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मासूम की मौत के बाद परिजनों का अस्पताल में हंगाम

मासूम की मौत के बाद परिजनों का अस्पताल में हंगाम

तीन वर्षीय मासूम की जिला अस्पताल की इमर्जेंसी में मौत को लेकर सोमवार की सुबह आक्रोशित परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने डॉक्टर पर गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाया। डीएम ने एसडीएम को जांच के लिए भेजा। उन्होंने जिला अस्पताल पहुंच जांच पड़ताल की और पुलिस ने बच्चे के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। एसडीएम का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट अाने के बाद सब साफ हो जाएगा।

पुरवा कोतवाली के मर्दनखेड़ा गांव में रहने वाले भोले का तीन वर्षीय बेटे कृष्णा की तबीयत खराब थी। सोमवार की सुबह हालत बिगड़ी तो पिता और दादी कृष्णा को लेकर जिला अस्पताल की इमर्जेंसी वार्ड में 7.55 बजे पहुंचे। जहां ईएमओ डॉक्टर तौसीफ ने हालत नाजुक देख बच्चे को भर्ती कर लिया और इलाज के दौरान कृष्णा को दो इंजेक्शन लगाए गए। कुछ देर बाद डॉक्टर बृज किशोर इमर्जेंसी पहुंच गए। वहां उन्होंने बच्चे की हालत सीरियस देखी तो परिजनों से सिटी स्कैन और ब्लड जांच करवाने को लिखा। परिजन बच्चे को लेकर ब्लड कक्ष पहुंचे। जहां लंबी लाइन होने की वजह से बच्चे का ब्लड सैम्पल भी नहीं लिया जा सका। भीड़ होने से परिजन बच्चे को लेकर दोबारा इमर्जेंसी पहुंच गए। जहां दोबारा बच्चे की हालत बिगड़ने लगी। परिजनों ने डॉक्टर बृज किशोर को बुला कर बच्चे को दिखाया। मासूम की सांसे थम चुकी थी। डॉक्टर ने बच्चे को 11.30 पर मृत घोषित कर दिया। बच्चे की मौत की जानकारी होने पर आक्रोशित परिजनों ने डॉक्टर पर गलत इंजेक्शन लगाए जाने का आरोप लगाते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। मामला बढ़ा तो एसडीएम मेधा रूपम, सीएमओ डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, सीएमएस एके द्विवेदी और सदर सीओ स्वतंत्र कुमार सिंह व सदर कोतवाल अरविन्द सिंह समेत काफी संख्या में फोर्स पहुंच गया। डीएम रवी कुमार एनजी का कहना है कि मामले की रिपोर्ट एसडीएम से तलब की गई है। उसके बाद ही हकीकत सामने अाएगी।

डॉक्टर पर आरोप लगाते हुए परिजनों ने जिला अस्पताल की इमर्जेंसी के बाहर एक घंटे तक रोते बिलखते हुए हंगामा करते थे। जिससे मामला बढ़ता चला गया और मामले की जानकारी डीएम को हुई। तब उन्होंने घटना से एसडीएम को अवगत करा कर कहा कि घटनास्थल पर पहुंच जल्द ही रिपोर्ट पेश की जाए। एसडीएम मेधा रूपम ने अस्पताल पहुंच सीएमओ डॉक्टर डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को बुलाया। इसी दौरान परिजन मासूम का शव लेकर शहर के आईबीपी चौराहा तक ही पहुंचे थे, तभी एम्बुलेंस चालक को फोन कर वापस अस्पताल बुलाया गया। मामला बढ़ता देख सदर सीओ समेत कोतवाल भी मौके पर पहुंच गए और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भिजवाया गया। जबकि परिजन मासूम के शव का पोस्टमार्टम नहीं करवाना चाहते थे।

मासूम की मौत के बाद पिता भोले व दादी रम्मो देवी ने आरोप लगाया कि डॉक्टर ने गलत इंजेक्शन लगा दिया और कहा कि अगर बच्चे की हालत बिगड़ने की बात पहले बता देते तो किसी निजी अस्पताल में इलाज करवा लिया जाता। मगर डॉक्टरों ने किसी बात की जानकारी नहीं दी। जबकि बच्चे के इलाज करने वाले डॉक्टर बृज किशोर ने बताया कि बच्चा कई दिनों से घर पर कनवर्जन (झटक ा) की बीमारी से ग्रसित था। हालत बिगड़ने पर परिजनों ने इमर्जेंसी में भर्ती कराया। बच्चे को डाइजीपाम का इंजेक्शन लगाया गया है। छाती में पानी चले जाने से मौत होना बता रहे है।

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  • Web Title: Death of youth, commotion