फर्जी नर्स मामले की जांच करेगी तीन सदस्यीय टीम
Unnao News - उन्नाव के जिला महिला अस्पताल में एक महिला स्टॉफ नर्स ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे 6 साल तक काम किया। जब उसकी ड्यूटी पर गैरहाजिरी पर जांच हुई, तो उसके जीएनएम डिप्लोमा और मेडिकल कौंसिल का पंजीकरण प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की है।

उन्नाव, संवाददाता। जिला महिला अस्पताल में फर्जी दस्तावेजों के सहारे छह साल तक एक महिला स्टॉफ नर्स के पद पर काम करती रही। मामले उजागर हुआ तो समूचे स्वास्थ्य महकमा में हडकंप मच गया। अब स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच करने के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की है। जो एक सप्ताह में रिपोर्ट पेश करेगी। कानपुर जनपद के श्याम नगर निवासी सपना अग्रवाल का चयन साल 2020 में आउटसोर्स स्टॉफ नर्स के पद पर हुआ था। जिसके बाद छह साल से वह जिला महिला अस्पताल में सेवाएं दे रहीं थी। 22 फरवरी 2026 को ड्यूटी पर न पहुंचने पर कार्यवाहक सीएमएस डॉ. अरविंद आनंद ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा तो वह तीन दिन के अवकाश पर चली गई थी।
इस दौरान सीएमएस को उनके जीएनएम डिप्लोमा व मेडिकल कौंसिल में पंजीकरण प्रमाणपत्र फर्जी होने की जानकारी मिली। जिसपर उन्होंने जीएनएम के डिप्लोमा और यूपी नर्सेज एंड मिडवाइब्ज काउंसिल को ईमेल कर सपना अग्रवाल के प्रपत्र जांचने का अनुरोध किया था। जिसमें प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। मामले की जांच के लिए सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है। उन्होंने बताया कि स्टॉफ नर्स की तैनाती की शुरुआती प्रक्रिया सीएमओ कार्यालय से हुई थी। मामले की जांच के लिए एसीएमओ आरसीएच, डीपीएम व प्रशासनिक अधिकारी की तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्यवाई की जाएगी।जानकारों की माने तो फर्जी प्रपत्रों सहारे नौकरी करने वालों पर सख्त कार्यवाई का प्रावधान है। जिसमें नौकरी रद्द करने के साथ आपराधिक श्रेणी में मुकदमा दर्ज कराने की कार्यवाई भी की जा सकती है। इसके साथ ही नौकरी की अवधि में किए गए भुगतान की रिकवरी भी हो सकती है।
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