज पर रात 10 बजे बहाव 70.79 मीटर पर था।
बाढ़ के कारण मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार के लिए शवों का नावों से लेकर जाना पड़ा, जबकि हरिश्चंद्र घाट पर गलियों में शवदाह हुआ। दशाश्वमेध, शीतला, राजेंद्र प्रसाद सहित आसपास के घाटों पर तर्पण करने के लिए सड़कों और गलियों में बैठना पड़ा रहा है। अस्सी घाट पर भी यह पीड़ा दिखी। वरुणा किनारे कोनिया से लेकर ढेलवरिया और लोहता के तटवर्ती इलाकों में भी संकट बना हुआ है।
यमुना का जलस्तर 31 सेमी और गिरा, लोगाें को मिलने लगी राहत
आगरा और मथुरा में यमुना जलस्तर में हो रही निरंतर गिरावट के बाद बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के वाशिंदों के लिए गुरुवार का दिन थोड़ी राहत और लेकर आया। गुरुवार रात आठ बजे तक यमुना का जलस्तर गिरकर 166.65 मीटर पर पहुंच गया, जो अभी भी खतरे के निशान से 67 सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर में पिछले 20 घंटे में 31 सेंटीमीटर की गिरावट और दर्ज की गयी।
यमुना के जलस्तर में हो रही गिरावट के बाद अभी भी जयसिंहपुरा खादर और वृंदावन के खादर वाले क्षेत्रों के वाशिंदों को धीरे-धीरे बाढ़ से तो राहत मिल रही है। मथुरा में यमुना का जलस्तर 167.67 मीटर के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद लगातार तीसरे दिन भी गुरुवार को यमुना के जलस्तर में राहत देने वाली गिरावट दर्ज की गयी। बीती रात एक बजे यमुना का जलस्तर 166.96 मीटर पर था, जो गुरुवार रात आठ बजे 166.65 मीटर तक गिर गया। इस गिरावट के बाद यमुना में डूबी घाटों की सीढ़ियां भी बाढ़ मुक्त होनी शुरु हो गयी हैं।
उधर, गुरुवार को गोकुल बैराज से डिस्चार्ज कम होकर 1.18 लाख क्यूसेक कर दिया है। दूसरी ओर ओखला बैराज से डिस्चार्ज 42 हजार 600 हजार क्यूसेक तथा ताजेवाला के हथिनी कुंड बांध से 24 हजार क्यूसेक डिस्चार्ज हो रहा है। जनपद में आई बाढ़ से 58 गांव प्रभावित हुए हैं, जिनमें 33 गांव की आबादी तथा 25 गांवों की फसल प्रभावित हुई है। तीन गांवों में बाढ़ से कटान हुआ है।
बूंद-बूंद कम होते जलस्तर ने बढ़ाई लोगों की चिंता
प्रयागराज में भी गंगा-यमुना के जलस्तर में कमी गुरुवार को जारी रही लेकिन पूरे दिन में महज तीन सेंटीमीटर जलस्तर कम होने से बाढ़ पीड़ितों की चिंता बनी हुई है। अनुमान यही लगाया जा रहा है कि जलस्तर एक बार फिर रफ्तार पकड़ेगा। जिले में अफसरों की नजर टोंस पर टिकी है। अफसरों का कहना है कि इटावा में यमुना का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर है और डलमऊ में गंगा का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में अभी दो से तीन दिन में एक बार फिर जलस्तर बढ़ने की उम्मीद है।
सुबह आठ बजे की बात की जाए तो नैनी में यमुना का जलस्तर 83.84 मीटर रिकार्ड किया गया। जो कि पिछले 24 घंटों के मुकाबले महज छह सेंटीमीटर कम हुआ था। वहीं फाफामऊ में गुरुवार सुबह 24 घंटे के मुकाबले चार सेंटीमीटर कम हुआ, यहां जलस्तर 84.09 रिकार्ड किया गया। वहीं नैनी में आठ सेंटीमीटर की कमी रिकार्ड हुई। रात आठ बजे नैनी में 12 घंटे के मुकाबले में महज पांच सेंटीमीटर की कमी रिकार्ड की गई। जबकि फाफामऊ में तीन सेंटीमीटर और नैनी में दो सेंटीमीटर की कमी रिकार्ड की गई। एडीएम वित्त एवं राजस्व विनीता सिंह का कहना है कि अभी और पानी आने की उम्मीद है। यह पानी बारिश का है। जो दो से तीन दिन में यहां आ सकता है।





