UP Floods: यूपी के इस शहर में हर घंटे एक सेमी बढ़ रही गंगा, कई इलाके डूबने का खतरा
UP Floods: यूपी के कानपुर स्थित बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण हर घंटे गंगा एक सेमी बढ़ रही है। इससे कई इलाके डूबने का खतरा मंडरा रहा है। हालांकि अभी बाढ़ का अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

कानपुर बैराज से सोमवार को छोड़े गए डेढ़ लाख क्यूसेक पानी के प्रयागराज पहुंचने से पहले ही गंगा का जलस्तर हर घंटे एक सेमी बढ़ने लगा है। फाफामऊ में लगातार गंगा बढ़ रही हैं। हालांकि नैनी में यमुना के स्थिर होने से छतनाग में गंगा की बढ़ोतरी रुक गई। कानपुर बैराज से मंगलवार सुबह गंगा में करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। सिंचाई विभाग के
अधिकारियों के अनुसार, सोमवार को बैराज से छोड़े गए एक लाख छह हजार क्यूसेक पानी का प्रभाव बुधवार को गंगा के कछारी क्षेत्र में देखने को मिल सकता है। बैराज का पानी पहुंचने के बाद गंगा के जलस्तर में और तेजी से वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही फाफामऊ, सलोरी और बघाड़ा के कछारी क्षेत्र डूबने का खतरा मंडराने लगा है। हालांकि अभी बाढ़ का कोई खतरा नहीं है, फिर भी गंगा के कछारी इलाकों में खेती करने वाले किसानों और अस्थायी रूप से रहने वाले परिवारों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
प्रशासन भी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। नैनी में यमुना का जलस्तर स्थिर हो गया है, लेकिन पिछले दिनों हुई बढ़ोतरी से अरैल घाट पूरी तरह जलमग्न हो चुका है। जलस्तर बढ़ने के साथ गंगा का प्रवाह तेज हुआ है। रात आठ बजे फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 77.95 मीटर, छतनाग में गंगा 74.27 मीटर और नैनी में यमुना 74.66 मीटर पर स्थिर थीं।
झांसी के बाद सबसे गर्म रहा प्रयागराज
मानसूनी बारिश रुकने के बाद गर्मी और उमस से परेशानी बढ़ गयी है। दिन व रात का तापमान बढ़ने से कूलर, पंखे भी बेअसर होने लगे हैं। मंगलवार को अधिकतम तापमान 36.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। जबकि सोमवार को अधिकतम तापमान 35.6 डिग्री सेल्सियस था। यानी एक दिन में 0.9 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान में कमी दर्ज की गयी। प्रदेश में झांसी के बाद प्रयागराज का सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान रहा। झांसी का अधिकतम तापामन 36.6 डिग्री सेल्सियस था। मंगलवार दोपहर कुछ इलाकों में बारिश हुई।
अलनीनो का असर दिखा न ला नीना का
अल नीनो का असर दिखा और न ही ला नीना का। यह दोनों ही समुद्री घटनाएं हैं जो देश में मौसम को प्रभावित करती हैं। खासतौर से बारिश के सीजन में इनके प्रभाव का व्यापक असर पड़ता है। फिलहाल देश और विशेषकर यूपी में बारिश सामान्य है। जुलाई में यह सामान्य के नजदीक या कहीं-कहीं अधिक बनी हुई है। अल नीनो प्रभाव के कारण बारिश कम मानी जाती है और ला नीना के कारण अधिक होती है। इस सीजन में न तो कम बारिश हुई है और न ही ज्यादा। इसे सामान्य बारिश माना जा सकता है। पूर्वानुमान यह था कि अल नीनो का असर पड़ेगा और औसत से बहुत कम बारिश होगी पर ऐसा हुआ नहीं।


