पश्चिम एशिया की जंग : उन्नाव के उद्योग बेहाल, 1700 करोड़ का निर्यात फंसा
Unnao News - पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण उन्नाव के चर्म उद्योग पर संकट आ गया है। लगभग 1700 करोड़ रुपये का निर्यात मुंबई बंदरगाह पर फंस गया है, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे के कारण भाड़ा 40 फीसदी बढ़ गया है, जिससे रोजगार पर संकट मंडरा रहा है।

पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध की चिंगारी अब हजारों किलोमीटर दूर उन्नाव के औद्योगिक गलियारों को झुलसाने लगी है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण लाल सागर मार्ग बाधित होने से जनपद का करीब 1700 करोड़ रुपये का निर्यात अधर में लटक गया है। जहाजों को केप ऑफ गुड होप का लंबा चक्कर लगाने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे न केवल मालभाड़े में 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है बल्कि लेदर और मांस उद्योग की पूरी सप्लाई चेन चरमरा गई है। मुंबई पोर्ट पर फंसे सैकड़ों कंटेनर अब स्थानीय उद्यमियों के लिए भारी आर्थिक नुकसान और भविष्य की अनिश्चितता का सबब बन रहे हैं।
पेश है आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ की पड़ताल..उन्नाव। प्रदेश की आर्थिक रीढ़ और करीब 20 हजार करोड़ रुपये की लेदर इंडस्ट्री में अहम स्थान रखने वाला उन्नाव का चर्म उद्योग इन दिनों वैश्विक संकट के दौर से गुजर रहा है। आलम यह है कि करीब 1700 करोड़ रुपये का तैयार चर्म उत्पाद मुंबई बंदरगाह पर अटक गया है, जिससे सप्लाई चेन की पूरी टाइमलाइन बिगड़ गई है।समुद्री रास्तों पर बढ़ा खतरा, 40 फीसदी तक बढ़ा भाड़ाचमड़ा उद्योग संघ उन्नाव चैप्टर के अध्यक्ष ताज आलम ने बताया कि स्थिति अत्यंत गंभीर है। जो कंटेनर पहले स्वेज नहर और लाल सागर के रास्ते 15 से 20 दिन में यूरोप और अमेरिका पहुंच जाते थे, उन्हें अब अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप का लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे यात्रा का समय बढ़कर 25 से 30 दिन हो गया है। समय बढ़ने के साथ-साथ कंटेनर किराया भी 30 से 40 फीसदी तक महंगा हो गया है। इसके अलावा निर्यातकों को युद्ध-जोखिम प्रीमियम के नाम पर अतिरिक्त बीमा का बोझ भी उठाना पड़ रहा है।पोर्ट पर खड़े ट्रक, डिलीवरी शेड्यूल हुआ फेलस्थानीय उद्यमियों के अनुसार, उन्नाव से चमड़ा उत्पाद, जरी परिधान और मांस के कंटेनर रोजाना मुंबई पोर्ट भेजे जाते हैं। युद्ध के चलते हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध और समुद्री रास्तों में बदलाव के कारण हजारों कंटेनर या तो बंदरगाह के यार्ड में खड़े हैं या शिपिंग लाइन से नई तारीख का इंतजार कर रहे हैं। समय पर डिलीवरी न होने से लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) की वैधता पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे विदेशी खरीदारों को पेनल्टी या भारी डिस्काउंट देने की नौबत आ गई है।रोजगार पर मंडराया संकटविशेषज्ञों और निर्यात परिषद के पूर्व पदाधिकारियों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों से अमेरिकी टैरिफ और यूक्रेन-रूस युद्ध ने पहले ही व्यापार को प्रभावित किया था, लेकिन वर्तमान स्थिति कोढ़ में खाज जैसी है। यदि आने वाले कुछ हफ्तों में हालात नहीं सुधरे, तो जिले की टेनरियों और चर्म इकाइयों में उत्पादन घटाना पड़ेगा। उत्पादन घटने का सीधा असर यहां काम करने वाले हजारों मजदूरों के रोजगार पर पड़ेगा।मांस निर्यात पर 500 करोड़ की मार चमड़े के साथ-साथ जनपद का बड़ा मांस निर्यात उद्योग भी इस संघर्ष की भेंट चढ़ गया है। जानकारों के मुताबिक, उन्नाव से प्रतिदिन 20 से 25 कंटेनर मांस उत्पाद मुंबई पोर्ट के लिए रवाना होते थे, जो खाड़ी देशों समेत ईरान, इंडोनेशिया, मलेशिया और तुर्की भेजे जाते थे। मौजूदा हालात में खाड़ी क्षेत्र के बंदरगाहों पर सुरक्षा जांच कड़ी होने और कुछ रूट पर बुकिंग रुकने से निर्यात में 40 फीसदी की गिरावट आई है। लगभग 500 करोड़ रुपये का माल या तो मुंबई पोर्ट पर होल्ड है या कोल्ड चेन वेयरहाउस में पड़ा है। जहाजों की देरी के कारण उद्यमियों को भारी 'डिटेंशन फीस' और पोर्ट ग्राउंड रेंट का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है।यूरोप की सप्लाई चेन हुई ध्वस्तजनपद से चर्म उत्पादों की बड़ी खेप फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, बेल्जियम, स्पेन, इंग्लैंड, स्वीडन, नॉर्वे और डेनमार्क जैसे यूरोपीय देशों में जाती है। युद्ध के चलते समुद्री मार्ग अनिश्चित होने से माल की ढुलाई समय पर नहीं हो पा रही है। जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे युद्धों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को 'स्थायी अस्थिरता' की ओर धकेल दिया है। जब तक खाड़ी और लाल सागर क्षेत्र में सुरक्षा हालात सामान्य नहीं होते, तब तक महंगे मार्ग और बढ़ती लागत भारतीय निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ाती रहेंगी।
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