एलआईयू व पुलिस टीम की जांच से ग्रामीणों में हड़कंप
Unnao News - सोमवार को दही थाना क्षेत्र के गढ़ी गांव में एलआईयू और पुलिस की टीम ने नसीम नामक व्यक्ति की जानकारी जुटाने का प्रयास किया। गांव में बाहरी लोगों की संख्या बढ़ने से सुरक्षा संबंधी चिंताएं हैं। पुलिस ने...

सोनिक। दही थाना क्षेत्र के गढ़ी गांव में सोमवार दोपहर को एलआईयू और पुलिस टीम की गतिविधियों से ग्रामीणों में हलचल मच गई। टीम ने गांव पहुंच कर लोगों से नसीम नामक व्यक्ति के पते और पहचान से जुड़ी जानकारी जुटाने का प्रयास किया। मगर उसकी मौजूदगी का कोई सुराग नहीं मिल सका। एलआईयू अधिकारियों ने इस दौरान पूर्व ग्राम प्रधान से भी पूछताछ की और क्षेत्र की स्थिति का जायजा लिया। गढ़ी गांव की आबादी मौजूदा समय लगभग 250 लोगों की है। लेकिन यहां बड़ी संख्या में बाहरी प्रदेशों के लोग किराए पर कमरा लेकर रहकर अपनी जीविका चलाते हैं।
गांव में बिहार, बंगाल व नेपाल सहित कई राज्यों के लगभग एक हजार से अधिक लोग अपने परिवारों के साथ किराए पर मकानों में रहते हैं। इनमें से अधिकांश दही चौकी क्षेत्र स्थिति फैक्ट्रियों में नौकरी करते हैं और यहीं से अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि गांव में कई घर मालिकों ने किराए पर कमरे बनवा क र बाहर से आए श्रमिकों को दे दिए हैं। इस वजह से गांव की असली आबादी की तुलना में बाहरी लोगों की संख्या कई गुना बढ़ गई है। यही कारण है कि पुलिस व खुफिया विभाग की नजर लगातार इस क्षेत्र पर बनी रहती है। थाना क्षेत्र के कई मोहल्ला में रह रहे हैं बाहरी लोग सूत्रों की मानें तो दही थाना क्षेत्र अंतर्गत गढ़ी, टीकर, शिवनगर व कोयला वाली गली तथा हुसैननगर मोहल्ला में बिना ठोस पहचान पत्र और किराएदारों की सही जानकारी के ही लोग रह रहे हैं। जिससे सुरक्षा संबंधी जोखिम बना रहता है। एलआईयू टीम ने इस पहलू पर भी जानकारी जुटाई है और स्थानीय स्तर पर सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। टीम ने की जांच व पूछताछ, सत्यापन न होने हमेशा बना रहता खतरा औद्योगिक क्षेत्र में एसओजी की टीम ने भी जांच पड़ताल की और आसपास के इलाकों में काम करने वाले श्रमिकों से पूछताछ की। अधिकारियों का कहना है कि बाहर से आए किराएदारों की जानकारी को लेकर मकान मालिकों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। पुलिस का जोर इस बात पर है कि गांव में रहने वाले हर बाहरी व्यक्ति का सत्यापन कराया जाए ताकि भविष्य में किसी भी तरह की समस्या या आपराधिक गतिविधि से बचा जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि बड़ी संख्या में बाहरी लोगों के आने से गांव की सामाजिक संरचना बदल गई है। हालांकि अधिकांश लोग फैक्ट्रियों में नौकरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं, लेकिन सही पहचान और पुलिस सत्यापन न होने से खतरे की आशंका बनी रहती है।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




