एचपीवी वैक्सीन की अनुप्लब्धता बढ़ा रही सर्वाइकल कैंसर का जोखिम

Jan 19, 2026 10:16 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, उन्नाव
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Unnao News - उन्नाव में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के लिए एक गंभीर खतरा बन चुका है, जिसका मुख्य कारण ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) है। डॉक्टर किशोरियों को वैक्सीनेशन कराने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक एचपीवी वैक्सीन उपलब्ध नहीं कराई है। जागरूकता की कमी के कारण कई महिलाएं बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज कर रही हैं।

एचपीवी वैक्सीन की अनुप्लब्धता बढ़ा रही सर्वाइकल कैंसर का जोखिम

उन्नाव। गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्वाइकल कैंसर आज महिलाओं के लिए 'साइलेंट किलर' बन चुका है। इसका मुख्य कारण ह्यूमन पेपिलोमा वायरस है। ऐसे में डॉक्टर किशोरावस्था में वैक्सिनेशन कराने की सलाह देते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला महिला अस्पताल को अबतक एचपीवी वैक्सीन उपलब्ध नहीं कराई गई है। इससे किशोरियां महंगे दामों पर वैक्सीन लगवाने को मजबूर हैं। सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से, यानी ग्रीवा की कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि से शुरू होता है। यह धीरे-धीरे फैलता है और जननांग से जुड़े हिस्सों को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह महिलाओं में चौथा सबसे आम कैंसर है, जो ज्यादातर ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) के संक्रमण से होता है।

जो असुरक्षित यौन संपर्क के जरिए महिलाओं को गिरफ्त में लेता है। इस बीमारी का शुरुआती दौर में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, हालांकि असामान्य रक्तस्राव, लगातार दर्द कमर या पैरों में, बदबूदार सफेद स्राव और पेशाब में खून इसके संकेत हैं। पिछले एक साल में इस बीमारी से पीड़ित दर्जनों महिलाएं जिला महिला अस्पताल में उपचार के लिए पहुंची। जब डॉक्टरों ने इन लक्षणों की शुरुआत के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि कई महिलाओं में सालों से यह लक्षण दिखाई दे रहे थे, हालांकि जागरुकता के अभाव में उन्होंने इन्हें नजरअंदाज कर दिया। जिससे बीमारी एडवांस स्टेज में पहुंच गई। जिला महिला अस्पताल की डॉ. अल्का ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए किशोरियों को एचपीवी वैक्सिनेशन कराने की सलाह दी जाती है। इसके लिए अस्पताल आने वाली किशोरियों को जागरुक किया जाता है। जिला महिला अस्पताल में सर्वाइकल कैंसर की जांच नि:शुल्क की जाती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की समस्या होने अनदेखा न करें और चिकित्सकीय परामर्श व जांच कराएं। एचपीवी के जोखिम कारक एचपीवी संक्रमण 90 प्रतिशत मामलों का कारण है, जो असुरक्षित यौन संबंधों से फैलता है। धूम्रपान, कमजोर इम्यून सिस्टम, कई यौन साथी या कई बच्चों को जन्म देना जोखिम बढ़ाता है। -- बचाव के आसान तरीके -एचपीवी वैक्सीनेशन: 14 साल की किशोरियों के लिए सबसे प्रभावी, 15 साल से अधिक उम्र की किशोरियों डॉक्टर की सलाह पर लग सकती है वैक्सीन। -नियमित जांच: 21 साल से हर तीन साल में पैप स्मीयर या एचपीवी टेस्ट। -स्वस्थ आदतें: धूम्रपान छोड़ें, सुरक्षित यौन संबंध रखें, फल-सब्जियां खाएं। -- कोट सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाली गंभीर हालांकि रोके जाने वाली बीमारी है। हालांकि जागरुकता के अभाव में बीमारी की शुरुआती स्टेज में कई बार महिलाएं लक्षणों को अनदेखा कर देती हैं। ऐसे में बीमारी से बचाव के लिए 25 वर्ष की उम्र से सर्वाइकल कैंसर की जांच शुरु करा देनी चाहिए। 25 से 65 साल की महिलाओं को हर पांच साल में एक बार एचपीवी जांच या पैप टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। डॉ. फौजिया अंजुम सीएमएस, जिला महिला अस्पताल

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