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15 अगस्त, 2020|9:53|IST

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विद्यालयों में पाठ्य पुस्तकों की ढुलाई में खर्च होंगे 14 लाख

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बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में बच्चों की निःशुल्क पाठ्य पुस्तक स्कूल तक पहुचाने के लिए शाशन स्तर से 14 लाख रुपये का बजट पेश किया गया है। पाठ्य पुस्तकों को स्कूल तक पहुचाने में कितना खर्च हुआ है इसका बिल देने पर संबंधित अधिकारी को भुगतान किया जाएगा।

जनपद में किताबों की आपूर्ति होने के बाद 3 दिन में उनका सत्यापन करके बीआरसी और बीआरसी से दो दिन के भीतर स्कूलों में भेजने का आदेश हैं। जिनको स्कूल तक पहुचाने की जिम्मेदारी खंड शिक्षा अधिकारी की है। स्कूल तक किताबों के पहुचने पर उसमें कितना खर्च आया उसका भुगतान बिल के आधार पर करने का आदेश है। हालांकि जनपद स्तर भुगतान को लेकर आगे असमंजस की स्थिति बनती दिख रही है। क्योंकि परिवहन ब्यय का बिल खंड शिक्षा अधिकारियों को देना है। जिसके बाद बीएसए उसके आधार पर भुगतान करेंगे। बल्कि ज्यादातर स्कूलों में किताबो को शिक्षको द्वारा बीआरसी से स्कूल तक पहुचाने का कार्य हुआ है। ऐसे में शिक्षकों के खर्चे का भुगतान कैसे होंगा। इस को लेकर तमाम शिक्षक सोच में पड़े है। इस बाबत बीएसए प्रदीप पांडेय का कहना है कि वैसे तो बीईओ को ही किताबे स्कूल तक पहुचानी थी। मगर इसके बाद भी शिक्षको से यह काम लिया गया है तो वह शिक्षक से संबंधित बिल प्राप्त करे और भुगतान होने पर उसके हिस्से का रुपया अदा करे।

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  • Web Title:14 lakhs will be spent on transportation of text books in schools