
कोडीन सिरप मामले की जांच करने के दो सदस्यीय टीम का गठन
Unnao News - उन्नाव में कोडीन सिरप के अनियंत्रित उपयोग से युवा नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। हाल ही में एक फर्म द्वारा 1.07 लाख अवैध सिरप की खरीद की पुष्टि हुई है। डीएम गौरांग राठी ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित की है। इस मामले में कई सवाल उठ रहे हैं, जिनका जवाब तलाशा जा रहा है।
उन्नाव। कोडीन का अनियंत्रित उपयोग युवाओं को नशे की गिरफ्त में ले रहा है। बीते दिनों जिले की एक फर्म द्वारा 1.07 लाख अवैध कोडीन सिरप खरीदने की पुष्टि हुई थी। हालांकि यह सिरप कहां खपाया गया, यह गुत्थी अबतक नहीं सुलझ सकी है। इससे औषधि निरीक्षक की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आपके अपने अखबार हिंदुस्तान ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। जिसके बाद डीएम गौरांग राठी ने मामले को संज्ञान में लेकर जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित की है। अवैध कोडीन सिरप का काला कारोबार करने वाली लखनऊ की इधिक प्रा. लि. ने प्रदेश भर में इस सिरप की बिक्री की है।

बीते दिनों लखनऊ के अधिकारियों ने इधिका द्वारा सिरप की एक बड़ी खेप जिले में भेजे जाने की सूचना दी थी। इस इनपुट के आधार पर औषधि अशोक कुमार की जांच में बांगरमऊ की अंबिका हेल्थ केयर फर्म पर छापा मारा था। यहां 15 माह के दौरान 1.07 लाख सिरप खरीदे जाने संबंधी दस्तावेज मिले थे। इसदौरान फर्म संचालक अजय कुमार सिरप की बिक्री संबंधी कोई दस्तावेज नहीं प्रस्तुत कर सके थे। इतनी बड़ी मात्रा में सिरप खरीदे जाने की पुष्टि होने के बाद भी औषधि निरीक्षक ने आरोपी को नोटिस दिया था। हालांकि 13 दिनों तक नोटिस का जवाब नहीं मिला। इसपर आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसदौरान लखनऊ के अधिकारियों ने डीआई को फर्म संचालक के भाई अरुण कुमार द्वारा अजय मेडिकल स्टोर के रिटेल लाइसेंस पर छह हजार सिरप खरीदने की जानकारी दी थी। मामले की पड़ताल करने पहुंचे औषधि निरीक्षक को मेडिकल स्टोर बंद मिला था। इसपर यहां भी नोटिस चस्पा कराया था। शुक्रवार को आरोपी अरुण कुमार मौके पर पहुंचा और अपना पक्ष रखा। इसदौरान उसने खरीद की जो इनवाइस दी है उसमें एक दूसरे ड्रग लाइसेंस का जिक्र है। ऐसे में अब गुत्थी और उलझ गई है। शुक्रवार को डीएम गौरांग राठी ने डीआई अशोक कुमार को तलब कर मामले की जानकारी ली। हालांकि इसदौरान डीआई द्वारा दिए गए जवाबों से डीएम संतुष्ट नहीं दिखे। इसपर उन्होंने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम का गठन किया है। टीम में अतिरिक्त मजिस्ट्रेट आनंद नायक व नायब तहसीलदार पूर्णिमा तिवारी शामिल हैं। शुक्रवार को मामले की जांच कर रहे अतिरिक्त मजिस्ट्रेट आनंद नायक बांगरमऊ स्थित अजय मेडिकल स्टोर पहुंचे और दुकान का शटर खुलवाकर निरीक्षण किया। हालांकि इसदौरान फेनसाइपिक टी व फेनसाइटिक टीपी सिरप नहीं मिला। इसपर यहां मौजूद फेंसेडिल डीएक्स व विखोअल डीएस का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया है। -- कोट कोडीन सिरप की बिक्री कहां की गई, इसकी लगातार पड़ताल की जा रही है। अब मामले की जांच करने के लिए दो सदस्यीय टीम गठित की गई है। सिरप की कालाबाजारी में संलिप्त लोगों को जल्द ढंूढकर निकाला जाएगा। जो लोग दोषी पाए जाएंगे उनपर गैंगस्टर की कार्यवाई की जाएगी। गौरांग राठी डीएम, उन्नाव गलत लाइसेंस व पैन नंबर पर कैसे हुई बिलिंग विभागीय अधिकारियों ने जो दस्तावेज पेश किए हैं वह मामले को और उलझा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक अजय मेडिकल स्टोर के नाम से सिरप बेंचने के लिए फर्जी ड्रग लाइसेंस व पैन नंबर का इस्तेमाल किया गया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि औषधि विभाग की सख्त निगरानी के बावजूद यह खेल कैसे चलता रहा। जबकि विभाग द्वारा पैन नंबर, ड्रग लाइसेंस व बिक्री रिकार्डों की समय-समय पर जांच करने का दावा किया जाता है। जिम्मेदारों ने की बड़ी चूक नोटिस चस्पा करने से पहले औषधि विभाग द्वारा फर्म व ड्रग लाइसेंस की जांच की जाती है। हालांकि इस मामले में ऐसा नहीं हुआ, बिना ड्रग लाइसेंस व पैन नंबर की जांच किए अजय मेडिकल स्टोर संचालक को नोटिस दे दी गई। वहीं 1.07 लाख सिरप खरीदने के बावजूद अंबिका हेल्थकेयर फर्म संचालक को अपना पक्ष रखने के लिए तीन दिन का समय दे दिया गया। इसदौरान उसपर नजर तक रखना मुनासिब नहीं समझा गया। इसका फायदा उठाकर आरोपी फरार हो गया। --

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