कॉलोनियों की बदलेगी सूरत, एक कॉल पर हल होंगी समस्याएं; 65 से अधिक जिलों के लिए नई व्यवस्था
यूपी के आवास विकास की कॉलोनियों की सूरत बदलेगी। एक कॉल पर शिकायत दर्ज होगी और तय समयसीमा में समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। यह नई व्यवस्था 65 से अधिक जिलों में लागू होंगी।

उत्तर प्रदेश में आवास विकास कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। अब उत्तर प्रदेश की आवास विकास परिषद की कॉलोनियों में अव्यवस्था और लापरवाही की गुंजाइश खत्म होने जा रही है। उत्तर प्रदेश के 65 से अधिक जिलों में नई व्यवस्था लागू की जाएगी। आवास विकास परिषद अपनी उन आवासीय योजनाओं के लिए विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार कर रहा है, जो अभी नगर निगम को हैंडओवर नहीं की गई हैं। मकसद है कि यह कॉलोनियां ऐसी दिखें कि लोग पहचान जाएं, यह आवास विकास की कॉलोनी है।
आवास विकास परिषद की नई व्यवस्था के तहत साफ-सफाई, जलापूर्ति, मार्ग प्रकाश, पार्कों का रखरखाव, बच्चों के खेलने के स्थान, सड़कों की मरम्मत और कूड़ा प्रबंधन को एक व्यवस्थित ढांचे में लाया जाएगा। कॉलोनियां चकाचक होंगी। नई व्यवस्था कॉलोनियों की सूरत बदल जाएंगी। सबसे बड़ी राहत यह होगी कि एक कॉल पर शिकायत दर्ज होगी और तय समयसीमा में समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। जल्द ही नंबर जारी किया जाएगा।
घर-घर से उठेगा कूड़ा, सफाई में नहीं चलेगी ढिलाई
एसओपी के तहत डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन अनिवार्य होगा। आवास विकास की कॉलोनियों से हर घर से रोजाना कूड़ा उठाया जाएगा और कूड़ा निस्तारण की जवाबदेही तय होगी। कॉलोनियों में नियमित सफाई, नालियों की देखरेख और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने के लिए चेकलिस्ट आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली लागू की जाएगी। इसमें किसी तरह से लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
देश-प्रदेश की अच्छी निजी टाउनशिप मॉडल का होगा अध्ययन
उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद निजी टाउनशिप में अपनाई जा रही आधुनिक अनुरक्षण प्रणालियों का भी अध्ययन करेगी। लक्ष्य है कि स्पष्ट जिम्मेदारी तय हो, नियमित निरीक्षण हो और किसी भी स्तर पर लापरवाही न होने पाए। अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के दायित्व निर्धारित किए जाएंगे, ताकि जवाबदेही तय रहे, जिससे लापरवाही करने वालों के खिलाफ ऐक्शन लिया जा सके। परियोजनाओं में आवास विकास परिषद किसी भी तरह से लापरवाही होने ही देना चाहता है।
25 परियोजनाओं में जल्द दिखेगा असर
यह व्यवस्था प्रदेश के 65 से अधिक जिलों में लागू होगी। फिलहाल 25 ऐसी परियोजनाएं चिन्हित की गई हैं, जिन्हें अभी नगर निगम को हस्तांतरित नहीं किया गया है। इन्हीं में सबसे पहले यह अनुरक्षण मॉडल लागू होगा। उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद का मानना है कि बेहतर रखरखाव से न केवल कॉलोनियों की सूरत बदलेगी, बल्कि संपत्ति का मूल्य भी बढ़ेगा और लोगों का भरोसा मजबूत होगा। बेहतर व्यवस्था मिलने के बाद आवास विकास की इन कॉलोनियों में रहना प्रसंद करेंगे।
लेखक के बारे में
Deep Pandeyदीप नरायन पांडेय लाइव हिन्दुस्तान में पिछले आठ सालों से यूपी की खबरें करते हैं। डिजिटल, टीवी और प्रिंट जर्नलिज्म में 15 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दीप नरायन पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं। दीप अब डिजिटल मीडिया के जाने माने नाम बन गए हैं। दीप हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को बेहतर समझते हैं। यूपी की राजनीति के साथ क्राइम की खबरों पर अच्छी पकड़ है। सामाजिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और हेल्थ पर भी लिखते हैं। दीप पाठकों की पसंद को समझने और उसी तरह से न्पूज प्रस्तुत करने में माहिर हैं। दीप सरल भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाते हैं। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने-लिखने में भी रुचि रखते हैं। मास कम्युनिकेशन में बीए और एमए दीप नरायन पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा के रहने वाले हैं। दीप ने पत्रकारिता की शुरुवात लखनऊ से की। टीवी चैनल से करियर का आगाज करने वाले दीप इसके बाद प्रिंट अमर उजाला लखनऊ में भी रहे। हिन्दुस्तान प्रिंट में वाराणसी, गोरखपुर, फिर लखनऊ में कार्य के दौरान विभिन्न जिलों के डेस्क इंचार्ज रहे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव 2012, 2017, 2022, लोकसभा चुनाव, पंचायत चुनावों के दौरान बेहतर कवरेज कर चुके हैं।
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