हर कदम पर मौत... खुले नाले और टूटी पुलिया बनी ‘काल’
Unnao News - उन्नाव में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत एक हादसा नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा में लापरवाही का प्रतीक है। खुले नाले, बिखरी निर्माण सामग्री और जर्जर पुलिया से हर कदम पर खतरा है। नगर पालिका और यूडीए की जिम्मेदारियों की अनदेखी से शहर में कई दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन कोई सुधार नहीं हो रहा।

उन्नाव। नोएडा की सड़कों पर एक और जीवन खो गया। सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत सिर्फ हादसा नहीं बल्कि चेतावनी है-चेतावनी उस लापरवाही की जो हर कदम पर छिपी है। खुले नाले, जर्जर पुलिया और बिखरी निर्माण सामग्री, यह सिर्फ आंकड़े नहीं, यह उन आवाजों का प्रतीक है, जिन्हें सुनने वाला कोई नहीं। आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ की पड़ताल के दौरान भी शहर में सड़क सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी मिले। जहां निर्माण कार्य चल रहा, वहां मैटेरियल सड़कों पर बिखरा पड़ा है। जिम्मेदार चुप्पी साधे रहे। यूएडीए, नगर पालिका के अफसर भी इन बातों से ताल्लुक तक रखना वाजिब नहीं समझते।
नगर पालिका और यूएसडीए के कमरों में बैठकें होती हैं। अध्यक्ष, यूडीए उपाध्यक्ष समेत तमाम अफसर दावे करते हैं। लेकिन, नालों की सफाई नहीं हुई न ही सीवरों के ढक्कन ठीक करवाए गए। खुले पड़े नालों पर किसी का गौर नहीं है। सरकारी अस्पताल रोड़ ही नहीं बल्कि शहरभर में ऐसे नालों व खुले मैनहोलों की भरमार है, जिसकी चपेट में आकर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। सिविल लाइंस, आवास विकास जैसे वीआईपी इलाकों में नाले को ढका नहीं गया। ऐसी लापरवाहियों की फेहरिस्त लंबी है। नगर पालिका अफसर लापरवाही की चादर ओढ़कर सो रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, शहर में छोटे-बड़े लगभग 76 नाले हैं, जोकि खुले पड़े हैं। जहां घनी आबादी है, वहां हर कदम पर खतरा है। ताज्जुब देखिए कि पोस्टमार्टम हाउस वह जगह जहां सबसे ज्यादा भीड़ रहती, वहां कोई प्रबंध नही। यहीं नही, हिरन नगर नाले की साइड पुलिया की दीवार भी जर्जर होती चली गई। यहां न रिफ्लेक्टर लगे, न कोई प्रतीक चिन्ह। कोहरा बढ़ने पर यहां से गुजरने वाले लोग कब हादसे का शिकार हो जाएं। इसका कोई अता पता नहीं है। लोगों का कहना है कि इसकी शिकायत करने के बाद भी विभाग इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसके कारण आए दिन कहीं पशु गिरकर घायल हो रहे हैं तो कहीं राहगीर गिरकर चुटहिल होते। मुन्ना समोसा भंडार की नुक्कड़ पर बैठे गुड्डू बताते हैं कि शहर के आदर्श नगर स्थित वसुंधरा ज्वेलर्स के बगल में नाला खुला पड़ा है। यहां एक दफा अनियंत्रित होकर चालक समेत चौपहिया वाहन तक घुस चुका है। पशुओं के गिरने का सिलसिला आम बात है। इसे ढकने के लिए कई बार नगर पालिका को सूचना दी। लेकिन हर बार जल्द दीवार खड़ी करने व पत्थर से ढकने के आश्वासन अलावा कुछ नहीं मिला। लोगों ने बताया कि डीएम, सिटी मजिस्ट्रेट, नगर पालिका प्रशासक को भी प्रार्थनापत्र दिया लेकिन कोई हल नहीं निकला। इन वार्डों में समस्याओ की भरमार शिव नगर, पीतांबर नगर, लोकनगर, गांधी नगर, कलक्टरगंज, हिरन नगर, सिविल लाइंस, आजाद नगर के अलावा जिला अस्पताल रोड स्थित पोस्टमार्टम हाउस व आवास विकास मुख्य मार्ग के कई स्थानों पर खुले नालों को टूटे पत्थर शहरियों के लिए मुसीबत बने हैं। इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ऐसी ही स्थिति लखनऊ कानपुर हाईवे के दोनों तरफ के नालों की भी है, इन स्थानों पर कई जगह स्लैब नहीं डाले गए हैं। जहां खर्च की जरूरत, वहां रोते बजट का रोना पालिका मानसून आने से पहले हर वर्ष नालों की सफाई कराती है। इस पर 40 लाख रुपए का खर्च बीते साल आया था। लाखों सफाई के नाम पर खर्च करने वाली पालिका के पास नाला ढकने का कोई बजट नहीं है। यह व्यक्तव्य अभियंताओं का है। निर्माण विभाग के डेस्क पर जमा दर्जनों शिकायतों के बावजूद भी दो वर्ष में कोई प्रस्ताव तैयार नहीं हुए और अब खुले नाले जान जोखिम में डाल रहे। सड़क पर सामग्री, रातभर खड़ा रखते टैंकर गांधी नगर तिराहा से गदनखेड़ा बाईपास तक डिवाइडर को सुंदर बनाने का काम चल रहा है। इसके लिए गिट्टी, मौरंग सड़क पर इक्कठा है। रात के वक्त बिखरी गिट्टियों में गिरकर बाइक सवार चुटहिल हो रहे हैं। कुछ ऐसा ही दृश्य गांधी नगर तिराहा का है। यहां पर चौराहा सुंदर करने की कवायद जान जोखिम में डाल सकती है। टैंकर सड़क पर खड़ा रहने से कोहरे में हादसें की आशंका है। ------ अब तक हुए हादसे -7 अगस्त 2024 को शहर के कृष्णानगर मोहल्ले में पतंग लूटने के दौरान बच्चा मकान की छत से नाले में गिर गया था। 24 घन्टे बाद नाले में शव तैरता मिला। इसके बावजूद मोहल्ले में पत्थर से नहीं ढका गया। -22 मार्च 2022 को शहर के इंद्रा नगर स्थित कुआं वाली गली के पास के खुले नाले में क्रिकेट खेलता बच्चा गिरकर घायल हो चुका है। -27 जुलाई 2024 को दही थानाक्षेत्र के राजेपुर निवासी 25 वर्षीय शिवा का भी शव डिप्टी सीएम के बाईपास स्थित आवास के सामने खुले नाले में तैरते हुए मिला था। -23 अक्तूबर 2024 को अजगैन-मोहान मार्ग पर मंगलवार को तेज रफ्तार बेकाबू बाइक नवई गांव के पास 20 फीट गहरे नाले में चली गई थी। बोले लोग: कई बार हमने यूडीए और नगर परिषद के अफसरों से मिलकर इस समस्या से रूबरू कराया। अस्पताल रोड पर रफ़्तार लगाम लगाने के लिए स्पीड ब्रेकर भी जरूरत के स्थानों पर नहीं बने। कोहरे में खान गैरेज वाले नाले पर खतरा मंडराता है। कोई सुनने वाला नहीं है। दुर्गा शंकर पांडेय, आदर्श नगर लोकनगर की घनी बस्तियों में कई जगह नाले में ढक्कन तक नहीं है। स्लैब न ढलने पर आएदिन पशु गिरते हैं। कई बार ई-रिक्शा तक पलटते बचे। सड़क से सटकर जो गहरे खुले स्थान हैं, रिफ्लेटर या एरो चिन्ह तक नहीं। इस पर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। इसके लिए यूडीए, पालिका और पीडब्ल्यूडी को पत्र भी लिखेंगें ओमेंद्र लोधी 'पंकज' सभासद, लोकनगर --- वर्जन: गांधी नगर तिराहा से गदनखेड़ा बाईपास तक कवर्ड नाले का टेंडर को चुका है। इसका काम मार्च में शुरू हो जाएगा। अन्य स्थानों पर सम्बंधित विभाग से सर्वे कराकर रिपोर्ट तलब करेंगे। अमिताभ, एडीएम न्यायिक(निकाय प्रभारी- उन्नाव)
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