
सरकारी अस्पतालों में मरीज बढ़े दवाएं घटी, डॉक्टर परेशान
संक्षेप: Unnao News - उन्नाव के जिला अस्पताल में चिकित्सकों को नई सरकारी निर्देशों के कारण दवाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। बाहर से दवाएं लिखने पर रोक है, जबकि अस्पताल की फार्मेसी में कई आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। मरीज महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर हैं। प्रशासन ने पर्याप्त दवाएं उपलब्ध कराने के लिए शासन को मांग पत्र भेजा है।
उन्नाव। शासन के नए निर्देश ने चिकित्सकों को धर्मसंकट में डाल दिया है। जहां एक ओर डॉक्टरों को बाहर की दवाएं लिखने को मना किया गया है, वहीं दूसरी ओर स्टोर में कई जीवनरक्षक दवाओं की कमी है। ऐसे में कई बार डॉक्टरों द्वारा लिखी गईं दवाएं औषधि कक्ष में नहीं मिल पाती हैं। इससे मरीज निजी मेडिकल स्टोरों पर महंगे दाम की दवाएं खरीदने को मजबूर हैं। उमाशंकर दीक्षित संयुक्त चिकित्सालय (जिला अस्पताल) की फार्मेसी में 290 प्रकार की दवाएं उपलब्ध होने का दावा किया जाता है। डॉक्टर के लिखने पर मरीजों को यह दवाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराने के निर्देश हैं।

हालांकि, यह दावा धरातल पर नजर नहीं आता है। पर्याप्त आपूर्ति न होने से फार्मेसी दवाओं की किल्लत से जूझ रहा है। इन दिनों यहां सिर्फ 230 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। इनमें भी कई ऐसी दवाएं हैं लगभग खत्म होने की कगार पर हैं। शनिवार को हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित शिवकिशोर चिकित्सकीय परामर्श के लिए जिला अस्पताल पहुंचे। यहां चिकित्सक जांच के बाद उन्हें सात तरीके की दवाएं लिख दी। जब वह फार्मेसी पहुंचे तो यहा सिर्फ पांच तरीके की दवाएं ही उपलब्ध हो सकीं। जबकि खून को पतला करने वाली इकोएस्प्रिन टैबलेट बाहर से लेनी पड़ी। इसी तरह माखी गांव निवासी रमापति को चिकित्सकों ने चार टेबलेट लिखीं। जिनमें कोलेस्ट्राल के लिए दी जाने वाली एटोरवास्टेटिन टैबलेट फार्मेसी में नहीं मिली। कोट सभी चिकित्सकों को अस्पताल में मिलने वाली दवाएं लिखने के निर्देश दिए गए हैं। बाहर से दवाएं लिखने वाले चिकित्सकों पर कड़ी कार्यवाई की जाएगी। डॉ. राजीव गुप्ता सीएमएस, जिला अस्पताल कोट शासन द्वारा सरकारी अस्पतालों को पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कोई दवा मौजूद न होने पर डॉक्टर दवा का फार्मूला या ऐसी दवाएं लिख सकते हैं, जो जन औषधि केंद्र में मौजूद हों। डॉ. सत्यप्रकाश सीएमओ चिकित्सकों की बात जिला अस्पताल में तैनात चिकित्सकों ने नाम न छपने की शर्त पर बताया कि शासन का यह निर्देश एक सराहनीय फैसला है। हालांकि कई बार मरीज की हालत के मद्देनजर उसे ऐसी दवा लिखनी पड़ती है जो सरकारी अस्पताल को नहीं भेजी जाती या खत्म हो गई है। ऐसे में शासन के निर्देश का अनुपालन कराने के लिए दवाओं की पर्याप्त आपूर्ति की जानी चाहिए। जनऔषधि केंद्र पर लटक रहा ताला मरीजों को सस्ती व गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के लिए साल 2018 में जन औषधि योजना की शुरुआत की गई थी। यहां 80 पैसे से लेकर 135 रुपये तक की 1800 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। हालांकि 19 सितंबर को डीआई के निरीक्षण में जिला अस्पताल स्थित केंद्र में कई खामियां मिली थी। इसके बाद से केंद्र का संचालन बंद हो गया है। दवाओं के लिए भेजा मांगपत्र जिला अस्पताल में मरीजों को पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हो सकें, इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने शासन को मांग पत्र भेजा है। इसमें जिला महिला अस्पताल में 33 व पुरुष अस्पताल के लिए 32 दवाएं शामिल हैं। जिसमें एमॉक्सिलिन, सिप्रोफ्लाक्सेसिन, मेट्रोनीडाजोल एंटीबायोटिक, टिटनेस, प्रोपोफाल, एंटी रैबीज, नॉरएर्डनलीन टारटे्रट जैसे महत्वपूर्ण इंजेक्शन हैं।

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