
इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बदलाव सर्जरी के बाद ट्रांसजेंडर के शैक्षिक दस्तावेज में हो लिंग परिवर्तन
यूपी में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में लिंग परिवर्तन कराने वाले के शैक्षिक अभिलेखों में उसका नाम और लिंग बदलने का आदेश दिया है। याची शरद रोशन सिंह की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने दिया है।
यूपी में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में लिंग परिवर्तन कराने वाले के शैक्षिक अभिलेखों में उसका नाम और लिंग बदलने का आदेश दिया है। याची शरद रोशन सिंह की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने दिया है। कोर्ट ने यूपी बोर्ड के बरेली क्षेत्रीय कार्यालय के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें याची के दस्तावेजों में नाम और लिंग परिवर्तन करने से मना कर दिया गया था। यह अस्वीकृति इस आधार पर दी गई थी कि संबंधित प्रावधानों और सरकारी आदेशों में शैक्षिक दस्तावेजों में विलंबित चरण में नाम सुधार की प्रक्रिया का प्रावधान नहीं है। कोर्ट ने इस आदेश को गैरकानूनी माना है।

संबंधित जिला मजिस्ट्रेट ने, 2019 अधिनियम की धारा 6 के तहत, सर्जरी के बाद शरद के लिंग परिवर्तन को आधिकारिक रूप से मान्यता देते हुए, पहले ही एक पहचान प्रमाण पत्र जारी कर दिया था। याची को लिंग परिवर्तन सर्जरी (महिला से पुरुष) के बाद जिला मजिस्ट्रेट ने पहचान और जेंडर परिवर्तन प्रमाणपत्र जारी किया था। इसके बाद उन्होंने अपने शैक्षिक अभिलेखों में नाम और लिंग परिवर्तन के लिए क्षेत्रीय कार्यालय में आवेदन किया था। क्षेत्रीय सचिव ने 8 अप्रैल 2025 को उनके आवेदन को अस्वीकार कर दिया था।
अब अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 एक विशेष अधिनियम है। अधिनियम की धारा 20 में प्रावधान है कि इसके प्रावधान वर्तमान में लागू किसी भी अन्य कानून के अतिरिक्त होंगे, न कि उसके उल्लंघन में। इसलिए, संबंधित प्रतिवादियों (राज्य के शिक्षा अधिकारियों) ने याचिकाकर्ता के पक्ष में 2019 के अधिनियम के प्रावधानों को लागू न करके एक कानूनी त्रुटि की है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचआर मिश्रा और चित्रांगदा नारायण ने लिंग परिवर्तन के बाद अपना नाम बदलने के याचिकाकर्ता के अधिकार पर जोर देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के फैसलों का हवाला दिया।





