
बाल विवाह बचपन की कब्रगाह, अब उन्नाव बोलेगा ‘ना’
Unnao News - उन्नाव में बाल विवाह को खत्म करने के लिए जिला प्रशासन ने 100 दिनों का अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य समाज को बाल विवाह के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना है। महिला कल्याण विभाग ने विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं, जिसमें स्कूली बच्चों और अभिभावकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
उन्नाव। बाल विवाह सिर्फ एक रस्म नहीं बल्कि बच्चों के बचपन, शिक्षा व सपनों की हत्या है। इसी अभिशाप को जड़ से मिटाने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। शासन के निर्देश पर जनपद में 100 दिनों तक बाल विवाह मुक्त भारत अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत समाज के हर वर्ग को बाल विवाह के दुष्प्रभावों के बारे में जागरुक किया जाएगा। जपनद में चार दिसंबर 2025 से 8 मार्च 2026 तक ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ के तहत जन-जागरूकता का विशेष दौर शुरू किया गया है। राज्य सरकार की इस राष्ट्रीय स्तर की पहल के मद्देनजर महिला कल्याण विभाग की निदेशक संदीप कौर ने जिला प्रोबेशन अधिकारी क्षमानाथ राय को पत्र भेजकर विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

जिला प्रोबशन अधिकारी ने बताया कि अभियान का उद्देश्य सिर्फ कानून का प्रचार नहीं, बल्कि मानसिकता में बदलाव लाना है। शासन ने निर्देश दिए हैं कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए समुदाय स्तर पर ‘शून्य सहनशीलता’ का वातावरण तैयार किया जाए। इस दौरान स्कूली बच्चों, अभिभावकों, पंचायत प्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण और संवाद कार्यक्रमों के ज़रिए बाल विवाह के दुष्परिणाम बताए जा रहे हैं। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए ब्लॉकवार समितियां गठित की गई हैं। जिसमें महिला कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस व समाज कल्याण के लोग शामिल हैं। इसके साथ ही बाल विवाह को रोकने के लिए पंचायत स्तर पर निकलेगा जन जागरूकता रथ भी निकाला जा रहा है। जो गांव-गांव जाकर लोगों को बाल विवाह के कानूनन अपराध होने के साथ-साथ समाज व परिवार दोनों के लिए अभिशाप होने के बारे में जागरूक करेगा। पांच साल में रोके गए बाल विवाह चाइल्ड हेल्प लाइन की टीम बाल विवाह रोकने के लिए हर संभव प्रयास करती है। इसी का परिणाम है कि साल 2021 में चार, 2022 में 13, 2023 में 13, 2024 में छह और 2015 में अबतक 12 बाल विवाह रोके गए हैं।

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