रामनगरी में रामायण टीका की 200 वर्ष पुरानी पांडुलिपि मिली, किया जाएगा संरक्षण
अयोध्या राम मंदिर के दूसरे तल पर रामायण की प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण व संग्रहण की योजना के अन्तर्गत अब दूसरी पांडुलिपि भी शीघ्र राम मंदिर की शोभा बढ़ाएगी। यह पांडुलिपि अयोध्या जनपद में ही सुलभ हुई है।

अयोध्या राम मंदिर के दूसरे तल पर रामायण की प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण व संग्रहण की योजना के अन्तर्गत अब दूसरी पांडुलिपि भी शीघ्र राम मंदिर की शोभा बढ़ाएगी। यह पांडुलिपि अयोध्या जनपद में ही सुलभ हुई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से प्राचीन पांडुलिपियों के संग्रहकर्ताओं के लिए देश के सभी राज्यों अलग-अलग समाचार माध्यमों में विज्ञापन प्रकाशित कराया था।
इसी विज्ञापन के माध्यम से अयोध्या जनपद के निवासी जगजीत सिंह ने अन्तर्राष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के निदेशक डा. संजीब कुमार सिंह से सम्पर्क साधा और जानकारी दी कि उनके दादा ने रामायण की प्राचीन पांडुलिपि भेंट की थी जिसे वह श्रद्धापूर्वक पूजन स्थल पर रखकर पूजा करते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि इसका संरक्षण राम मंदिर में हो। रामकथा संग्रहालय के निदेशक डा. सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि पुरातात्विक दृष्टि से देखें तो यह पांडुलिपि करीब दो सौ साल पुरानी नजर आती है। उन्होंने बताया कि प्रथम दृष्टया इसकी लिपि नागरी लिपि जो देवनागरी कहलाती है।
उन्होंने बताया कि फिलहाल इस कृति का परीक्षण निर्धारित कमेटी के विशेषज्ञ करेंगे। उनके परीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर पांडुलिपि को स्वीकार किया जाएगा। बताया गया कि यह दुर्लभ पांडुलिपि देवनागरी लिपि में है और इसमें ‘तत्त्वदीपिका’ टीका सहित रामायण के पांच कांड शामिल हैं। कहा गया कि हस्त लिखित विशेष प्रकार के रसायन से तैयार स्याही से 400 पन्ने की यह पांडुलिपि देश की धरोहर बन सकेगी।
देश ही नहीं विदेशों में उपलब्ध है रामायण की प्राचीन पांडुलिपियां
रामकथा संग्रहालय के निदेशक डा संजीब सिंह का कहना है कि देश-विदेश से लगभग 80 से 90 लोगों ने अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय से संपर्क किया था और 8 से 10 लोगों ने पांडुलिपि की प्रति लेकर सम्पर्क भी किया था। बताया गया कि अभी भी पत्राचार कर रहे हैं। डा. सिंह का कहना है कि राम मंदिर में संग्रहालय का निर्माण नहीं होना है बल्कि यहां दुर्लभ कृतियों को संरक्षित किया जाना है, वह चाहे भी जिस भाषा में हो। निदेशक सिंह का कहना है कि जहां तक कृति लाने की बात है तो यहां एक ही कृति अभी तक लाई गयी है। उन्होंने बताया कि अभी लोगों ने अभिरुचि ली है और लोग अपने विश्वास के साथ आ भी रहे हैं।
कृतियों के परीक्षण के अलग-अलग विधाएं हैं
पुराविद् डा. संजीब सिंह कहते हैं कि प्राचीन पांडुलिपियों के काल निर्धारण के परीक्षण की अलग-अलग विधा है। पहले में कृति की भाषा और लिपि देखी जाती है कि यह लिपि किस काल में प्रचलित थी। दूसरी बात होती है इंक अथवा स्याही की, तीसरी बात है पेपर, और चौथी है कि लिखने का स्टाइल स्क्रिप्टोलॉजी कब की है। उर्दू में कितावत करने की प्रक्रिया कहते हैं। यह कैलीग्राफर यानि सुलेख लिखने वाले लोग के आधार पर निश्चित की जाती हैं। इसके आधार पर ही प्राप्त की आयु 200 से 175 साल होने का अनुमान है। देवनागरी लिपि में लिखी है। उसी आधार पर इसका भी परीक्षण होगा।
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Srishti Kunjसृष्टि कुंज एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में एक दशक से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। उन्होंने पंजाब केसरी ग्रुप के नवोदय टाइम्स और इंडिया न्यूज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ काम किया है, जहां उन्होंने नेशनल और दिल्ली डेस्क के लिए कंटेंट क्रिएशन और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग में अपनी स्किल्स को निखारा है। सृष्टि कुंज लाइव हिन्दुस्तान में लगभग 6 वर्षों से यूपी की टीम संग काम कर रही हैं। 2020 से वह हिन्दुस्तान डिजिटल के लिए उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बीटों से जुड़ीं खबरें लिखती हैं। सृष्टि ने अपनी स्कूलिंग के बाद एनिमेशन की पढ़ाई की और फिर बतौर एनिमेटर एक विदेशी गेम के लिए कैरेक्टर डिजाइनिंग की। इसके बाद सृष्टि ने मॉस कम्यूनिकेशन और जर्नलिजम में स्नातक की डिग्री हासिल की। एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय सृष्टि ने जर्नलिज्म एंड मास कॉम में डिग्री लेकर पंजाब केसरी ग्रुप के दिल्ली संस्करण नवोदय टाइम्स की डिजिटल टीम के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। 3 साल नवोदय टाइम्स से जुड़े रहने के बाद सृष्टि ने इंडिया न्यूज की डिजिटल टीम (इनखबर) की नेशनल डेस्क के साथ भी काम किया। 2020 से सृष्टि लाइव हिन्दुस्तान की डिजिटल टीम के साथ अब ट्रेंड्स के अनुसार पाठकों तक यूपी की हर खबर को पहुंचा रही हैं।
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