बेवजह टालमटोल न्याय के लिए खतरनाक, चेक बाउंस मामले में हस्तक्षेप से हाईकोर्ट का इनकार

Feb 26, 2026 08:23 pm ISTDinesh Rathour प्रयागराज, विधि संवाददाता
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में विलियम शेक्सपियर के शब्द सच लगते हैं कि समय न टालें, देरी के खतरनाक नतीजे होते हैं। ऐसी लंबी कानूनी कार्रवाई न्याय में देरी न्याय न मिलना है इस कहावत को साफतौर पर दिखाती है।

बेवजह टालमटोल न्याय के लिए खतरनाक, चेक बाउंस मामले में हस्तक्षेप से हाईकोर्ट का इनकार

न्यायिक प्रक्रिया में बेवजह टालमटोल न्याय के लिए खतरनाक है। ऐसी देरी न केवल लोगों का भरोसा कम करती है बल्कि कानून को राहत देने की बजाय परेशानी का जरिया भी बना देती है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह ने ब्रजेश कुमार के चेक बाउंस के मामले में हुए आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में विलियम शेक्सपियर के शब्द सच लगते हैं कि समय न टालें, देरी के खतरनाक नतीजे होते हैं। ऐसी लंबी कानूनी कार्रवाई न्याय में देरी न्याय न मिलना है इस कहावत को साफतौर पर दिखाती है। इसके अलावा ऐसी देरी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत तेजी से ट्रायल के अधिकार के मूल तत्व के भी विपरीत है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि मामले को कानून के दायरे में त्वरित गति से निपटाया जाए, जब तक कि किसी बड़ी अदालत द्वारा रोक न लगाई जाए।

याची ने अर्जी दाखिल कर चेक बाउंस के मामले में आजमगढ़ के न्यायिक मजिस्ट्रेट के 16 अक्टूबर 2025 के आदेश को रद्द करने की मांग की थी। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट फाइल करने के लिए बचाव पक्ष के सबूतों को फिर से खोलने की आरोपी की अर्जी को खारिज कर दी थी। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि पहले ही काफी मौके दिए जा चुके थे और 18 अप्रैल 2023 को सैंपल सिग्नेचर मिलने के बाद भी आरोपी एक्सपर्ट सबूतों को ध्यान से आगे बढ़ाने में नाकाम रहा।

एक फरवरी 2013 को हुई थी शिकायत

कोर्ट ने कहा कि शिकायत एक फरवरी 2013 को शुरू की गई थी और कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी का बयान 30 जुलाई 2021 को रिकॉर्ड किया गया था। बार-बार याद दिलाने और मौके देने के बावजूद आरोपी ने एक्सपर्ट रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लाने के लिए कोई असरदार कदम नहीं उठाया। ट्रायल कोर्ट ने आखिरकार 18 अगस्त 2025 को बचाव पक्ष के सबूत बंद कर दिए और मौका फिर से खोलने के लिए आठ सितंबर 2025 को देर से दाखिल अर्जी को सही तरीके से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी न पाए जाने पर यह माना कि ट्रायल कोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र में काम किया था।

कोर्ट ने यह देखते हुए कि इस तरह की लंबी लंबितता परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 की धारा 138 के तहत सारांश परीक्षणों के उद्देश्य को पराजित करती है, 2013 से लंबित चेक बाउंस मामले में कार्यवाही को रद्द करने की मांग वाली अर्जी को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि शिकायत दर्ज किए जाने के लगभग 13 साल बीत चुके हैं। कोर्ट ने मामले को अत्यधिक देरी का स्पष्ट उदाहरण बताया और दोहराया कि इस तरह की शिथिलता न्याय के लिए घृणित है। कोर्ट ने कहा कि ज्यादा देर करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत तेजी से ट्रायल की संवैधानिक गारंटी के खिलाफ है। कोर्ट ने कहा कि अर्जी के समर्थन में प्रस्तुत शपथपत्र के साथ संलग्न रिकॉर्ड को देखने पर इस मामले में एनआई एक्ट की धारा 138 शिकायत एक फरवरी 2013 को दाखिल की गई थी और अब 2026 चल रहा है, यानी लगभग 13 साल बीत चुके हैं और मामला लंबित है। ऐसे में इसमें और देर करने की इजाजत देना उचित नहीं है।

Dinesh Rathour

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Dinesh Rathour

दिनेश राठौर लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पिछले आठ सालों से काम कर रहे हैं। वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। कानपुर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। पत्रकारिता में 13 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश की डिजिटल मीडिया और प्रिंट जर्नलिज्म में अलग पहचान है। इससे पहले लंबे समय तक प्रिंट में डेस्क पर भी काम किया है। कुछ सालों तक ब्यूरो में भी रहे हैं। यूपी और राजस्थान के सीकर जिले में भी पत्रकारिता कर चुके हैं। यूपी की राजनीति के साथ सोशल, क्राइम की खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाते हैं। वायरल वीडियो की फैक्ट चेकिंग में दिनेश को महारत हासिल है।

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