ट्रेन को देखकर खून खौलता है... ट्रेनों का ‘दुश्मन’ बना तालिब, पहले सिलेंडर अब फेंका पत्थर

वरिष्ठ संवाददाता, अलीगढ़
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अलीगढ़ में शताब्दी पर पत्थर फेंककर मारने से शीशा चटक गया। सीट पर एक महिला बैठी थीं जो सहम गईं। आरोपी को गिरफ्तार किया गया तो उसने बताया कि ट्रेन को देखकर खून खौल उठता है। सात माह पहले मालगोदाम के पास ट्रैक पर सिलेंडर फेंकने के मामले में जेल जा चुका है।

ट्रेन को देखकर खून खौलता है... ट्रेनों का ‘दुश्मन’ बना तालिब, पहले सिलेंडर अब फेंका पत्थर

कानपुर से नई दिल्ली जा रही शताब्दी एक्सप्रेस (12033) पर शनिवार सुबह अलीगढ़ स्टेशन से निकलते ही पथराव की सनसनीखेज वारदात सामने आई। ट्रेन के सी-8 कोच पर मालगोदाम के पास अज्ञात शरारतीतत्वों ने पत्थर मार दिया। पत्थर लगते ही कोच की खिड़की के शीशे की बाहरी लेयर टूट गई। जिस विंडो सीट पर पत्थर लगा, वहां एक महिला यात्री बैठी थी।

घटना के बाद सक्रिय हुई आरपीएफ ने 12 घंटे के अंदर घटना का खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार आरोपी नशेड़ी किस्म का है। उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, शताब्दी एक्सप्रेस सुबह 09:14 बजे अलीगढ़ जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर चार पर पहुंची। दो मिनट के ठहराव के बाद 09:16 बजे ट्रेन नई दिल्ली के लिए रवाना हुई। ट्रेन अभी मालगोदाम क्रॉसिंग के पास पहुंची ही थी कि 09:22 बजे अचानक तेज आवाज के साथ सी-08-09 कोच की खिड़की पर पत्थर आकर लगा। प्रत्यक्षदर्शी यात्रियों के अनुसार, पत्थर इतनी तेजी से लगा कि कोच में बैठे यात्री दहशत में आ गए।

पिता के कटने के बाद ट्रेनों का ‘दुश्मन’ बना तालिब

शताब्दी एक्सप्रेस पर पत्थर मारने वाले आरोपी को पकड़ने के बाद पुलिस ने उससे पूछताछ की तो चौंकाने वाली बातें सामने आई है। आरोपी भले ही नशेड़ी किस्म का है। लेकिन, उसने जब ये बताया कि उसके पिता की भी ट्रेन से कटकर मौत हुई थी। उसके बाद से वह ट्रेनों का दुश्मन बन गया। किसी भी ट्रेन को देखते ही उसका खून खौल उठता है। शनिवार को भी यही हुआ। वह ट्रैक के पास मौजूद था। तभी ट्रेन आई तो उसने पास में पड़ा पत्थर उठाकर पूरी ताकत से मारा और फरार हो गया। आरोपी सात माह पहले भी ट्रैक पर सिलेंडर फेंकने के मामले में जेल गया था।

दो दिन पहले हुई घटना के बाद फिर से शताब्दी पर पत्थर मारने की वारदात ने खलबली मचा दी थी। आरपीएफ की टीम सक्रिय हो गई और गोपनीय तरीके से जानकारी जुटाना शुरू कर दिया। आसपास के लोगों से पूछताछ की तो तालिब का सामने आया। पुलिस का रिकॉर्ड खंगाला तो पता चला कि तालिब पूर्व में भी इसी तरह के मामले में जेल भेजा गया था। इससे पुलिस का शक और गहरा गया। पुलिस ने बिना देरी किए उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी और उसे गिरफ्तार कर लिया। शुरुआत में आरोपी पुलिस को गुमराह करता रहा। बाद में उसने कबूला कि उसी ने ट्रेन पर पत्थर मारा था। बताया कि कई साल पहले उसके पिता की भी ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। तभी से ट्रेन को देखते ही वह बेकाबू हो जाता है। देररात उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा रहा था।

ट्रैक पर सिलेंडर फेंकने में भी गया था जेल

16 नवंबर की सुबह मालगोदाम के पास दिल्ली-हावड़ा ट्रैक के किनारे सिलेंडर मिला था। मामले में उत्तर मध्य रेलवे अलीगढ़ जंक्शन के वरिष्ठ खंड अभियंता रेलपथ मानव कुमार ने मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में भी पुलिस ने घटना का खुलासा करते हुए आरोपी तालिब को गिरफ्तार करके जेल भेजा था। तब उसने बताया था कि मालगोदाम के पास एक ट्रक से सिलेंडर चोरी किया था। उसे ले जाने के दौरान वह दोनों ट्रैक के बीच में था। दोनों ट्रैक पर ट्रेन आ गई तो वह हड़बड़ा गया और सिलेंडर को फेंककर भाग गया था।

इसी दौरान गिरने के चलते उसका दांत टूट गया था। चूंकि ये घटना दिल्ली धमाके के बाद हुई थी तो पुलिस के होश उड़ गए थे। एटीएस ने भी मौके पर पहुंचकर जांच की थी। आरपीएफ, सहायक सुरक्षा आयुक्त, गुलजार सिंह ने कहा कि अलीगढ़ स्टेशन से निकलते ही शताब्दी एक्सप्रेस का शीशा क्रैक होने की सूचना मिली थी। घटना मालगोदाम के पास हुई। आरोपी को चिह्नित करके गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है।

घटना से पहले लोगों ने घूमते देखा

ट्रेन में आरपीएफ की स्कॉर्ट मौजूद थी, जिन्होंने तत्काल ही पूरे रूट की पुलिस को अलर्ट कर दिया। हालांकि ट्रेन को रोकने की जरूरत नहीं पड़ी और वह अपने निर्धारित समय से ही अगले स्टेशन पर रुकी। मालगोदाम के पास ट्रैक किनारे झाड़ियों और खाली प्लॉट हैं। आशंका जताई गई कि किसी शरारती तत्व ने वहां से पत्थर फेंका है। आरपीएफ ने वहां के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। आसपास के लोगों से पूछताछ भी की गई तो पता चला कि क्वार्सी क्षेत्र के मौलाना आजाद नगर निवासी 22 वर्षीय तालिब पुत्र साकिर का नाम प्रकाश में आया। लोगों ने बताया कि आरोपी घटना से कुछ देर पहले वहां घूम रहा था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। कई घंटे की पूछताछ के बाद आरोपी ने अपना जुर्म कबूल लिया। हालांकि आरपीएफ ने जांच को पूरी तरह से गोपनीय रखा।

दो दिन पहले संघ प्रमुख की ट्रेन पर हुआ हमला

गौरतलब है कि दो दिन पहले 11 जून की रात को फिरोजाबाद में भी शताब्दी एक्सप्रेस पर पथराव हुआ था। उस ट्रेन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत लखनऊ से दिल्ली जा रहे थे। कोच का शीशा क्षतिग्रस्त हुआ था। पुलिस दो बाल अपचारियों को हिरासत में लेकर घटना का खुलासा किया है। लेकिन, लगातार हो रही पथराव की घटनाओं से रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

आरपीएफ प्रभारी निरीक्षक ने दिखाई सक्रियता

आरपीएफ प्रभारी निरीक्षक अजीत तिवारी ने शनिवार को ही कार्यभार संभाला था। शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन पर पत्थर फेंके जाने की सूचना मिलते ही सहायक सुरक्षा आयुक्त के नेतृत्व में प्रभारी निरीक्षक की टीम ने मामले की जांच शुरू कर दी। एसआई धीरज कुमार घटनास्थल पर पहुंच गए। इसके बाद मामले की गंभीरता के साथ जांच पड़ताल की। कुछ ही घंटों में घटना का खुलासा कर दिया गया।

अचानक पत्थर लगने से सहम गई महिला

महिला ने बताया, मैं खिड़की से बाहर देख रही थी। अचानक पत्थर लगा था। मैं डर के मारे सहम गई। यदि अंदर वाला शीशा भी टूटता तो पत्थर मुझे लगता। घटना की सूचना मिलते ही आरपीएफ टीम सक्रिय हो गई और छानबीन शुरू कर दी।

क्यों नहीं हुई काउंसिलिंग, सुरक्षा पर भी सवाल

गनीमत रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। लेकिन, फिर भी सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल है। कानपुर-दिल्ली रूट पर लगातार शताब्दी निशाने पर है। फिर भी पेट्रोलिंग क्यों नाकाम है? क्या सिर्फ वीवीआईपी मूवमेंट पर ही अलर्ट होता है। सीसीटीवी और इंटेलिजेंस क्यों फेल हो जाती है। जब आरोपी पहले भी इस तरह के मामले में जेल जा चुका है तो उस पर उसी तरह की निगरानी क्यों नहीं रखी गई। रेलवे हर बार कहता है कि जागरूकता अभियान चलाएंगे। लेकिन, सवाल है कि ट्रैक किनारे बस्तियों में कितने अभियान चले? लोगों को पथराव के खतरों के बारे में बताया गया? तालिब जैसे नशेड़ी को काउंसलिंग क्यों नहीं मिली?

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

रेलवे सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों के शीशे डबल लेयर वाले होते हैं। बाहरी लेयर टफन ग्लास की होती है, जो टूटने पर बिखरती नहीं। अंदरूनी लेयर यात्रियों की सुरक्षा करती है। इसी वजह से कोई जनहानि नहीं हुई। लेकिन लगातार पथराव गंभीर चिंता का विषय है।

Srishti Kunj

लेखक के बारे में

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सृष्टि कुंज एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में एक दशक से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। उन्होंने पंजाब केसरी ग्रुप के नवोदय टाइम्स और इंडिया न्यूज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ काम किया है, जहां उन्होंने नेशनल और दिल्ली डेस्क के लिए कंटेंट क्रिएशन और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग में अपनी स्किल्स को निखारा है। सृष्टि कुंज लाइव हिन्दुस्तान में लगभग 6 वर्षों से यूपी की टीम संग काम कर रही हैं। 2020 से वह हिन्दुस्तान डिजिटल के लिए उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बीटों से जुड़ीं खबरें लिखती हैं। सृष्टि ने अपनी स्कूलिंग के बाद एनिमेशन की पढ़ाई की और फिर बतौर एनिमेटर एक विदेशी गेम के लिए कैरेक्टर डिजाइनिंग की। इसके बाद सृष्टि ने मॉस कम्यूनिकेशन और जर्नलिजम में स्नातक की डिग्री हासिल की। एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय सृष्टि ने जर्नलिज्म एंड मास कॉम में डिग्री लेकर पंजाब केसरी ग्रुप के दिल्ली संस्करण नवोदय टाइम्स की डिजिटल टीम के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। 3 साल नवोदय टाइम्स से जुड़े रहने के बाद सृष्टि ने इंडिया न्यूज की डिजिटल टीम (इनखबर) की नेशनल डेस्क के साथ भी काम किया। 2020 से सृष्टि लाइव हिन्दुस्तान की डिजिटल टीम के साथ अब ट्रेंड्स के अनुसार पाठकों तक यूपी की हर खबर को पहुंचा रही हैं।

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