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रकबा में वृद्धि व गुणवत्ता में सुधार के बाद भी आलू पर मद्दे की मार

रकबा में वृद्धि व गुणवत्ता में सुधार के बाद भी आलू पर मद्दे की मार

संक्षेप:

Unnao News - गंजमुरादाबाद में आलू के दामों में भारी गिरावट से किसान परेशान हैं। 90,000 की लागत के बाद भी आलू की बिक्री केवल 38,000 में हुई। मक्का के दाम गिरने और विदेशों में रैक नहीं लगने से आलू की मांग स्थानीय बाजारों तक सीमित रह गई है। किसान अब गेहूं बोने की तैयारी कर रहे हैं।

Jan 10, 2026 10:21 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, उन्नाव
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गंजमुरादाबाद। बाजार में आलू के दाम बेहद कम होने से किसानों के सपने टूट गए हैं। धान में नुकसान के बाद अब आलू के भी समुचित दाम नहीं मिलने से किसान परेशान हैं। आलू की फसल से किसानों को उम्मीद थी कि अच्छे दाम मिलेंगे, बेहतरीन पैदावार होगी, जिससे कर्ज से निपटने के साथ ही तमाम रुके काम भी पूरे हो सकेंगे, वहीं फसल अब भारी नुकसान का कारण बन गई है। दाम में भारी गिरावट ने किसानों के अनुमान, अरमान और आकलन को ध्वस्त कर दिया है। बताया जा रहा है, की रकबा में वृद्धि व गुणवत्ता में सुधार के बाद भी आलू पर मद्दे की मार जारी है।

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बांगरमऊ तहसील के गांव फतेहपुर खालसा निवासी किसान अब्दुल वली खां ने अपनी दास्तां बयां की। बताया कि दो-तीन बीघा खेत में आलू की फसल बोई थी। फसल बोने में 35 बोरी बीज,12 बोरी डीएपी व 12 बोरी यूरिया खाद,चार पानी,7000 की दवा डाली थी। जिसके बाद फसल खुदाई के समय 15 हजार के मजदूर भी लगे।इसके साथ 6000 रुपए के आलू पैकेट फसल भरने के लिए खरीदे। कुल मिलाकर 90,000 की लागत आई थी किंतु फसल बिक्री के दौरान कुल 170 पैकेट आलू उत्पादन हुआ। जिसकी 210 रुपए प्रति पैकेट बिक्री हुई तो करीब सारी फसल 38,000 की हुई। इस दशा में लागत के अनुरूप आधे दाम भी वसूल नहीं हो पाए। विदेश के लिए रैक नहीं लगने से कम हुए दाम गंजमुरादाबाद के शिवम आशाखेड़ा के राहूफ जैसे किसानों के अनुसार आलू श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान सहित कई देशों को जाता था। इस बार बांग्लादेश से संबंध ठीक नहीं हैं और अन्य देशों के लिए रैक नहीं लगने से आलू की मांग केवल स्थानीय बाजारों तक रह जाने से दाम गिर गए हैं। शाहजहांपुर, लखीमपुर, पीलीभीत, बरेली और आसपास लाल आलू की मांग बिल्कुल नहीं है। हालांकि जिन किसानों ने लाल आलू बोई उन आलू की आपूर्ति नेपाल हो रही है। मक्का के दाम गिरने से जल्दबाजी में आलू खोद रहे किसान किसानों ने बताया कि कुछ दिन पहले बाजार में मक्का के दाम 2450 रुपये प्रति क्विंटल थे। एथेनॉल बनाने में मक्का का प्रयोग होता था। अब कंपनियों ने मक्का पर निर्भरता कम करते हुए चावल से भी एथेनॉल बनाना शुरू कर दिया है। इससे बाजार में मक्का के दाम 16 से 17 सौ रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। बांगरमऊ, परियर, गंजमुरादाबाद, औरास क्षेत्र में मक्का भारी क्षेत्रफल में होता है, लेकिन मक्के के गिरते दाम से किसान चिंतित हैं। वे मक्का के स्थान पर गेहूं बोने में जुट गए हैं। कई किसानों का कहना है, की अब मक्का अब सिर्फ मुर्गी दाना के लिए बिक रहा है। गेहूं बोने के कारण जल्दबाजी में आलू खोदा जा रहा है।