इंजीनियरिंग छात्र की खुदकुशी में चार साल बाद युवती सहित दो फंसे, लड़की के कारण हुई थी मारपीट
यूपी के आगरा में बीटेक छात्र धनंजय तिवारी की खुदकुशी के मामले में चार साल बाद नया मोड़ आया है। पुलिस ने खुदकुशी को दुष्प्रेरित करने के आरोप में जिन्हें क्लीनचिट दी थी कोर्ट ने उन्हें आरोपित मानते हुए तलब किया है। बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए पिछले चार साल से उसके पिता जंग लड़ रहे थे।

यूपी के आगरा में बीटेक छात्र धनंजय तिवारी की खुदकुशी के मामले में चार साल बाद नया मोड़ आया है। पुलिस ने खुदकुशी को दुष्प्रेरित करने के आरोप में जिन्हें क्लीनचिट दी थी कोर्ट ने उन्हें आरोपित मानते हुए तलब किया है। बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए पिछले चार साल से उसके पिता जंग लड़ रहे थे। पुलिस ने पहली चार्जशीट में सुसाइड नोट का उल्लेख तक नहीं किया था। मामूली मारपीट की धारा में चार्जशीट लगा दी थी। कई बार विवेचना हुई। विवेचक पुरानी चार्जशीट का समर्थन करते रहे। जब किसी ने न सुनी तो कोर्ट ने प्रगति आख्या मांगी।
आठ अप्रैल 2022 की रात बीटेक छात्र धनंजय तिवारी ने फांसी लगाकर खुदकुशी की थी। नौ अप्रैल की सुबह परिजनों को इसकी जानकारी हुई। परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। एक सुसाइड नोट मिला। जिसमें धनंजय ने अपनी मौत का जिम्मेदार मयंक शर्मा, संचित गुप्ता और मयंक के भाई को ठहराया। परिजनों को छानबीन में पता चला कि होली की दौज के दिन बेटे के साथ वजीरपुरा मार्ग पर मारपीट की गई थी। आरोपियों ने बेटे को बेल्ट से पीटा था। उससे चौथ में मोबाइल और 20 हजार रुपये भी मांगे थे।
मारपीट यशिका नाम की युवती के कारण हुई थी। पिता अनूप तिवारी ने चौथ वसूली व आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने की धारा के तहत मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने विवेचना की। पहली चार्जशीट में सिर्फ मयंक शर्मा के खिलाफ मारपीट की धारा के तहत चार्जशीट लगाई गई। धारा 306 का लोप कर दिया गया। पुलिस की कार्रवाई से परिजनों के होश उड़ गए। सवाल उठाए गए। कोर्ट ने अग्रिम विवेचना के आदेश दिए। वादी पक्ष ने तर्क दिया कि सुसाइड नोट की विधि विज्ञान प्रयोगशाला में जांच नहीं कराई गई। इस मामले में कोर्ट के आदेश पर दो बार अग्रिम विवेचना हुई। पुलिस ने हर बार अपनी पहली चार्जशीट का समर्थन किया। कोर्ट ने एसीपी को तलब किया।
विधिक राय और विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट के संबंध में प्रगति आख्या मांगी। विधिक राय वादी के समर्थन में थी। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में धनंजय के हस्तलेख का मिलान हुआ था। इसके बावजूद पुलिस इस मामले को एक तरफा प्यार का बताते हुए आरोपियों को बचा रही थी। कोर्ट ने प्रगति आख्या पर संज्ञान लिया। यशिका और मयंक शर्मा को खुदकुशी के लिए दुष्प्रेरित का आरोपित मानते हुए पांच मई को तलब किया है।
‘कोर्ट न होती तो आवाज कोई सुनने वाला नहीं था ’
धनंजय तिवारी के पिता अनूप तिवारी का कहना है कि कोर्ट न होती तो उनकी आवाज कोई सुनने वाला नहीं था। उन्हें खुद याद नहीं है कि पुलिस अधिकारियों के कितने चक्कर काटे। कितने विवेचकों से मिले। सभी से एक ही गुहार लगाई। उनके बेटे को इंसाफ दिला दीजिए। बेटे का चेहरा आज तक सोने नहीं देता। किसी ने नहीं सुनी। कोर्ट के आदेश पर पुलिस को मजबूरी में उन तथ्यों को उजागर करना पड़ा जिन्हें पहले दिन से नजरंदाज कर रही थी। कोर्ट में उनकी तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता समीर भटनागर ने पैरवी की।
कोर्ट में खुला पैन ड्राइव
पुलिस ने सभी साक्ष्य एक पैन ड्राइव में जुटाकर कोर्ट में सील बंद करके प्रस्तुत किए थे। सीजेएम मृत्युंजय श्रीवास्तव के निर्देश पर पैन ड्राइव खोला गया। उसे अभियोजन अधिकारी बृजमोहन सिंह कुशवाह और वादी के अधिवक्ता की उपस्थिति में चलवाया गया। पैन ड्राइव में मृतक द्वारा लिखे गए सुसाइड नोट की फोटो तथा व्हाट्सऐप चैट उपलब्ध थी। ऑडियो रिकॉर्डिंग भी थी। हस्तलेख लिखी डायरी में धनंजय ने यशिका और मयंक शर्मा को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया था।
लेखक के बारे में
Srishti Kunjसृष्टि कुंज एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में एक दशक से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। उन्होंने पंजाब केसरी ग्रुप के नवोदय टाइम्स और इंडिया न्यूज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ काम किया है, जहां उन्होंने नेशनल और दिल्ली डेस्क के लिए कंटेंट क्रिएशन और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग में अपनी स्किल्स को निखारा है। सृष्टि कुंज लाइव हिन्दुस्तान में लगभग 6 वर्षों से यूपी की टीम संग काम कर रही हैं। 2020 से वह हिन्दुस्तान डिजिटल के लिए उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बीटों से जुड़ीं खबरें लिखती हैं। सृष्टि ने अपनी स्कूलिंग के बाद एनिमेशन की पढ़ाई की और फिर बतौर एनिमेटर एक विदेशी गेम के लिए कैरेक्टर डिजाइनिंग की। इसके बाद सृष्टि ने मॉस कम्यूनिकेशन और जर्नलिजम में स्नातक की डिग्री हासिल की। एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय सृष्टि ने जर्नलिज्म एंड मास कॉम में डिग्री लेकर पंजाब केसरी ग्रुप के दिल्ली संस्करण नवोदय टाइम्स की डिजिटल टीम के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। 3 साल नवोदय टाइम्स से जुड़े रहने के बाद सृष्टि ने इंडिया न्यूज की डिजिटल टीम (इनखबर) की नेशनल डेस्क के साथ भी काम किया। 2020 से सृष्टि लाइव हिन्दुस्तान की डिजिटल टीम के साथ अब ट्रेंड्स के अनुसार पाठकों तक यूपी की हर खबर को पहुंचा रही हैं।
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