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1984 का रिकॉर्ड तोड़ने में फिर कंजूसी दिखा गए मतदाता

उन्नाव, संवाददाता। 1984 का रिकार्ड तोड़ने की बेताबी इस बार भी सिर्फ इंतजार बनकर...

1984 का रिकॉर्ड तोड़ने में फिर कंजूसी दिखा गए मतदाता
हिन्दुस्तान टीम,उन्नावWed, 15 May 2024 12:35 AM
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उन्नाव, संवाददाता। 1984 का रिकार्ड तोड़ने की बेताबी इस बार भी सिर्फ इंतजार बनकर रह गई। 2024 लोकसभा चुनाव में जिले में मतदान प्रतिशत लक्ष्य के सापेक्ष भी नहीं पहुंच पाया। यहीं वजह रही कि सबसे ज्यादा मतदान का रिकॉर्ड का सपना भी टूट गया। यानी जिले के वोटरों ने घर से निकलने में कंजूसी दिखाई। परिणामस्वरूप 1984 लोकसभा चुनाव में हुई 58.42 फीसदी वोटिंग का रिकॉर्ड वर्ष 2029 तक क़ायम रहेगा क्यों कि इस बार जिले में 55.47 फीसदी मतदान हुआ है। अपेक्षा के अनुरूप मतदान न बढ़ने के पीछे अधिकारी तापमान का पारा चढ़ने को भी एक वजह मान रहे हैं।

पूर्व के चुनावों पर नजर डालें तो वर्ष 1951 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में 744918 मतदाताओं के मुकाबले 504827 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। तब विश्वंभर दयालु त्रिपाठी 168081 वोट पाकर जिले के पहले सांसद बने थे। वहीं चुनाव में मतदान फीसद सिर्फ 33.88 ही रहा था। वर्ष 1957 में हुए लोकसभा चुनाव में मतदान फीसद 39.52 के आंकड़े पर पहुंचा। वर्ष 1962 के चुनाव में 454579 मतदाताओं के सापेक्ष 196367 मतदाताओं ने वोट डाला। इस वर्ष मतदान का फीसदी 43.20 रहा था। चुनाव दर चुनाव बढ़ रहे मतदान फीसद के क्रम में 1967 के लोकसभा चुनाव में 48.23 फीसदी मतदान हुआ। वहीं वर्ष 1971 के लोकसभा चुनाव में 47.17 फीसद मतदान हुआ और वर्ष 1977 के लोकसभा चुनाव में पहली बार मतदान का प्रतिशत 50 के आंकड़े को पार कर सका। 1977 के चुनाव में 53.29 फीसदी मतदान हुआ था। इसी तरह 1980 के लोकसभा चुनाव में 46.63 फीसदी मतदान हुआ था। इसके बाद 1984 में हुए लोकसभा चुनाव में मतदाताओं ने सभी बंधन तोड़ते हुए रिकार्ड 58.42 फीसदी मतदान किया और जियाउर्रहमान को सांसद के तौर पर चुना। 1984 के चुनाव में जियाउर्रहमान लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए थे। इसी रिकार्ड को तोड़ने की बेताबी काम नहीं है। लोग कहते दिखे की रिकॉर्ड तोड़ने में मतदाताओं ने फिर कंजूसी दिखा दी है।

2024 की तरह आठ बार घट चुका मतदान प्रतिशत:

1984 के पहले हुए चुनाव में भी कई बार मतदान प्रतिशत घटता बढ़ता रहा। 1980 के चुनाव में 77 कई अपेक्षा सात फीसद मतदान घटा था। 1989 में हुए लोकसभा चुनाव में 51.40 फीसद ही मतदान हो पाया था। वहीं 1991 के चुनाव में मतदान फीसद सिर्फ 48.26 ही रहा। 1996 में सिर्फ 41.57 फीसदी ही मतदान हो पाया था। 1998 में फिर से मतदान में बढ़ोत्तरी हुई। उस वर्ष 53.70 वोटिंग हुई थी। छह लाख 27 हजार वोट वैलिड मिले थे। उस समय देवी बक्स सिंह को सांसदी के ताज पर जिले की जनता ने बैठाला था। 1999 में यह वोटिंग प्रतिशत फिर कम हुआ था। तब सिर्फ 49.9 फीसद लोगों ने ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया। वर्ष 2004 में बृजेश पाठक सांसद चुने गए। तब उन्हें 5.47 लाख कुल पड़े वोट में 1.78 लाख मत मिले थे। 11 प्रत्याशियों की लड़ाई में जीत हार का अंतर प्रतिद्वंद्वी से ज्यादा अधिक नहीं था। हालांकि तब भी मतदान प्रतिशत में कमी कारण बनी थी। वर्ष 2009 में 52.57 फीसद मतदान हुआ था। तब 10 प्रत्याशी मैदान में थे। तब कांग्रेस से सांसद रही अन्नू टंडन ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। वर्ष 2019 में हुए लोकसभा मतदान में यह आंकड़ा 56.47 फीसद रहा था जो इस वर्ष से एक फीसद कम रहा। चुनाव आयोग के जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष जिले की छह विधानसभाओं में 55.47 फीसद मतदान हुआ है।

फिर फिसड्डी रहे शहर- बांगरमऊ के मतदाता

पढ़े-लिखे माने जाने वाले शहरवासी लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव में अपनी हिस्सेदारी से फिर चूक गए। पूरे जिले में लोकसभा चुनाव का मतदान प्रतिशत 55.47 रहा। इसमें सिर्फ 54.87 प्रतिशत शहर के मतदाता ही मतदान कर सके। मतदान में सबसे आगे पुरवा व मोहान रहा। हालांकि शहर के मुस्लिम पोलिंग पर प्रतिशत अन्य की अपेक्षा अधिक दर्ज हुआ।

नम्बर गेम-

-1951 में पहली बार 4 33.88 फीसद मतदान हुआ था

-1984 में 58.42 फीसद रिकॉर्ड तोड़ वोट बरसे थे

-2019 में 56.47 फीसद मतदान हुआ था

-इस वर्ष एक फीसद कमी आई, मतदान प्रतिशत 55.47 रहा

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