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पंकज ऐसे बने यूपी भाजपा के नये चौधरी, अंतिम समय में सभी को पछाड़कर निकले आगे

पंकज ऐसे बने यूपी भाजपा के नये चौधरी, अंतिम समय में सभी को पछाड़कर निकले आगे

संक्षेप:

यूपी भाजपा अध्यक्ष के लिए कई नामों के साथ ही हवा में बहुत तेजी से कैबिनेट मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह का नाम तैरा, लेकिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने सबको चौंकाने की परंपरा को टूटने नहीं दिया। अंतिम समय पर केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी का नाम सबको पीछे छोड़ते हुए सबसे आगे आ गया।

Dec 14, 2025 06:45 am ISTYogesh Yadav राजकुमार शर्मा, लखनऊ
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महराजगंज के सांसद पंकज चौधरी यूपी भाजपा के नये चौधरी बन गए हैं। ऐलान की औपचारिकता बस शेष है। उनकी नियुक्ति के निहितार्थ देखें, तो कारण 2022 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे हैं। वर्ष 2017 व 2019 में भाजपा का साथ देने वाली कुर्मी बिरादरी ने छिटकना शुरू कर दिया था। भाजपा के गैर यादव ओबीसी एजेंडे में कुर्मी और लोध ही सबसे प्रमुख बिरादरियां हैं। लोध लगातार भगवा थामे हैं, लेकिन कुर्मी बिरादरी के छिटकने से संघ और भाजपा की बेचैनी बढ़ गई थी। इसी के चलते पंकज यूपी के नए चौधरी चुने गए, जिससे इस बिरादरी को पार्टी के साथ रोके रखा जा सके।

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प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को लेकर फैसला होने में काफी देर लगी। इसके पीछे नेतृत्व की व्यस्तता के साथ ही मैराथन मंथन भी रहा। दरअसल आरएसएस भी प्रदेश अध्यक्ष किसी कुर्मी को बनाने पर जोर दे रहा था। खासतौर से पूर्वांचल में कुर्मी वोट बैंक खिसकने का हवाला दिया गया। संघ और भाजपा की कई बैठकों में यह विषय उठा। सारी चर्चा धीरे-धीरे कुर्मी पर केंद्रित होती गई, हालांकि भाजपा नेतृत्व लोध विकल्प भी लेकर चल रहा था। इसी के चलते धर्मपाल सिंह और बीएल वर्मा के नाम चर्चा में रहे। अंतत: कुर्मी चेहरे पर ही दांव लगाने का फैसला हुआ। हवा में बहुत तेजी से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व कैबिनेट मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह का नाम तैरा, लेकिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने सबको चौंकाने की परंपरा को टूटने नहीं दिया। अंतिम समय पर केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी का नाम सबको पीछे छोड़ते हुए सबसे आगे आ गया।

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शाह से मुलाकात में लगी नई भूमिका पर मुहर

पंकज चौधरी ने दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से तीन दिन पहले मुलाकात की थी। इसी भेंट में ही उन्हें उनकी नई भूमिका की जानकारी दी गई। इसके बाद गुरुवार को अचानक पंकज का नाम बहुत तेजी से प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में शामिल हुआ और शुक्रवार की शाम होते-होते तस्वीर साफ हो गई। चौधरी दिल्ली में ही थे, मगर यूपी से उनके पास पहुंचने वाले बधाई संदेशों की संख्या लगातार बढ़ती गई। अमौसी हवाई अड्डे पर शनिवार को जब वे उतरे तो नए अध्यक्ष के तौर पर उनका स्वागत हुआ। हालांकि अंतिम समय तक वे बेहद सधी हुई प्रतिक्रिया ही देते रहे। पंकज चौधरी को पार्टी नेतृत्व का करीबी माना जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दो साल पूर्व गोरखपुर यात्रा के दौरान बिना कार्यक्रम उनके घर जा पहुंचे थे। चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनने से गोरखपुर मंडल का दबदबा बढ़ गया है।

160 से अधिक सीटों पर कुर्मी वोटों का प्रभाव

कुर्मी वोट बैंक की बात करें इनकी आबादी यादवों के बाद अच्छी-खासी है। प्रदेश की करीब 165 विधानसभा सीटों पर इस बिरादरी का वोट है और 55 से 60 सीटों पर इस बिरादरी का वोट बैंक 25 से 30 फीसदी तक है। इनमें तमाम सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। भाजपा के कुर्मी नेताओं का तो यह भी आरोप है कि कुर्मी वोटों में बिखराव के लिए उनके बाहुल्य वाली सीटों को जानबूझकर सपा ने रिजर्व कराया। जहां तक कुर्मी बेल्ट का सवाल है तो यह राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी, सीतापुर, लखीमपुर, फतेहपुर, कानपुर देहात, कानपुर, उरई, जालौन, फर्रुखाबाद, हमीरपुर, बांदा, बरेली, कन्नौज, मिर्जापुर, सोनभद्र सहित पूर्वांचल की तमाम सीटों पर है।

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कुर्मी वोट बैंक सरकने से चौकन्नी हुई भाजपा

वर्ष 2017 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग में कुर्मी भी प्रमुखता से शामिल रहे। मगर 2022 के विधानसभा चुनाव में इस बिरादरी का छिटकाव शुरू हो गया। तकरीबन 40 से 50 फीसदी वोट भाजपा से छिटक गया, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में कुर्मियों ने भाजपा से काफी हद तक किनारा कर लिया। बांदा सीट पर तो कुर्मियों ने भाजपा की जगह सपा के कुर्मी चेहरे को चुना। कुर्मी केंद्रित सियासत करने वाले अपना दल (एस) के साथ का भी भाजपा को कोई खासा लाभ नहीं मिल सका, न ही भाजपा के कुर्मी क्षत्रप अपनी बिरादरी का छिटकाव रोक पाए।

भाजपा ने बाहर से आए राकेश सचान को विधायक और कैबिनेट मंत्री बनाया। राजेश वर्मा को लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बनाया। संतोष गंगवार को झारखंड का राज्यपाल बनाया। रेखा वर्मा भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। 2024 में यूपी से कुल 11 कुर्मी सांसद बने। इनमें से सात सपा, तीन भाजपा और एक अपना दल एस से हैं। चौकन्नी भाजपा ने अब पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर नये चेहरे पर दांव लगाने का प्रयोग किया है। पंकज चौधरी सात बार के सांसद हैं। अब उनके सामने पूरे प्रदेश में अपनी बिरादरी के वोट बैंक को सहेजने की चुनौती है।