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उपभोक्ता फोरम में वाद बढ़े, फैसलों की रफ्तार भी बेहतर

उपभोक्ता फोरम में वाद बढ़े, फैसलों की रफ्तार भी बेहतर

संक्षेप:

Unnao News - उन्नाव के उपभोक्ता फोरम में उपभोक्ताओं की जागरूकता बढ़ी है। 2024 और 2025 में 581 मामलों का निस्तारण हुआ है। ग्रामीण उपभोक्ता भी अब अपनी शिकायतें लेकर फोरम पहुंच रहे हैं। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्टाफ और अवसंरचना को मजबूत किया गया, तो यह फोरम एक बेहतर मॉडल बन सकता है।

Jan 05, 2026 10:21 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, उन्नाव
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उन्नाव। जनपद के उपभोक्ता फोरम में उपभोक्ताओं की जागरूकता के साथ-साथ न्यायिक फैसलों की रफ्तार भी बनी हुई है। साल 2024 और 2025 के आंकड़े बताते हैं कि एक तरफ जहां उपभोक्ता अपनी शिकायतें लेकर लगातार फोरम की शरण में पहुंच रहे हैं, वहीं न्यायाधीश की ओर से मामलों के निस्तारण में भी सकारात्मक पहल जारी है। इसी के चलते बीते दो सालों में 581 मामलों को निस्तारित किया जा सका है। बाजार में तेजी से बढ़ती प्रतिस्पर्धा व जटिल सेवाओं के बीच अक्सर उपभोक्ताओं को परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। हालांकि उपभोक्ता लंबी अदालती प्रक्रिया के डर से चुप रह जाता है।

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ऐसे में उपभोक्ता फोरम न सिर्फ आर्थिक मुआवजा दिलाने का काम करता है, बल्कि गलत कंपनियों पर जुर्माना लगाकर उन्हें अनुशासित भी करता है। उपभोक्ता फोरम को सामान्य अदालतों की तुलना में कम खर्चीला और अपेक्षाकृत तेज प्लेटफॉर्म माना जाता है, जहां उपभोक्ता कंपनियों, दुकानदारों, बीमा, बैंक, टेलीकॉम व अन्य सेवा प्रदाताओं के खिलाफ वाद दर्ज कर सकता है। इससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ती है और उपभोक्ताओं में जागरूकता आती है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में कुल 194 वादकारी अपनी शिकायत लेकर उपभोक्ता फोरम पहुंचे। इसी अवधि में न्यायाधीश ने 296 मामलों का निर्णय किया, जबकि साल के अंत तक 899 वाद लंबित रह गए। वहीं साल 2025 में 174 नए फरियादी उपभोक्ता फोरम पहुंचे, जबकि 285 मामलों का निस्तारण किया गया। लंबित वादों की संख्या घटकर 788 रह गई। जानकारों की माने तो इन आंकड़ों से साफ है कि फोरम केवल नए दाखिल वादों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुराने मामलों को भी प्राथमिकता के साथ निपटाने की कोशिश की गई। अनेक मामलों में उपभोक्ताओं को धनवापसी, मुआवजा और सेवा में सुधार जैसे राहत आदेश दिए गए, जिससे फोरम में उपभोक्ताओं का भरोसा भी बढ़ा है। ग्रामीण उपभोक्ता भी हो रहे जागरुक कानून विशेषज्ञों के मुताबिक ऑनलाइन पोर्टल, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन और जागरूकता अभियानों ने भी लोगों को अधिकारों के प्रति सजग किया है। ऐसे में ग्रामीण उपभोक्ता भी जागरुक हुए हैं। अब ग्रामीण क्षेत्रों से भी उपभोक्ता बिजली बिल, बीमा, बैंकिंग, मोबाइल सेवाओं, ई-कॉमर्स और खराब उत्पादों से जुड़ी शिकायतें लेकर फोरम पहुंच रहे हैं। स्टाफ व अवसंरचना को मजबूती की जरूरत फोरम से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि लक्ष्य केवल वादों की संख्या घटाना नहीं, बल्कि न्यायोचित और संतुलित फैसले देना है, ताकि उपभोक्ता को वास्तविक राहत मिल सके। लंबे समय से लंबित फाइलों को चिह्नित कर प्राथमिकता से निस्तारित किया जा रहा है और दोनों पक्षों को सुलह-समझौते के विकल्प भी सुझाए जा रहे हैं। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले वर्षों में स्टाफ और अवसंरचना में और मजबूती मिले तो जिले का उपभोक्ता फोरम राज्य स्तर पर एक बेहतर मॉडल बन सकता है।