इंफ्लुएंसर असहाब अंसारी की यूं चमकी किस्मत, बने IT अफसर, पहले न इनकम थी न टैक्स
Ashab Ahmed Ansari Story: ‘बेरोजगारी' पर कॉमेडी करने वाले इंफ्लुएंसर असहाब अंसारी की किस्मत कुछ यूं चमकी। अब वे इनटैक्स में ऑफिस में अधीक्षक के पद पर नियुक्त हो चुके हैं। उनकी यह उपलब्धि केवल उनके परिवार और लाखों युवाओं के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बना है।

Ashab Ahmed Ansari Story: कहते हैं कि सच्ची लगन और अटूट संघर्ष के आगे एक दिन मंजिल जरूर झुकती है। अंबेडकरनगर जिले के टांडा कस्बे के रहने वाले असहाब अहमद अंसारी ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। यह कहानी केवल एक परीक्षा पास करने की नहीं है बल्कि यह उस जिद की कहानी है जो हर ठोकर के बाद और मजबूत होती गई। करीब नौ साल की कठिन तपस्या, बार-बार असफलता की चोट और हर बार नए जोश के साथ उठकर खड़े होने के बाद असहाब ने आखिरकार कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा 2025(SSC CGL 2025) में सफलता हासिल कर ली है। अब वे इनटैक्स में ऑफिस में अधीक्षक के पद पर नियुक्त हो चुके हैं। उनकी यह उपलब्धि केवल उनके परिवार और टांडा कस्बे के लिए नहीं बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है जो रोज असफलता से लड़ते हुए अपने सपनों को जिंदा रखने की कोशिश करते हैं। एजुकेशनल कॉमेडी से बेरोजगारी और परीक्षा व्यवस्था पर तीखे-मजेदार तीर चलाने वाले असहाब की किस्मत कुछ यूं चमकी। पहले न इनकम थी न टैक्स।
टांडा से कोटा और अलीगढ़ तक का सफर
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, असहाब की शुरुआती पढ़ाई अंबेडकरनगर जिले में टांडा के आदर्श जनता इंटर कॉलेज से हुई जहां से उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं पास कीं। इंजीनियरिंग का सपना लेकर वे राजस्थान के कोटा पहुंचे, जहां देश के लाखों होनहार छात्र अपने सपनों को पंख देने आते हैं। कोटा की कठिन दिनचर्या और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और कड़ी मेहनत के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से यांत्रिक अभियांत्रिकी में स्नातक की डिग्री हासिल की। यह डिग्री उनके लिए केवल एक प्रमाणपत्र नहीं थी बल्कि उनके परिश्रम और लगन का प्रमाण था। इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद असहाब ने एक बड़ा फैसला किया। उनका लक्ष्य संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर आईएएस बनना था जिसके लिए वे दिल्ली के मुखर्जी नगर पहुंचे।
आधे अंक ने तोड़ा दिल लेकिन नहीं तोड़ा हौसला
दिल्ली में तैयारी के दौरान असहाब ने संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा भी देनी शुरू की क्योंकि गणित और अंग्रेजी पर उनकी पकड़ अच्छी थी और यह परीक्षा उनकी योग्यता के अनुकूल थी। उन्होंने 2018 में परीक्षा दी और महीनों की प्रतीक्षा के बाद जब 2021 में परिणाम आया तो पूरी मेहनत पर एक पल में पानी फिर गया। चयन सूची में नाम आने से मात्र आधे अंक पीछे रह जाना किसी के भी हौसले को चकनाचूर कर देने के लिए काफी था। यह वह पल था जब असहाब के सामने पूरा आसमान जैसे ढह गया हो। वे मानसिक रूप से बुरी तरह टूट गए, रातों की नींद उड़ गई और भविष्य अंधकारमय लगने लगा। लेकिन इस घोर निराशा के बीच भी उनके भीतर कहीं एक चिंगारी जलती रही जिसने उन्हें हार मानने से रोके रखा। उन्होंने खुद से वादा किया कि वे दोबारा उठेंगे और इस बार और मजबूती के साथ।
कोरोना के कठिन दौर में मिली नई राह
इसी मानसिक संघर्ष के दौर में कोरोना महामारी की दूसरी और भयावह लहर ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। चारों तरफ अनिश्चितता और भय का माहौल था। असहाब भी दिल्ली छोड़कर अपने घर टांडा लौट आए। घर में बंद रहना, पढ़ाई का दबाव और भविष्य की चिंता ने उन्हें भीतर से बेचैन कर दिया था। इस मानसिक तनाव से बाहर निकलने का रास्ता उन्हें एक अनोखे जरिए से मिला। उन्होंने सामाजिक माध्यमों पर वीडियो बनाना शुरू किया। बेरोजगारी की पीड़ा, प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव, किराए के कमरों की तंगी और छात्रों की रोजमर्रा की परेशानियों को उन्होंने हास्य के माध्यम से इस तरह पेश किया कि लोग अपनी ही कहानी उसमें देखने लगे। देखते ही देखते उनके वीडियो लाखों युवाओं तक पहुंचने लगे और वे सामाजिक माध्यमों पर एक जाना पहचाना और चहेता चेहरा बन गए।
अनुशासन रहा सफलता की असली चाबी
असहाब बताते हैं कि जब चारों तरफ से वाहवाही और लोकप्रियता मिलने लगी तब भी उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं भुलाया। उन्होंने सामाजिक माध्यमों को कभी मनोरंजन या समय बर्बाद करने का साधन नहीं बनने दिया। वीडियो बनाना उनके लिए एक व्यावसायिक काम था जिसके लिए वे एक निश्चित समय देते थे और उसके बाद बाकी का पूरा समय पूरी तरह पढ़ाई को समर्पित कर देते थे। न रात को देर तक स्क्रॉल करना और न सुबह उठकर फोन देखना, उनकी दिनचर्या पूरी तरह अनुशासित थी। यही अनुशासन और एकाग्रता उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी। जहां लाखों युवा सामाजिक माध्यमों की चमक में खो जाते हैं और अपना कीमती समय बर्बाद कर लेते हैं वहीं असहाब ने इसी मंच को अपनी पहचान और अपनी ताकत दोनों बना लिया।
एक अंक से फिर चूके फिर भी नहीं माने हार
संघर्ष की यह कहानी यहीं खत्म नहीं हुई बल्कि नियति ने एक बार फिर उनकी परीक्षा लेनी चाही। संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा 2025 में भी शुरुआती परिणाम में उनका चयन नहीं हुआ क्योंकि वे न्यूनतम अंक सीमा से महज एक अंक पीछे थे। यह उसी पुराने दर्द की याद दिलाने वाला पल था जब आधे अंक ने उनका सपना छीन लिया था। इस बार भी वही टीस, वही बेचैनी और वही सवाल कि आखिर कब तक। लेकिन असहाब ने इस बार भी हार नहीं मानी और धैर्य के साथ प्रतीक्षा करते रहे। उनका यह धैर्य रंग लाया। जब संशोधित परिणाम जारी हुआ और न्यूनतम अंक सीमा में कमी आई तो आखिरकार उनका नाम चयन सूची में आ गया। नौ साल का लंबा और थका देने वाला इंतजार खत्म हुआ, आंखें नम हुईं और मेहनत ने आखिरकार रंग दिखा दिया।
पहले न आमदनी थी न कर अब दोनों आ गए
सफलता मिलने के बाद जब लोगों ने उनसे इस खुशी के बारे में पूछा तो असहाब ने अपने चिरपरिचित मजाकिया अंदाज में कहा कि पहले जिंदगी में न आमदनी थी और न कर लेकिन अब दोनों एक साथ आ गए हैं क्योंकि वे आयकर विभाग में पहुंच चुके हैं। यह एक छोटी सी पंक्ति उनके पूरे नौ साल के संघर्ष, उनके अटूट हास्यबोध और उनकी जीवन के प्रति सकारात्मक सोच की गहरी झलक देती है। जो इंसान इतने कठिन दौर में भी हंसना और हंसाना नहीं भूला वही असल में जिंदगी का असली विजेता है।
लेखक के बारे में
Deep Pandeyदीप नरायन पांडेय लाइव हिन्दुस्तान में पिछले आठ सालों से यूपी की खबरें करते हैं। डिजिटल, टीवी और प्रिंट जर्नलिज्म में 15 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दीप नरायन पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं। दीप अब डिजिटल मीडिया के जाने माने नाम बन गए हैं। दीप हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को बेहतर समझते हैं। यूपी की राजनीति के साथ क्राइम की खबरों पर अच्छी पकड़ है। सामाजिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और हेल्थ पर भी लिखते हैं। दीप पाठकों की पसंद को समझने और उसी तरह से न्पूज प्रस्तुत करने में माहिर हैं। दीप सरल भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाते हैं। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने-लिखने में भी रुचि रखते हैं। मास कम्युनिकेशन में बीए और एमए दीप नरायन पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा के रहने वाले हैं। दीप ने पत्रकारिता की शुरुवात लखनऊ से की। टीवी चैनल से करियर का आगाज करने वाले दीप इसके बाद प्रिंट अमर उजाला लखनऊ में भी रहे। हिन्दुस्तान प्रिंट में वाराणसी, गोरखपुर, फिर लखनऊ में कार्य के दौरान विभिन्न जिलों के डेस्क इंचार्ज रहे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव 2012, 2017, 2022, लोकसभा चुनाव, पंचायत चुनावों के दौरान बेहतर कवरेज कर चुके हैं।
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