
नशीले दवा की बिक्री केस में खुलासा, लाइसेंस लेकर बेचा केवल कफ सिरप, संचालक फरार
कोडिनयुक्त कफ सिरप की खरीद-बिक्री के मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि यूपी के आजमगढ़ में जेठारी निवासी बिपेंद्र सिंह ने थोक दवाओं की बिक्री का लाइसेंस लेने के बाद सिर्फ कोडिनयुक्त कफ सिरप की ही खरीद-बिक्री की।
कोडिनयुक्त कफ सिरप की खरीद-बिक्री के मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि यूपी के आजमगढ़ में जेठारी निवासी बिपेंद्र सिंह ने थोक दवाओं की बिक्री का लाइसेंस लेने के बाद सिर्फ कोडिनयुक्त कफ सिरप की ही खरीद-बिक्री की। उसने फर्म के नाम पर बनगांव मार्टीनगंज में मनोज पांडेय का मकान किराये पर लिया और सिर्फ एएस फार्मा का बोर्ड लगाकर छोड़ दिया। उधर, पुलिस के साथ ही एसटीएफ ने इस मामले में नरवे निवासी विकास सिंह की तलाश में क्षेत्र में डेरा डाल दिया है। वह घर छोड़कर भूमिगत हो गया है।
बिपेंद्र की भी तलाश की जा रही है। गुरुवार की रात दीदारगंज पुलिस जेठारी गांव में बिपेंद्र के घर पहुंची तो ताला बंद था। परिवार के लोग घर छोड़कर फरार हैं। आजमगढ़ से बिपेंद्र ने सिर्फ दो फर्मों से सिरप की खरीद की थी। विपेंद्र सिंह पर प्रयागराज, मऊ, जौनपुर और आज़मगढ़ जिलों में कुल 12 मुकदमे दर्ज हैं। वह दीदारगंज थाने का हिस्ट्रीशीटर भी है। उसका नाम मार्टीनगंज पुलिस चौकी पर अंकित सूची में भी दर्ज है।
बिपेंद्र ने आजमगढ़ की दो, बस्ती की तीन और जौनपुर की एक फर्म से कोडीनयुक्त सिरप की तीन लाख, 28 हजार शीशियां खरीदी थीं। ड्रग विभाग की टीम 28 नवंबर को जांच करने पहुंची तो उसकी फर्म फर्म बंद मिली। पूछताछ में मकान मालिक ने बताया कि सालभर पहले ही उसने फर्म बंद कर थी।
गाजीपुर और भदोही के फर्म संचालक भी गायब
गाजीपुर और भदोही की दो बोगस (फर्जी) फर्मों ने भी शहर के रैदोपुर स्थित दो प्रतिष्ठानों से सिरप खरीदे थे। उनके संचालकों के बारे में भी कोई जानकारी नहीं मिल रही है। दोनों जिलों के ड्रग विभाग के अफसर उनके बारे में जानकारी जुटा रहे हैं, लेकिन कुछ सुराग नहीं मिल पा रहा है। दोनों फर्मों की तरफ से खरीद-बिकी का रिकार्ड नहीं दिया जा रहा है। इधर, कोडिनयुक्त कफ सिरप बेचने वाली शहर की दो एजेंसियों की लगातार छानबीन की जा रही है।





